बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

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18:48 IST

ईरान और यमन पर हमले के खिलाफ पाकिस्तान में आवाज, मक्का पैक्ट से सरकार की मुश्किल बढ़ी

पाकिस्तान में लोग चाहते हैं कि सरकार ईरान और यमन पर हमले से दूर रहे, जबकि मक्का पैक्ट सरकार और सेना को सऊदी अरब से बांधे हुए है।

ईरान और यमन पर हमले के खिलाफ पाकिस्तान में आवाज, मक्का पैक्ट से सरकार की मुश्किल बढ़ी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पाकिस्तान में इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरम है। इमरान खान को जेल से रिहा करने के लिए सरकार पर पहले से दबाव है और उनकी पार्टी ने मुल्क में बड़ा लॉन्ग मार्च भी रखा है। इसी बीच मध्य पूर्व का संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा और सऊदी अरब और यमन के बीच हमले और जवाबी हमले चल रहे हैं।

कुछ समय पहले तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच मक्का करार हुआ था। इसके मुताबिक इन तीन में से किसी एक देश पर हमला हुआ तो बाकी दो उसकी फौजी मदद के लिए आएंगे। उधर यमन के हूथियों ने सऊदी पर हमले किए हैं और यमन पर अपना कंट्रोल भी बढ़ाया है। इससे सऊदी अरब और यमन की सऊदी समर्थक सरकार परेशान हो गई है। पहले हूथियों से सीधी लड़ाई से कतरा रहा पाकिस्तान अब उनसे लड़ने की बात करने लगा है।

हालांकि पाकिस्तान ने अब तक साफ नहीं किया है कि वह किन मोर्चों पर लड़ेगा। इस सबके पीछे अमेरिका के होने का आरोप भी लग रहा है। वजह यह बताई जा रही है कि सऊदी जैसे खाड़ी देशों की हिफाजत की जिम्मेदारी अमेरिका ने ली है। मगर ईरान के साथ जंग में उसे तगड़ा झटका लगा है, इसलिए खाड़ी में उसकी फौजी ताकत फिलहाल कमजोर हुई है और खर्च भी बढ़ गया है। अमेरिकी जनता के दबाव की वजह से वह खुलकर सऊदी की मदद नहीं कर सकता। ऐसे में दुनिया के लिए किराये की फौज कही जाने वाली पाकिस्तानी सेना को सऊदी की मदद के लिए भेजे जाने की खबर है।

अब सवाल यह है कि पाकिस्तान की जनता का दबाव क्यों है। पाकिस्तान में शिया मुसलमानों की तादाद ज्यादा है और ईरान भी बहुसंख्यक शिया आबादी का मुल्क है। दोनों देशों के शिया संस्कृति और धार्मिक तौर-तरीकों में काफी मिलते-जुलते हैं। ईरान और पाकिस्तान पड़ोसी हैं और दोनों के बीच 900 किमी से ज्यादा लंबी सरहद है। पाकिस्तान में पेट्रोल का बहुत सारा गैरकानूनी कारोबार ईरान से आए सस्ते तेल पर चलता है, और यह कारोबार वहां के गरीब लोग करते हैं।

अमेरिका और ईरान की जंग में जब ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई मारे गए, तब पाकिस्तान में अमेरिका और इस्रायल के खिलाफ बड़ा मोर्चा निकला था और तनाव बन गया था। यमन से पाकिस्तान का सीधा रिश्ता नहीं है, लेकिन ईरान ने यमन के हूथियों को समर्थन दिया है, इसलिए पाकिस्तान की जनता की हमदर्दी हूथियों के साथ भी रहती है।

क्या पाकिस्तान सरकार जनता की बात सुनेगी, इस पर कहा गया है कि पाकिस्तान में सरकार को सेना चलाती है और सेना के प्रमुख जो चाहें वही मुल्क में चलता है। लोकतंत्र वहां बस बोलने भर को है। फिर भी जनता, खासकर इमरान खान की पार्टी, लोगों को जगा रही है और लोकतंत्र के लिए बड़ा आंदोलन खड़ा कर रही है।

दूसरी तरफ सेना प्रमुख मुनीर अमेरिका, दुबई और इस्रायल की चाकरी में ही अपनी भलाई समझते हैं, इसलिए उन्हें वही करना पड़ेगा जो अमेरिका कहेगा। इसी रास्ते से उनका पैसा और पाकिस्तान में उनकी सत्ता बनी रह सकती है। इसलिए आने वाला वक्त पाकिस्तान के लिए बदलाव का दौर है।

एक तरफ जनता का बढ़ता दबाव है और दूसरी तरफ मक्का पैक्ट। इन दोनों के बीच पाकिस्तान सरकार और सेना दबाव में हैं, क्योंकि उन्हें सऊदी और अमेरिका के साथ राजनीतिक रिश्ते अच्छे रखने हैं। इस करार से उनकी दुनिया भर में चर्चा हुई है, इसलिए वे आसानी से इससे पीछे नहीं हट सकते। कई चीजों के लिए पाकिस्तान दूसरे देशों पर बहुत निर्भर है।

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