गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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नीट पीजी पहली फेरी: टॉप रैंकर्स की पहली पसंद अब रेडियोलॉजी नहीं, जनरल मेडिसिन

नीट पीजी पहली फेरी: टॉप रैंकर्स की पहली पसंद अब रेडियोलॉजी नहीं, जनरल मेडिसिन तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पढ़ाई PT24 टीम

नीट पीजी 2026 की पहली फेरी की काउंसलिंग के आंकड़ों में टॉप रैंक वाले युवा डॉक्टरों की पसंद बदलती दिख रही है। अव्वल 100 में से 51 ने एमडी मेडिसिन चुना।

पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स चुनने के मामले में देश के मेडिकल स्टूडेंट्स का रुझान इस बार बदला हुआ दिख रहा है। नीट पीजी (NEET PG) की पहली फेरी की काउंसलिंग के आंकड़े सामने आए हैं। इनके मुताबिक टॉप रैंक वाले युवा डॉक्टरों की पहली पसंद अब रेडियोलॉजी की जगह जनरल मेडिसिन बन गई है।

मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने नीट पीजी 2026 काउंसलिंग की पहली फेरी की फाइनल अलॉटमेंट लिस्ट जारी की है। उसके हिसाब से इस साल अव्वल रैंकर्स ने बड़ी संख्या में जनरल मेडिसिन को चुना है। इससे दोनों स्पेशलिटी के बीच का फर्क साफ बढ़ता दिख रहा है।

पहली फेरी में कुल 63,177 एमडी-एमएस (MD-MS) सीटों के लिए काउंसलिंग हुई। इनमें टॉप रैंकर्स की पहली पसंद जनरल मेडिसिन ही रही। अव्वल 100 स्टूडेंट्स में से 51 उम्मीदवारों ने एमडी मेडिसिन लिया, जबकि रेडियोडायग्नोसिस चुनने वाले 28 रहे। यानी दोनों कोर्स के बीच 23 सीटों का बड़ा अंतर दर्ज हुआ।

पिछले साल, यानी 2025 में यह अंतर कम था। तब 46 स्टूडेंट्स ने मेडिसिन और 40 ने रेडियोलॉजी चुनी थी।

अव्वल 501 अलॉटमेंट देखें तो अकेले 233 उम्मीदवारों ने जनरल मेडिसिन ली। एमडी जनरल मेडिसिन के बाद दूसरी सबसे पसंदीदा शाखा एमडी रेडियोडायग्नोसिस रही, जिसमें 149 सीटें अलॉट हुईं। ये दोनों बड़ी स्पेशलिटी मिलाकर अव्वल 501 में से कुल 382 सीटें ले गईं, जो कुल अलॉटमेंट का करीब 76.2 फीसदी है। रेडियोलॉजी के मुकाबले जनरल मेडिसिन में लगभग 1.6 गुना ज्यादा सीटें अलॉट हुईं।

अव्वल 501 में सबसे ज्यादा चुने गए कोर्स इस तरह रहे: एमडी जनरल मेडिसिन 233, एमडी रेडियोडायग्नोसिस (रेडियोलॉजी) 149, एमडी डर्मेटोलॉजी 37, एमएस जनरल सर्जरी 25, एमएस ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी 15, (NBEMS) जनरल मेडिसिन 10, एमडी न्यूक्लियर मेडिसिन 9, एमडी पीडियाट्रिक्स 7, एमडी ऑर्थोपेडिक 6 और (NBEMS) रेडियोडायग्नोसिस 6।

तो पसंद क्यों बदल रही है? मेडिकल एजुकेशन के जानकारों और रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारियों के मुताबिक युवा डॉक्टर अब पीजी कोर्स को आखिरी मंजिल नहीं मानते। वे इसे करियर का लॉन्च पैड या ट्रांजिट स्टेशन समझते हैं। एमडी मेडिसिन के बाद कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और क्रिटिकल केयर जैसी सुपर या नैरो स्पेशलिटी के कई रास्ते खुल जाते हैं। करियर की शुरुआत में सारे विकल्प खुले रखना चाहने वाले स्टूडेंट्स को यह लचीलापन खूब भाता है।

दूसरी तरफ रेडियोलॉजी अपनी जगह एक लोकप्रिय विषय है, मगर मेडिकल इमेजिंग में एआई (AI) का दखल तेजी से बढ़ने से स्टूडेंट्स के मन में भविष्य को लेकर शंका और उलझन पैदा हुई है। इसके अलावा बेहद महंगे रेडियोलॉजी उपकरण लगाने का भारी खर्च और लंबे समय तक ऑक्यूपेशनल रेडिएशन का खतरा जैसी व्यावहारिक चिंताएं भी उनके फैसले पर असर डाल रही हैं।

सीटों की गिनती भी एक वजह है। देशभर में जनरल मेडिसिन की 4,000 से ज्यादा सीटें हैं, जबकि रेडियोलॉजी की करीब 1,200 सीटें हैं। ऐसे में पसंद के और अच्छे कॉलेज में सीट मिलने की संभावना जनरल मेडिसिन में ज्यादा रहती है।

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