NEET PG: एमबीबीएस के बाद एमडी जनरल मेडिसिन में सबसे ज्यादा 5,654 सीटें
नेशनल मेडिकल कमीशन की NEET-PG सीट मैट्रिक्स के मुताबिक एमडी जनरल मेडिसिन में सबसे ज्यादा सीटें हैं।
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एमबीबीएस पूरा करना हर मेडिकल स्टूडेंट के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। लेकिन बहुत से स्टूडेंट वहीं नहीं रुकते। वे आगे किसी खास बीमारी या इलाज के क्षेत्र में एक्सपर्ट बनना चाहते हैं। इसके लिए एमबीबीएस के बाद उन्हें NEET-PG परीक्षा पास करनी पड़ती है और पोस्ट ग्रैजुएशन में दाखिला लेना होता है। तब सवाल उठता है कि एमबीबीएस के बाद किस मेडिकल फील्ड में सबसे ज्यादा सीटें होती हैं और स्टूडेंट सबसे ज्यादा एमडी (MD) किस विषय में करते हैं।
नेशनल मेडिकल कमीशन की NEET-PG सीट मैट्रिक्स के मुताबिक एमडी जनरल मेडिसिन में सबसे ज्यादा 5,654 सीटें थीं। अब जानते हैं कि यह क्षेत्र असल में क्या है और इसके अलावा किन विषयों में स्टूडेंट एक्सपर्ट बन सकते हैं।
NMC की जारी की हुई सीट मैट्रिक्स में शैक्षणिक सत्र के लिए MD, MS और पीजी डिप्लोमा के ब्रॉड स्पेशलिटी कोर्स में कुल 52,173 सीटें दर्ज की गई थीं। इनमें सबसे ज्यादा 5,654 सीटें MD जनरल मेडिसिन की थीं। इस विषय में डॉक्टरों को शरीर के अलग-अलग अंगों से जुड़ी बीमारियों की पहचान करना, उनकी जांच करना और दवाओं से इलाज करना सिखाया जाता है।
जनरल मेडिसिन के डॉक्टर बुखार, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉइड, सांस की बीमारियों और कई दूसरी परेशानियों का इलाज करते हैं। मरीज की बीमारी समझने के लिए वे उसकी मेडिकल हिस्ट्री, लक्षण और जांच रिपोर्ट देखते हैं। जरूरत पड़ने पर वे मरीज को दूसरे स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास भी भेजते हैं।
इस क्षेत्र में MD करने के बाद डॉक्टर अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, क्लिनिक और दूसरी स्वास्थ्य संस्थाओं में काम कर सकते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ वे किसी खास बीमारी के इलाज में भी महारत हासिल कर सकते हैं।
MD जनरल मेडिसिन उन डॉक्टरों के लिए अच्छा विकल्प है जो अलग-अलग तरह की बीमारियों को समझना और उनका इलाज करना चाहते हैं। इस कोर्स में मेडिकल स्टूडेंट को गंभीर बीमारियों की पहचान, जांच रिपोर्ट समझना, दवाओं से इलाज और गंभीर मरीजों की देखभाल की ट्रेनिंग मिलती है।
इस क्षेत्र की खासियत यह है कि इसमें किसी एक खास अंग की जगह शरीर के कई अंगों और उनसे जुड़ी बीमारियों पर ध्यान दिया जाता है। मिसाल के तौर पर, अगर किसी मरीज को लंबे समय से बुखार है या उसे डायबिटीज के साथ हाई ब्लड प्रेशर भी है, तो जनरल मेडिसिन का डॉक्टर उसकी पूरी सेहत समझकर इलाज की योजना बना सकता है।
लेकिन इस विषय में सबसे ज्यादा सीटें होने का मतलब यह नहीं कि दाखिला आसान है। दाखिला NEET-PG में प्रदर्शन, कॉलेजों में उपलब्ध सीटें, आरक्षण के नियम और काउंसलिंग के दौरान उम्मीदवार की पसंद पर निर्भर करता है।
MD में दाखिले के लिए आम तौर पर MBBS की डिग्री पूरी करना, जरूरी इंटर्नशिप और दूसरी पात्रता शर्तें पूरी करना जरूरी होता है। इसके बाद उम्मीदवार NEET-PG परीक्षा देते हैं। परीक्षा में मिली रैंक और काउंसलिंग के आधार पर उन्हें कॉलेज और विषय चुनने का मौका मिलता है।
अपनी पसंद का विषय चुनते वक्त स्टूडेंट को सिर्फ सीटों की गिनती नहीं देखनी चाहिए। अपनी दिलचस्पी, काम करने का तरीका, मरीजों से बात करने की काबिलियत और आगे चलकर कैसा डॉक्टर बनना है, इन बातों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
कुल मिलाकर, NEET-PG की सीट मैट्रिक्स में MD जनरल मेडिसिन सबसे ज्यादा सीटों वाला विषय रहा है। फिर भी ज्यादा सीटें होने से किसी भी विषय में दाखिले की गारंटी नहीं मिल जाती। सही स्पेशलाइजेशन वही है जिसमें स्टूडेंट की दिलचस्पी हो और जिसमें वह लंबे समय तक मेहनत करके मरीजों की अच्छी सेवा कर सके।