शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

पोलैंड में सुप्रीम कोर्ट पर टकराव, राष्ट्रपति नवरोत्स्की सेनेगल दौरा छोड़कर लौटे

पोलैंड में सुप्रीम कोर्ट पर टकराव, राष्ट्रपति नवरोत्स्की सेनेगल दौरा छोड़कर लौटे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

अदालत के अध्यक्ष के निलंबन और इमारत में पुलिस के घुसने के बाद राष्ट्रपति कैरोल नवरोत्स्की ने सेनेगल का दौरा अधूरा छोड़ा।

पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोत्स्की ने सेनेगल का अपना तय दौरा बीच में ही छोड़ दिया और उनका विमान जल्दी से देश लौट आया। वजह है सुप्रीम कोर्ट में चल रहा अभूतपूर्व विवाद और अदालत की इमारत में पुलिस का दाखिल होना। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे संकट के वक्त राष्ट्राध्यक्ष का देश में मौजूद रहना सबसे ज्यादा जरूरी है।

पूरा झगड़ा पोलैंड के संवैधानिक न्यायालय के अध्यक्ष के निलंबन के आसपास घूम रहा है। पुलिस ने अदालत की इमारत में दाखिल होकर सुरक्षा अपने हाथ में ले ली, जिससे देश में हलचल मच गई। विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की अगुवाई वाली यूरोप-समर्थक सरकार ने अदालत के अध्यक्ष को गलत तरीके से पद से हटाया है। इस फैसले के विरोध में हजारों लोग अदालत के बाहर सड़क पर उतर आए हैं और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन चल रहा है।

अदालत पर कब्जे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच कई साल से खींचतान चल रही है। एक तरफ टस्क की यूरोप-समर्थक सरकार है और दूसरी तरफ दक्षिणपंथी पार्टी 'लॉ एंड जस्टिस' (PiS), जिसने 2015 से 2023 तक पोलैंड पर राज किया। आलोचकों के मुताबिक पिछले दौर में PiS ने न्यायव्यवस्था को अपने काबू में करने की कोशिश की थी, जिस पर यूरोपियन यूनियन ने पोलैंड पर भारी जुर्माना भी लगाया था।

मौजूदा राष्ट्रपति कैरोल नवरोत्स्की को इसी PiS पार्टी के करीबी माना जाता है। इस साल संसद ने छह नए जज चुने थे, जिनमें से तीन को शपथ दिलाने से उन्होंने साफ मना कर दिया था। इसी बीच PiS सरकार के नियुक्त किए हुए और अदालत के अध्यक्ष बोगदान स्विएटकोव्स्की ने संसदीय बहुमत से चुने गए नए जजों को पद संभालने से रोक दिया। फिर शुक्रवार को हुए नाटकीय घटनाक्रम में उन्हें आखिरकार निलंबित कर दिया गया, और विवाद चरम पर पहुंच गया।

अदालत के बाहर जमा प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर खतरनाक चीजें फेंकीं और पथराव किया। कुछ लोग अदालत के बाहर शांति से प्रार्थना करते दिखे, जबकि कई लोग प्रधानमंत्री टस्क और उनकी सरकार के खिलाफ तख्तियां लेकर नारेबाजी कर रहे थे।

प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने अपने रुख का बचाव करते हुए कहा है कि देश में कानून का राज फिर से कायम करना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पिछली हुकूमत में कानून तोड़े जाने के बाद न्यायव्यवस्था को दुरुस्त करना मुश्किल है, फिर भी इसके लिए सख्त फैसले लेने जरूरी हैं। 2023 में सत्ता में आने के बाद से टस्क सरकार न्यायपालिका की आजादी को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

दूसरी तरफ विपक्ष के नेताओं ने सरकार की बेहद कड़े शब्दों में आलोचना की है। पूर्व प्रधानमंत्री मातेउश मोराव्हिएत्स्की ने कहा कि अदालत पर यह कब्जा सत्ता का जबरन किया गया गलत इस्तेमाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसा से कभी इंसाफ नहीं मिल सकता। पूर्व न्यायमंत्री ज्बिग्निएव ज्योब्रो ने इस घटना को 'बगावत' बताया और लोगों से सड़कों पर उतरकर विरोध करने की अपील की।

इस हालात पर बाहर से भी नजर रखी जा रही है। पोलैंड में अमेरिका के राजदूत टॉम रोज ने एक बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में जो हो रहा है, वह बहुत गंभीर है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से उलट हैं और अदालत के बाहर जमा भारी भीड़ को देखते हुए कानून-व्यवस्था का सवाल खड़ा हो सकता है। राजदूत के मुताबिक अमेरिका को पोलैंड की सुरक्षा, स्थिरता और लोकतांत्रिक भविष्य की बड़ी चिंता है, लेकिन देश के अंदरूनी मामलों में दखल देने का अमेरिका का कोई इरादा नहीं है।

#नागपुर#सियासत#PT24#Politics#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे