नासिक के TCS मामले में आरोपी दानिश एजाज शेख को कोर्ट से राहत नहीं, जमानत अर्जी ठुकराई
नासिक रोड के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 28 अक्टूबर को TCS के नासिक BPO यूनिट से जुड़े मामले में मुख्य आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के BPO यूनिट से जुड़े मामले में मुख्य आरोपी दानिश एजाज शेख को कोर्ट से राहत नहीं मिली। नासिक रोड के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 28 अक्टूबर को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला कथित लैंगिक उत्पीड़न, धार्मिक भावनाएं आहत करने और जबरन धर्मांतरण का है।
आरोपी पर धर्मांतरण की साजिश रचने, यौन शोषण और जातिगत अपमान समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह केस मार्च 2026 में नासिक के देवलाली कैंप पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 156/2026 के तहत दर्ज हुआ था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक आरोपी और दो सह-आरोपियों पर एक युवती के धर्मांतरण की साजिश रचने का आरोप है।
अभियोजन का कहना है कि युवती और आरोपी एक-दूसरे को कॉलेज के दिनों से जानते थे। आरोप है कि आरोपी ने युवती पर धार्मिक प्रथाएं निभाने का दबाव डाला। उसे नमाज पढ़ने, रोजा रखने और पर्दा करने के लिए मजबूर किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
इसके अलावा आरोपी पर यह भी आरोप है कि उसने शादी का भरोसा देकर और अपनी पहले हो चुकी शादी की बात छिपाकर युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाए। धर्मांतरण की कथित साजिश और जातिगत अपमान के आरोप भी इसी मामले का हिस्सा हैं।
सुनवाई में बचाव पक्ष ने दावा किया कि आरोपी और युवती साल 2022 से आपसी सहमति के रिश्ते में थे। बचाव पक्ष ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी सात महीने से ज्यादा वक्त से हिरासत में है, इसलिए उसे जमानत दी जाए। बचाव पक्ष ने यह दलील भी दी कि मामले के दो दूसरे सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। सरकारी पक्ष और युवती, दोनों ने आरोपी की जमानत का विरोध किया।
कोर्ट ने जब्त किए गए दस्तावेज, धार्मिक पुस्तकें और बाकी उपलब्ध सबूत देखे। बचाव पक्ष की तरफ से पेश की गई WhatsApp चैट की प्रामाणिकता साबित नहीं होने की बात भी दर्ज की गई। रिकॉर्ड और हालात देखने के बाद कोर्ट ने माना कि सबूत सिर्फ सहमति से चले प्रेम संबंध की ओर इशारा नहीं करते। आरोपी द्वारा युवती पर कथित तौर पर दबाव बनाए जाने से जुड़े हालात भी ध्यान में रखे गए।
युवती ने कोर्ट में आरोपी की रिहाई का विरोध करते हुए अपनी जान और सुरक्षा को खतरा होने की आशंका जताई। उसकी ओर से एडवोकेट मिलिंद कुरकुटे ने कोर्ट में पक्ष रखा। सभी पक्षों की दलीलें और रिकॉर्ड देखने के बाद कोर्ट ने दानिश एजाज शेख की जमानत याचिका खारिज कर दी।
इस केस की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाया गया था। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम (POSH) कानून के पालन और कथित गंभीर खामियों को लेकर सवाल उठाए थे। मामला सामने आने के बाद TCS ने आरोपी कर्मचारियों को निलंबित कर अंदरूनी जांच शुरू की थी। धर्मांतरण, यौन शोषण और कार्यस्थल पर उत्पीड़न के आरोपों की जांच अलग-अलग स्तरों पर चल रही है।
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