गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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नागपुर एमडी मामला: कथित सरगना के घर मिली डायरी से जांच को नए सुराग की उम्मीद

नागपुर एमडी मामला: कथित सरगना के घर मिली डायरी से जांच को नए सुराग की उम्मीद तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

क्राइम ब्रांच 1.54 करोड़ रुपये की एमडी जब्ती के मामले में कथित सरगना विशाल उर्फ फल्ली गुप्ता के घर मिली डायरी की एंट्रियां खंगाल रही है।

नागपुर के इंद्रा नगर में न्यू नरसाला रोड पर कथित ड्रग सरगना विशाल उर्फ फल्ली गुप्ता के घर की तलाशी हुई। इस तलाशी में एक डायरी मिली है। 1.54 करोड़ रुपये की मेफेड्रोन (एमडी) जब्ती की जांच कर रही क्राइम ब्रांच के लिए यह डायरी एक अहम सुराग बन सकती है। पुलिस इसकी एंट्रियों में नाम, संपर्क नंबर और दूसरे इशारे देख रही है, ताकि नागपुर के ड्रग कारोबार से कथित तौर पर जुड़े और तस्करों, स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटरों और सप्लायरों तक पहुंचा जा सके।

पुलिस को शक है कि यह मामला एक संगठित सप्लाई चेन का है, जो महाराष्ट्र से बाहर तक फैली हो सकती है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि डायरी में उन लोगों की जानकारी है या नहीं, जिन्होंने ड्रग की खेप मंगवाई, जिन्होंने नागपुर पहुंचने के बाद माल संभाला और जिन्होंने उसे छोटी मात्रा में आगे बांटा।

यह तलाशी नरेंद्र नगर के विजया अपार्टमेंट के किराए के फ्लैट से 1.54 करोड़ रुपये की एमडी पकड़े जाने की जांच का हिस्सा है। उस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का शक है कि 24 साल का गुप्ता महाराष्ट्र के बाहर से यह नेटवर्क चला रहा था और व्हाट्सऐप कॉल के जरिए सबको कोऑर्डिनेट करता था।

डायरी की जांच अब इसलिए अहम हो गई है कि उसकी बातों से पकड़े गए पांच लोगों के आगे के सुराग मिल सकते हैं। पुलिस देख रही है कि उसमें पहचान में आने लायक नाम, फोन नंबर, लेन-देन से जुड़ी जानकारी या ऐसी कोई बात है या नहीं, जिसे पूछताछ और आगे की जांच में पुख्ता किया जा सके। गुप्ता से जुड़े लोगों की संभावित भूमिका भी परखी जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि डायरी के नाम, अगर कोई हैं, स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटरों, बिचौलियों, ट्रांसपोर्टरों या राज्य के बाहर के सप्लायरों से मेल खाते हैं या नहीं।

हालांकि डायरी की अहमियत इस पर टिकी है कि उसकी एंट्रियां असल में क्या बताती हैं और क्या उनकी अलग से पुष्टि हो सकती है। सिर्फ डायरी मिलने से किसी और की कथित ड्रग रैकेट में भूमिका साबित नहीं होती।

तलाशी में पुलिस को तीन संदिग्ध फर्जी आधार कार्ड भी मिले, जिनमें से एक गुप्ता की गर्लफ्रेंड के नाम का है। परिसर से दो तोले सोने के कंगन भी बरामद हुए। पुलिस को अब इन कार्डों के असली होने की जांच करनी होगी, यह भी पता करना होगा कि वे कैसे बने और क्या उनका कथित तौर पर इस मामले से जुड़ी किसी गतिविधि में इस्तेमाल हुआ। सिर्फ इन कागजात की बरामदगी से यह साबित नहीं होता कि इनका इस्तेमाल कैसे या किस मकसद से हुआ।

पुलिस के मुताबिक गुप्ता ने न्यू नरसाला रोड पर पहली मंजिल का यह परिसर 1 सितंबर को किराए पर लिया था। जांच अधिकारी किराए पर लेने के हालात देख रहे हैं और यह भी कि इस जगह का कथित ड्रग कारोबार से कोई संबंध था या नहीं।

पुलिस का शक है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश से ड्रग की खेप मंगवाकर नागपुर लाई जाती थी, फिर उसे छोटे हिस्सों में बांटकर स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटरों को दिया जाता था। जांच के मुताबिक शुभम उर्फ डोरेमॉन दिलीप नरवरिया ने कथित तौर पर गुप्ता के कहने पर विजया अपार्टमेंट का फ्लैट किराए पर लिया था। गुप्ता पर शक है कि वह महाराष्ट्र से बाहर रहकर व्हाट्सऐप कॉल से यह सब कोऑर्डिनेट कर रहा था।

यह बात साबित हुई तो इससे ऐसा मॉडल सामने आएगा जिसमें माल मंगवाना, स्थानीय स्टोरेज और खुदरा सप्लाई अलग-अलग लोग संभालते थे। जांच अधिकारी गिरफ्तार लोगों की सटीक जिम्मेदारियां तय करने और खेप की आवाजाही में मदद करने वाले बाकी लोगों की पहचान करने में लगे हैं। जब्त खेप कहां से आई और कथित सप्लायर कौन हैं, यह पता लगाना भी जरूरी हो गया है। डायरी से सुराग मिल सकते हैं, लेकिन नेटवर्क कितना बड़ा है, यह साबित करने के लिए पुलिस को पुख्ता सबूत चाहिए होंगे।

तलाशी की कार्रवाई डीसीपी (डिटेक्शन) दीपक अग्रवाल और एसीपी (क्राइम) वैभव जाधव के मार्गदर्शन में हुई। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर विनायक गोलहे और उनकी टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। क्राइम ब्रांच अब गुप्ता के घर से मिले सामान को एमडी जब्ती मामले के दूसरे सबूतों के साथ मिलाकर देख रही है। मकसद यह जानना है कि गिरफ्तार लोग किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे या नहीं और कथित सप्लाई चेन महाराष्ट्र के दूसरे इलाकों और पड़ोसी राज्यों तक पहुंचती है या नहीं।

असली सवाल यह है कि क्या डायरी जांच को मौजूदा जब्ती और गिरफ्तारियों से आगे ले जाकर उन लोगों तक पहुंचा सकती है, जिन पर ड्रग की फंडिंग, सप्लाई और बिक्री का कथित आरोप है। क्राइम ब्रांच के लिए यह तभी काम की होगी, जब एंट्रियों से पुख्ता पहचान, बातचीत के रिकॉर्ड और लेन-देन का ब्योरा मिले। जब तक ये सुराग पक्के नहीं होते, संदिग्ध कड़ियां जांच के दायरे में ही हैं और अब तक सामने न आए लोगों की कथित भूमिका साबित नहीं हुई है।

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