नाशिक के अंबड एमआईडीसी इलाके के भूजल में तय सीमा से 1000 गुना ज्यादा क्रोमियम मिला
पर्यावरण संस्था के अध्ययन में अंबड एमआईडीसी के भूजल में हेक्सावैलेंट क्रोमियम 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला, जबकि भारतीय मानक 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर का है।
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धार्मिक शहर के तौर पर पहचाने जाने वाले नाशिक से एक चिंता बढ़ाने वाली खबर आई है। 'साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल' नाम की पर्यावरण संस्था के एक अध्ययन में नाशिक के भूजल में ऐसे रासायनिक तत्व मिले हैं, जो कैंसर की वजह बन सकते हैं। संस्था के मुताबिक पानी में पीने के पानी की सुरक्षित सीमा से करीब 1000 गुना ज्यादा जहरीला रसायन पाया गया है।
संस्था की रिपोर्ट के अनुसार यह मामला नाशिक के औद्योगिक इलाके अंबड एमआईडीसी का है। वहां के भूजल के नमूनों में 'हेक्सावैलेंट क्रोमियम' (Hexavalent Chromium) मिला है। यह रसायन मेटल फिनिशिंग, इलेक्ट्रोप्लेटिंग और पेंट बनाने वाले कारखानों से निकलता है, और रिपोर्ट के मुताबिक इन्हीं कारखानों से निकलकर पानी में घुल गया है।
आंकड़े देखें तो भारतीय मानक के हिसाब से पीने के पानी में इस तत्व की मात्रा सिर्फ 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए। लेकिन अंबड इलाके के नमूनों में यह मात्रा 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर निकली है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि नाशिक महापालिका की तरफ से नियमित और समय पर पानी की सप्लाई नहीं होती। इस वजह से इलाके के कई लोग पीने और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए बोरवेल और कुओं के भूजल पर निर्भर रहते हैं। अध्ययन में सामने आया है कि इस दूषित पानी के लंबे संपर्क से लोगों में त्वचा की गंभीर बीमारियां, शरीर पर फोड़े, लिम्फ नोड्स में सूजन और किडनी व लिवर के रोग देखे गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक यह दूषित पानी स्थानीय नालों से होकर सीधे गोदावरी नदी में भी मिल रहा है। आने वाले समय में नाशिक में सिंहस्थ कुंभमेला होने वाला है। ऐसे में संस्था ने कहा है कि गोदावरी के घाटों पर स्नान करने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सेहत के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
संस्था ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) के कामकाज पर कड़ी टिप्पणी की है। उसका कहना है कि बार-बार शिकायतें करने के बावजूद प्रशासन ने सिर्फ एक ही कंपनी को नोटिस दिया है। संस्था ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि पानी की जांच के असली नतीजे छिपाकर लोगों को अंधेरे में रखा गया।
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में गुस्सा है। अब कुंभमेले से पहले गोदावरी नदी और आसपास के इलाके के भूजल की तुरंत उच्चस्तरीय जांच कराने और सख्त कार्रवाई करने की मांग जोर पकड़ रही है।