बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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21:14 IST

चंद्रपुर में पानी का संकट गहराने के आसार, अवैध पानी खींचना रोकने के लिए कलेक्टर ने दिए आदेश

कम बारिश से सूखे जैसे हालात की आशंका के बीच कलेक्टर वसुमना पंत ने हर राजस्व मंडल में उड़न दस्ते बनाने को कहा है।

चंद्रपुर में पानी का संकट गहराने के आसार, अवैध पानी खींचना रोकने के लिए कलेक्टर ने दिए आदेश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

कम बारिश की वजह से चंद्रपुर जिले में सूखे जैसे हालात बनने की आशंका है। ऐसे में पीने के पानी की उपलब्धता पक्की करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष वसुमना पंत ने निर्देश दिए हैं कि जलाशय, नदी, तालाब, कोल्हापुरी बांध, नहर और दूसरे जल स्रोतों से होने वाले अनधिकृत और बेतरतीब जल दोहन को रोकने के लिए हर राजस्व मंडल में उड़न दस्ते बनाए जाएं।

निर्देशों में नियमित और अचानक जांच करने को कहा गया है। साथ ही हर सोमवार को की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने के लिए भी कहा गया है। प्रशासन का मकसद साफ है कि मौजूदा जल भंडार को बचाया जाए और लोगों को पीने के लिए पर्याप्त पानी मिले।

लेकिन इन निर्देशों के बाद जिले में कई अहम सवाल उठ रहे हैं। क्या कार्रवाई सिर्फ अनधिकृत पंप, मोटर और पाइपलाइन तक सीमित रहेगी, या बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट, निर्माण कार्य, कमर्शियल पानी सप्लाई और पानी इस्तेमाल करने वाली दूसरी इकाइयों की भी असल में जांच होगी? जिले के लोगों की नजर इस पर है कि इस मुहिम से आम नागरिकों को राहत मिलेगी या जल संकट के दौर में भी पानी का कमर्शियल इस्तेमाल पहले की तरह चलता रहेगा।

चंद्रपुर जिला औद्योगिक लिहाज से अहम है। इसलिए कम बारिश और संभावित पानी की किल्लत को देखते हुए बड़े उद्योगों, विस्तार वाली कंपनियों, निर्माण प्रोजेक्ट और दूसरे कमर्शियल प्रतिष्ठानों के पानी के इस्तेमाल की समीक्षा जरूरी मानी जा रही है। अपेक्षा जताई जा रही है कि जिस इलाके में लोग पीने के पानी के लिए जूझ रहे हों, वहां उद्योग और कमर्शियल कामों के लिए पानी किस स्रोत से, कितनी मात्रा में और किस परमिशन के आधार पर लिया जा रहा है, इसकी साफ जानकारी प्रशासन दे।

सवाल यह भी है कि जल संकट के दौरान गैर जरूरी निर्माण और विस्तार प्रोजेक्ट में पानी के इस्तेमाल पर अस्थायी सीमा या कटौती लगाई जाएगी या नहीं, और संबंधित विभाग कंपनियों के रोजाना पानी इस्तेमाल, सप्लाई के स्रोत, भूजल दोहन की परमिशन और इस्तेमाल किए गए पानी के रीसाइकल की व्यवस्था की जांच करेंगे या नहीं। हालांकि जिलाधिकारी के उपलब्ध निर्देशों से यह साफ नहीं होता कि सभी उद्योग या निर्माण अपने आप बंद करने का आदेश है। जल भंडार की स्थिति, संबंधित परमिशन और लागू नियमों के आधार पर जरूरी पाबंदियों की समीक्षा प्रशासन के लिए अहम होगी।

रेत उत्खनन और ढुलाई पर भी निगरानी की जरूरत बताई गई है। खासकर वर्धा और पैनगंगा नदी के इलाके और दूसरे जल स्रोतों के पास होने वाली खुदाई पर नजर रखना जरूरी है। सवाल है कि प्रशासन रेत घाटों की स्थिति, खुदाई की परमिशन, पर्यावरण की शर्तें और नदी इलाके की गतिविधियों की समीक्षा करेगा या नहीं, और अवैध खुदाई मिलने पर तुरंत कार्रवाई होगी या नहीं। फिर भी उपलब्ध आदेश के आधार पर पूरे जिले में रेत उत्खनन पर अपने आप रोक लग गई, ऐसा नहीं कहा जा सकता। कोई भी रोक संबंधित नियम, पर्यावरण की स्थिति और सक्षम प्राधिकारी के आदेश के मुताबिक ही लागू होनी चाहिए।

आरओ प्लांट, पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर और टैंकर के कारोबार की जांच की अपेक्षा भी जताई जा रही है। पूछा जा रहा है कि कमर्शियल प्रतिष्ठान नगर परिषद की सप्लाई, अधिकृत भूजल स्रोत या किसी दूसरे वैध स्रोत से पानी ले रहे हैं या नहीं, उनके पास जरूरी परमिशन हैं या नहीं, आरओ प्लांट में भूजल दोहन और पानी की गुणवत्ता के मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, और प्राइवेट टैंकर कहां से पानी भरते हैं, उसकी परमिशन है या नहीं और सप्लाई की मात्रा का रिकॉर्ड रखा जाता है या नहीं। किसी इलाके में पीने के पानी की गंभीर किल्लत होने पर सक्षम प्राधिकारी कमर्शियल इस्तेमाल पर जरूरत के हिसाब से नियंत्रण लाएगा या नहीं, यह भी पूछा जा रहा है। यह साफ रहे कि सभी आरओ प्लांट, पैकेज्ड वॉटर उद्योग या टैंकर सेवाओं पर सीधे रोक लगने की बात मान लेना ठीक नहीं होगा। वैध कारोबार और अवैध जल दोहन में फर्क करके नियमों के मुताबिक कार्रवाई जरूरी है।

उड़न दस्तों के काम पर भी सवाल है। हर राजस्व मंडल में दस्तों की नियुक्ति पूरी हुई या नहीं, अब तक कितने जल स्रोतों की जांच हुई, कितनी शिकायतें मिलीं, कितने अनधिकृत पंप, मोटर और पाइपलाइन मिलीं, कितना सामान जब्त हुआ और कितने मामलों में आगे कानूनी कार्रवाई हुई, इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होने चाहिए ताकि नागरिक समझ सकें कि आदेशों पर अमल हो रहा है या नहीं। शिकायत दर्ज कराने की साफ व्यवस्था, कार्रवाई की समय सीमा और विभागों की जिम्मेदारी भी प्रशासन को बतानी चाहिए।

जल संरक्षण की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ आम नागरिकों पर डालकर काम नहीं चलेगा। घरेलू इस्तेमाल घटाने की अपील के साथ बड़े पानी उपभोक्ताओं के इस्तेमाल और उनकी परमिशन की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जल स्रोतों की मौजूदा हालत, उपलब्ध भंडार, संभावित मांग और आने वाले महीनों की जरूरत की जानकारी सार्वजनिक हो तो अफवाहों की जगह तथ्यों के आधार पर लोग हालात समझ पाएंगे। जल संकट के वक्त सिर्फ आदेश निकालना काफी नहीं होता, निष्पक्ष अमल, पारदर्शी कार्रवाई और आम लोगों तक पर्याप्त पीने का पानी पहुंचाना ही प्रशासन की असली कसौटी होगी।

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