नाइजीरिया के 600 सैनिक भारत में सीखेंगे जंगल और पहाड़ की लड़ाई, पहली टुकड़ी रवाना
नाइजीरियाई सेना ने जंगल और पहाड़ी युद्ध की खास ट्रेनिंग के लिए अपने 600 जवान भारत भेजने का फैसला किया है। 300 जवानों की पहली टुकड़ी अबुजा से रवाना हो चुकी है।
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अफ्रीकी देश नाइजीरिया ने अपने 600 सैनिकों को भारत भेजने का बड़ा फैसला लिया है। ये जवान यहां 'जंगल एंड माउंटेन वॉरफेयर' यानी जंगल और पहाड़ी इलाकों में लड़ने की खास ट्रेनिंग लेंगे। इस पहल से भारत और नायजीरिया के बीच दोतरफा और फौजी रिश्ते और मजबूत होंगे।
भारतीय सेना की पहचान सिर्फ एक बड़ी फौज के तौर पर नहीं है। उसे ऐसी सेना माना जाता है जो बेहद मुश्किल, दुर्गम और उलटे हालात में भी जीत हासिल करती है। नाइजीरिया इसी युद्ध कौशल और लंबे तजुर्बे का फायदा उठाना चाहता है।
नाइजीरिया में इस्लाम और ईसाई, दोनों बड़े धर्मों के लोग साथ रहते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से यह देश अंदरूनी सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रहा है। कई बागी गुट, डकैत और आतंकी संगठन हथियारों के साथ संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में देश की क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने और नागरिकों की हिफाजत के लिए नाइजीरियाई सेना अपने जवानों को भारत भेज रही है, ताकि वे दुनिया का बेहतरीन युद्धाभ्यास सीख सकें।
इस मुहिम के तहत 300 सैनिकों की पहली टुकड़ी गुरुवार, 22 अक्टूबर को नाइजीरिया की राजधानी अबुजा के न्नामदी अजिकीवे इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भारत के लिए रवाना हुई। इन जवानों को भारतीय वायुसेना के दो विशाल विमानों, सी-17 ग्लोबमास्टर (C-17 Globemaster) और एयरबस ए321 (Airbus A321) से लाया गया। पहले चरण के 300 जवान भारत पहुंच चुके हैं। बाकी 300 सैनिकों को भी जल्द खास विमान से लाने की तैयारी आखिरी दौर में है।
रवानगी के मौके पर नाइजीरिया में भारत के उच्चायुक्त मौजूद थे। नाइजीरियाई सेना के ट्रेनिंग सलाहकार समूह के समन्वयक जनरल यू. जी. यूसुफ भी वहां थे। उन्होंने नाइजीरिया के सेना प्रमुख (COAS) लेफ्टिनेंट जनरल वायदी शाइबू की ओर से पूरे कार्यक्रम का इंतजाम संभाला। जवानों को विदा करते वक्त दोनों देशों के अफसरों के बीच आपसी सहयोग और सुरक्षा पर अच्छी बातचीत हुई।
नाइजीरियाई सेना की आधिकारिक प्रवक्ता कर्नल अपोलोनिया अनेले ने ट्रेनिंग के बारे में बताया कि यह खास प्रशिक्षण सेना प्रमुख की दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता की निशानी है। उनके मुताबिक इसका मकसद यह है कि नाइजीरियाई फौज ज्यादा पेशेवर बने, हर हालात में खुद को ढाल सके और असली लड़ाई के लिए हमेशा तैयार रहे।
जंगल और पहाड़ में मैदानी लड़ाई से बिल्कुल अलग रणनीति बनानी पड़ती है। बेहद घनी झाड़ियां, तीखे चढ़ाव-उतार और बदलता मौसम जैसी मुश्किलों के बीच दुश्मन पर हमला कैसे करना है, यह भारतीय सेना के एक्सपर्ट इन जवानों को सिखाएंगे।
नाइजीरिया के कई बागी और आपराधिक गुट वहां के दुर्गम जंगलों को छिपने की सुरक्षित जगह (Safe Haven) की तरह इस्तेमाल करते हैं। भारतीय सेना की 'काउंटर-इन्सर्जेंसी' यानी बगावत के खिलाफ और 'काउंटर-टेररिज्म' की तकनीकें दुनिया में सबसे अच्छी मानी जाती हैं। इस ट्रेनिंग से नाइजीरियाई जवान जंगल में घुसकर दुश्मन को सही-सही ढूंढ सकेंगे और उसका सफाया कर सकेंगे।
शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कर्नल अपोलोनिया अनेले ने साफ किया कि इस पहल से भारत और नाइजीरिया के बीच दोतरफा रक्षा सहयोग और गहरा और व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा, देश की भौगोलिक अखंडता बनाए रखना और नागरिकों की जान-माल की हिफाजत नाइजीरियाई सेना की मुख्य जिम्मेदारी है, और यह ट्रेनिंग इस दिशा में एक बहुत अहम कदम होगी।
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