बारहवीं में रणजी का मौका मिला, फौज में जाने का सपना रह गया अधूरा: गौतम गंभीर
45वें जन्मदिन पर गंभीर के पहले प्यार की चर्चा: क्रिकेटर बनने से पहले उनका सपना भारतीय सेना में जाने का था।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर 14 अक्टूबर को अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। क्रिकेट की दुनिया में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है और वे भारतीय टीम के सबसे कामयाब बल्लेबाजों में गिने जाते रहे हैं। अब वे टीम इंडिया के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्रिकेटर बनने से पहले उनका पहला प्यार क्या था? जन्मदिन के मौके पर उनकी जिंदगी का यह किस्सा फिर चर्चा में है।
गंभीर ने एक इंटरव्यू में बताया कि बचपन से ही उनका सपना भारतीय सेना में जाने का था। वे अपने देश की सेवा करना चाहते थे और सेना की वर्दी पहनना उनका आखिरी लक्ष्य था। मगर किस्मत ने कुछ और ही तय कर रखा था। क्रिकेट धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बनता गया और इसी खेल ने उन्हें कामयाबी की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
गंभीर ने यह भी कहा कि सेना में न जा पाने का अफसोस उन्हें हमेशा रहेगा। उनके लिए भारतीय सेना सिर्फ करियर का एक विकल्प नहीं थी, बल्कि उनका पहला प्यार थी। क्रिकेट में सफलता मिलने के बाद भी सेना के लिए उनका लगाव जरा भी कम नहीं हुआ।
उनकी जिंदगी का एक बड़ा मोड़ बारहवीं के दौरान आया। उसी समय उन्हें रणजी ट्रॉफी में खेलने का मौका मिला। गंभीर के मुताबिक इस मौके ने उनके करियर की दिशा ही बदल दी। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर वे बारहवीं में रणजी ट्रॉफी नहीं खेले होते, तो उन्होंने पक्का राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में दाखिला लिया होता। लेकिन क्रिकेट खेलने के उस मौके ने उन्हें सेना में भर्ती होने के सपने से दूर कर दिया।
सेना में जाने का सपना पूरा न हुआ, फिर भी गंभीर ने क्रिकेट के मैदान पर देश का नाम रोशन किया। खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने कई यादगार पारियां खेलीं और भारत की बड़ी जीत में अहम भूमिका निभाई। 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में उनका प्रदर्शन क्रिकेट फैंस को आज भी याद है। दोनों खिताबी मुकाबलों में भारत की जीत में गंभीर का योगदान अहम रहा।
खिलाड़ी के तौर पर शानदार करियर के बाद गंभीर ने मेंटर और कोच के रूप में नई पारी शुरू की। आगे चलकर वे भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच बने। क्रिकेट के जरिए देश की नुमाइंदगी करके उन्होंने खुद को अलग साबित किया। उनकी कहानी बताती है कि एक फैसले ने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी।