रविवार, 1 नवंबर 2026

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नागपुर में विदर्भ 2030 कॉन्क्लेव: बेहतर प्रोजेक्ट लीडरशिप पर जोर, एक्सपर्ट्स ने रखे सुझाव

नागपुर में विदर्भ 2030 कॉन्क्लेव: बेहतर प्रोजेक्ट लीडरशिप पर जोर, एक्सपर्ट्स ने रखे सुझाव तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में हुए सम्मेलन में 150 से ज्यादा प्रोफेशनल्स, इंडस्ट्री लीडर्स और एजुकेशनिस्ट ने विदर्भ के डेवलपमेंट पर चर्चा की।

नागपुर में 'प्रोजेक्ट विदर्भ 2030-नागपुर प्रोजेक्ट लीडरशिप कॉन्क्लेव' नाम से एक सम्मेलन हुआ, जिसमें विदर्भ के डेवलपमेंट को लेकर लंबी चर्चा हुई। यह सम्मेलन आईटी पार्क में स्थित पर्सिस्टेंट सिस्टम्स कंपनी में आयोजित किया गया था।

इस सम्मेलन में 150 से ज्यादा प्रोजेक्ट प्रोफेशनल्स, इंडस्ट्री के बड़े लीडर्स, टेक्निकल एक्सपर्ट्स, एजुकेशनिस्ट और उद्यमी शामिल हुए। इन सबका कहना था कि विदर्भ को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर प्रोजेक्ट लीडरशिप, अच्छा गवर्नेंस, रिस्क मैनेजमेंट और तय समय पर काम पूरा करना बहुत जरूरी है। इसके अलावा AI, डिजिटल इंजीनियरिंग और स्किल डेवलपमेंट पर भी खास बातचीत हुई।

इंडस्ट्री, टेक्नोलॉजी, एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े एक्सपर्ट्स ने इस मौके पर विदर्भ में डेवलपमेंट की क्या-क्या संभावनाएं हैं और किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, इस पर भी अपनी राय रखी।

सम्मेलन का उद्घाटन चैप्टर की अध्यक्ष रिनू राजेश ने किया। 'परियोजना नेतृत्व का आंदोलन विकसित करना' विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नागपुर और विदर्भ के पास जो रणनीतिक फायदे हैं, उन्हें असली डेवलपमेंट में बदलने के लिए अनुशासित प्रोजेक्ट लीडरशिप और असरदार क्रियान्वयन होना बहुत जरूरी है।

चर्चा में मौजूद एक्सपर्ट्स ने कहा कि निवेश, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और विदर्भ की भौगोलिक स्थिति डेवलपमेंट के बड़े मौके पैदा करती है। लेकिन इन मौकों का पूरा फायदा तभी मिल पाएगा जब प्रोजेक्ट्स को बेहतर लीडरशिप, अच्छे गवर्नेंस, रिस्क मैनेजमेंट के साथ-साथ अलग-अलग हितधारकों के तालमेल से समय पर पूरा किया जाए।

इंडस्ट्री की तरफ से बदलते बिजनेस माहौल, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर की प्राथमिकताओं पर भी अपने विचार रखे गए। एक्सपर्ट्स ने इस बात पर जोर दिया कि बड़े प्रोजेक्ट्स सिर्फ ऐलान या निवेश तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें डिलीवर करना और उनसे असली नतीजे निकलना भी उतना ही जरूरी है।

टेक्निकल सेशंस में डिजिटल इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और AI से जुड़े प्रोजेक्ट मैनेजमेंट ऑफिस (PMO) के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। एजुकेशन और इंडस्ट्री, दोनों तरफ से इस बात पर सोच-विचार किया गया कि युवाओं को नौकरी के लायक कैसे बनाया जाए और उन्हें सिर्फ डिग्री हासिल करने से आगे बढ़ाकर असरदार प्रोजेक्ट डिलीवरी के लिए कैसे तैयार किया जाए।

एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा कि आगे चलकर किसी भी प्रोजेक्ट की कामयाबी सिर्फ समय और बजट के हिसाब से तय नहीं होगी। बिजनेस वैल्यू, इनोवेशन, स्थिरता और लंबे समय तक चलने वाले नतीजे भी प्रोजेक्ट की कामयाबी के अहम पैमाने माने जाएंगे।

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