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00:07 IST

पढ़ाई में AI का ज्यादा इस्तेमाल भारी पड़ रहा, OECD की रिपोर्ट में खुलासा

OECD की रिपोर्ट में सामने आया कि AI का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले स्टूडेंट्स के टेस्ट स्कोर कम आ रहे हैं।

पढ़ाई में AI का ज्यादा इस्तेमाल भारी पड़ रहा, OECD की रिपोर्ट में खुलासा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

आजकल पढ़ाई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। होमवर्क हो, असाइनमेंट हो या फिर रिसर्च से जुड़े सवाल, स्टूडेंट्स अब हर छोटी-बड़ी बात के लिए AI चैटबॉट्स की मदद लेने लगे हैं। लेकिन OECD की एक नई रिपोर्ट ने इस पर एक ऐसी बात सामने रखी है, जो स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स सबके लिए चिंता की बात हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक जो स्टूडेंट्स पढ़ाई के काम में AI का इस्तेमाल करते हैं, उनके टेस्ट स्कोर उन स्टूडेंट्स से कम पाए गए, जो AI का इस्तेमाल नहीं करते।

इस रिपोर्ट में 15 साल की उम्र के स्टूडेंट्स की परफॉर्मेंस को स्टडी किया गया। इसमें देखा गया कि जो स्टूडेंट्स लिखित असाइनमेंट बनाने के लिए AI का इस्तेमाल कभी नहीं करते या बहुत कम करते हैं, उन्होंने साइंस की परीक्षा में औसतन 509 नंबर हासिल किए। वहीं दूसरी तरफ जो स्टूडेंट्स लगभग रोज AI की मदद लेते हैं, उनका औसत स्कोर सिर्फ 481 रहा। यानी दोनों ग्रुप के बीच 28 नंबर का फर्क पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक सामाजिक और आर्थिक स्थिति जैसे फैक्टर्स को ध्यान में रखने के बाद भी यह फर्क बना रहा। OECD ने इस फर्क को करीब डेढ़ साल की पढ़ाई के बराबर बताया है। मतलब यह कि AI की मदद से काम जल्दी पूरा कर लेने वाले स्टूडेंट्स की परफॉर्मेंस बेहतर हो, यह जरूरी नहीं।

AI का इस्तेमाल सिर्फ असाइनमेंट लिखने तक सीमित नहीं है। स्टूडेंट्स नए टॉपिक्स की बेसिक जानकारी जुटाने और किताब या पढ़ाई के मैटर को छोटा करके समझने के लिए भी AI की मदद लेते हैं। इन मामलों में भी जो स्टूडेंट्स AI का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनकी परफॉर्मेंस तुलना में कमजोर पाई गई।

OECD के एजुकेशन और स्किल्स डायरेक्टर एंड्रियास श्लाइशर ने AI के इस्तेमाल को लेकर एक अहम बात कही है। उनके मुताबिक पढ़ाई तभी असरदार होती है, जब स्टूडेंट खुद किसी विषय को समझने, उस पर सोचने और सवाल को हल करने की कोशिश करता है। अगर AI स्टूडेंट की जगह सारा काम करने लगे, तो सीखने का यह पूरा प्रोसेस कमजोर पड़ सकता है।

हालांकि रिपोर्ट में AI को पूरी तरह गलत नहीं ठहराया गया है। बल्कि स्टूडेंट्स को इसे सही तरीके से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। किसी मुश्किल टॉपिक को समझने, उदाहरण लेने या अपनी तैयारी को और बेहतर बनाने के लिए AI का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन अगर स्टूडेंट हर सवाल, असाइनमेंट और रिसर्च के लिए AI पर ही डिपेंड रहने लगे, तो उसकी खुद सोचने और सीखने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

यह रिपोर्ट OECD के PISA स्टडी पर बेस्ड है। PISA में 15 साल की उम्र के स्टूडेंट्स की मैथ्स, साइंस और रीडिंग की काबिलियत को जांचा जाता है। इस बार की स्टडी में 91 देशों के 7.6 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स को शामिल किया गया था। यही वजह है कि रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े एजुकेशन की दुनिया में काफी अहम माने जा रहे हैं। रिपोर्ट का मैसेज साफ है कि AI का इस्तेमाल करें, लेकिन अपनी सोच और मेहनत की जगह AI को न लेने दें।

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