नागपुर की फर्म से 15 करोड़ की कथित ठगी, ED ने तीन राज्यों के 13 ठिकानों पर मारे छापे
फर्जी सरकारी टेंडर के नाम पर नागपुर की एक कारोबारी फर्म से 15 करोड़ रुपये ठगे जाने की शिकायत पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में एक साथ तलाशी ली।
नागपुर की एक कारोबारी फर्म की शिकायत के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तीन राज्यों में बड़ी कार्रवाई की है। फर्म का आरोप है कि त्रिपुरा में फर्जी सरकारी टेंडर के नाम पर उससे 15 करोड़ रुपये की ठगी की गई। जांच के दायरे में एक सस्पेंड IAS अधिकारी, फर्जी सरकारी पहचान, जाली टेंडर दस्तावेज और कथित शेल कंपनियों का जाल आ गया है।
ED ने 4 नवंबर को त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में कुल 13 जगहों पर एक साथ तलाशी ली। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा है। छापे उस अफसर से जुड़े रिहायशी ठिकानों, संदिग्ध हवाला ऑपरेटरों और उन कंपनियों के दफ्तरों पर पड़े, जिन पर अपराध की कमाई को इधर-उधर करने और छिपाने में शामिल होने का आरोप है।
मामले की शुरुआत नागपुर की फर्म की त्रिपुरा पुलिस में दी गई शिकायत से हुई। फर्म का कहना है कि सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच उससे 15 करोड़ रुपये ठग लिए गए। यह रकम कथित तौर पर मिड-डे मील योजनाओं और बिजली क्षेत्र के प्रोजेक्ट के नाम पर निकले सरकारी टेंडरों के बदले अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) के रूप में ली गई। बाद में जांचकर्ताओं ने पाया कि ये टेंडर त्रिपुरा सरकार ने जारी ही नहीं किए थे। इससे दस्तावेजों की सच्चाई और सरकार की तरफ से बात करने वालों की पहचान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
बताया गया है कि पुलिस शिकायत में त्रिपुरा कैडर के एक IAS अफसर और उसके कथित साथियों के नाम थे। शिकायत के बाद ED के अगरतला सब-ज़ोनल ऑफिस ने ECIR दर्ज की और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्यवाही शुरू की। ED की जांच के मुताबिक सस्पेंड IAS अफसर ने खुद को टेंडर प्रक्रिया पर अधिकार रखने वाला अफसर बताया और इस कथित सरकारी हैसियत के सहारे बोली लगाने वालों का भरोसा जीता।
आरोप है कि इसी अफसर ने शिकायतकर्ता की मुलाकात उत्पल कुमार चौधरी से कराई, जिसे टेंडर से जुड़े भुगतान संभालने वाले अधिकारी के तौर पर पेश किया गया। जांचकर्ताओं को शक है कि पूरा इंतजाम इस तरह रचा गया कि फर्म को लगे कि सरकारी खरीद की असली प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए सरकारी जैसे पद नाम, जाली टेंडर नोटिस और फर्जी वर्क ऑर्डर कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए।
एक अहम बात 'डायरेक्टरेट ऑफ हायर एजुकेशन' नाम की संस्था को लेकर सामने आई है, जिसके नाम से शिकायतकर्ता ने डिमांड ड्राफ्ट बनवाए थे। ED को कथित तौर पर पता चला कि यह कोई असली सरकारी विभाग नहीं, बल्कि चौधरी की निजी प्रोपराइटरशिप है। आरोप है कि इसका नाम असली सरकारी विभाग से भ्रामक ढंग से मिलता-जुलता रखा गया, ताकि लगे कि पैसा किसी सरकारी खाते में जा रहा है। जांचकर्ताओं को शक है कि नाम की यही समानता कथित धोखे की धुरी थी।
जांच में कृष्णा चक्रवर्ती का एक जॉइंट वेंचर भी आया है, जिसका प्रतिनिधित्व उनके पति सुदीप पॉल करते हैं। रकम जुटाने में इसकी कथित भूमिका की पड़ताल हो रही है। ED के मुताबिक शिकायतकर्ता को अहम मौकों पर कुछ पैसे लौटाए भी गए। आरोप है कि इन आंशिक रिफंड से भरोसा पक्का किया गया, ताकि वह और रकम जमा करता रहे।
एजेंसी को शक है कि जमा हुई रकम कई शेल कंपनियों के रास्ते घुमाई गई, ताकि उसका स्रोत और मालिकाना हक छिप जाए। इनमें से कुछ कंपनियां कथित तौर पर घरेलू नौकरों और साथियों के नाम पर रजिस्टर थीं, यानी असली फायदा उठाने वालों को छिपाने के लिए नाम भर के मालिक रखे गए।
ED के अनुसार ठगी की कमाई कथित तौर पर अचल संपत्ति खरीदने में भी लगी। इनमें मुंबई के शिवाजी पार्क इलाके के फ्लैट और एक रिहायशी संपत्ति शामिल बताई गई है, जो IAS अफसर के परिजनों के नाम पर खरीदी गई। आरोप है कि ऐसा पैसे का स्रोत और मालिकाना हक छिपाने के लिए किया गया। एजेंसी विदेश यात्राओं और महंगी खरीदारी के संदिग्ध खर्च की भी जांच कर रही है।
4 नवंबर की तलाशी में ED ने कथित हवाला लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और कंपनियों पर संदिग्ध नियंत्रण दिखाने वाली सामग्री जब्त की। उम्मीद है कि इससे पैसे के बहाव और असली लाभार्थियों के बारे में और सुराग मिलेंगे।
ED ने यह भी संकेत दिया है कि चौधरी और कुछ और लोग पहले से एक अलग मामले में जांच के घेरे में हैं, जिसमें पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में पांच FIR दर्ज हैं। उस मामले में कथित रैकेट पर इसी तरह के सरकारी टेंडरों के नाम पर कई पीड़ितों से 44 करोड़ रुपये से ज्यादा ठगने का आरोप है। ED अब जब्त दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है, ताकि अपराध की कथित कमाई का पता लगाया जा सके, अंतिम लाभार्थियों की पहचान हो और संदिग्धों की भूमिका तय हो। जांच जारी है।
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