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नागपुर के बिल्डर शशांक पांडे के ठिकानों पर ED की छापेमारी, 1.95 करोड़ रुपये कैश जब्त

नागपुर के बिल्डर शशांक पांडे के ठिकानों पर ED की छापेमारी, 1.95 करोड़ रुपये कैश जब्त तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

प्रवर्तन निदेशालय ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नागपुर जिले के दो ठिकानों पर तलाशी ली।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की नागपुर यूनिट ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नागपुर जिले के दो ठिकानों पर तलाशी ली है। ये ठिकाने बिल्डर शशांक गोविंदप्रसाद पांडे से जुड़े हैं, जो प्रयाग डेवलपर्स एंड बिल्डर्स (Prayag Developers & Builders) के प्रोप्राइटर हैं।

यह कार्रवाई 26 अक्टूबर को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत की गई। तलाशी में 1.95 करोड़ रुपये का बिना हिसाब वाला कैश, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त हुए। ED ने 40 लाख रुपये से ज्यादा की बैंक रकम भी फ्रीज कर दी। इसके अलावा कई ऐसी अचल संपत्तियां चिन्हित की गई हैं, जिनके बारे में शक है कि वे अपराध की कमाई से खरीदी गईं।

ED की जांच के मुताबिक पहला मामला एक बुजुर्ग विधवा का है। आरोप है कि पांडे ने उनकी जमीन के डेवलपमेंट राइट्स के बदले 1.75 करोड़ रुपये और 14 रिहायशी फ्लैट देने का डेवलपमेंट एग्रीमेंट किया था।

जांच में आरोप है कि संबंधित डिक्लेरेशन डीड को महिला की जानकारी और मंजूरी के बिना रद्द कर दिया गया। इसके बाद उनके हिस्से के फ्लैट तीसरे पक्ष को बेच दिए गए। आरोप है कि बिक्री से मिले 8.93 करोड़ रुपये का गबन किया गया, जबकि 45 लाख रुपये और बाकी रह गए। इस तरह कथित तौर पर कुल 9.4 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

दूसरा मामला दिव्य प्रयाग अपार्टमेंट (Divya Prayag Apartment) का है। ED ने पाया कि इसके 22 फ्लैट दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DHFL) के पास 22 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट लोन के बदले गिरवी रखे गए थे। इसमें से 11 करोड़ रुपये दिए गए थे।

आरोप है कि पांडे ने कर्ज देने वाली कंपनी से NOC लिए बिना और खरीदारों को गिरवी की बात बताए बिना ये फ्लैट बेच दिए। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने गिरवी की बात छिपाकर एक बैंक में झूठा एफिडेविट दिया।

बताया गया है कि बकाया रकम 12.84 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जिसके बाद SARFAESI Act के तहत कार्यवाही शुरू की गई।

ED की जांच नागपुर के अजनी और राणा प्रतापनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से शुरू हुई। ये FIR भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 418 और 420 के तहत दर्ज हैं।

मामले की जांच अभी जारी है। सारे आरोप कानूनी कार्यवाही के नतीजे पर निर्भर हैं।

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