चंद्रपुर नगर निगम के ठेका कर्मचारियों को दिवाली पर भी तनख्वाह नहीं, शुक्रवार से बेमियादी काम बंद
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चंद्रपुर महानगरपालिका के यांत्रिकी विभाग में 11 साल से काम कर रहे ठेका कर्मचारियों को पिछले महीने की तनख्वाह नहीं मिली है, इसलिए उन्होंने शुक्रवार से कामबंद आंदोलन का फैसला किया है।
चंद्रपुर महानगरपालिका के यांत्रिकी विभाग में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को दिवाली के त्योहार में भी तनख्वाह नहीं मिली है। पिछले महीने की तनख्वाह अब तक नहीं आई है और इससे कर्मचारियों में भारी गुस्सा है। बार-बार मांग करने के बाद भी पैसे नहीं मिले, इसलिए उन्होंने शुक्रवार से बेमियादी कामबंद आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है।
महानगरपालिका के रोजमर्रा के कामकाज में इस विभाग के ठेका कर्मचारियों की अहम भूमिका है। पिछले 11 साल से ये कर्मचारी नियमित तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं और शहर में यांत्रिकी से जुड़े अलग-अलग काम चालू रखने में योगदान दे रहे हैं।
ये कर्मचारी मे. लिमरा सर्विसेस, दारव्हा नाम के ठेकेदार के जरिए काम करते हैं। इसी ठेकेदार की तरफ से पिछले महीने की तनख्वाह अब तक नहीं दी गई है। नतीजा यह है कि घर का खर्च, मकान का किराया, बच्चों की पढ़ाई का खर्च, दवा-इलाज और रोज की दूसरी जरूरतें पूरी करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। मेहनत का पैसा वक्त पर न मिलने से उन पर आर्थिक संकट आ गया है।
दिवाली जैसा बड़ा त्योहार होने पर भी हाथ में तनख्वाह न होने से परिवार के साथ त्योहार की खुशी मनाना उनके लिए कठिन हो गया है। कर्मचारियों ने गुरुवार तक बकाया तनख्वाह देने की मांग की थी। साथ ही यह मांग भी की गई थी कि संबंधित ठेकेदार को तनख्वाह देने के बारे में तुरंत निर्देश दिए जाएं। लेकिन तय मियाद में पैसा जमा नहीं हुआ, इसलिए कर्मचारियों का सब्र टूट गया और शुक्रवार से कामबंद आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया गया।
11 साल सेवा देने के बाद भी अगर तनख्वाह के लिए बार-बार पीछे पड़ना पड़े, तो परिवार का पेट कैसे पालें, यह सवाल अब कर्मचारियों के सामने खड़ा है। महानगरपालिका के अलग-अलग कामों की अहम जिम्मेदारी संभालने वालों को अपने हक की तनख्वाह के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है, इस पर नाराजगी जताई जा रही है।
मांग उठ रही है कि महानगरपालिका प्रशासन दखल दे और बकाया तनख्वाह तुरंत दिलाने के लिए संबंधित ठेकेदार को जरूरी निर्देश दे। आंदोलन की वजह से यांत्रिकी विभाग का कामकाज बिगड़ने की आशंका है और सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन अब क्या रुख अपनाता है।
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