शनिवार, 7 नवंबर 2026

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नागपुर में पटाखों से पहले ही बिगड़ी हवा, गुरुवार को AQI 207 तक पहुंचा

नागपुर में पटाखों से पहले ही बिगड़ी हवा, गुरुवार को AQI 207 तक पहुंचा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

दिवाली की आतिशबाजी शुरू होने से पहले ही महल, अंबाझरी, जीपीओ और रामनगर जैसे इलाकों में AQI 200 के पार चला गया है।

नागपुर में दिवाली का त्योहार आने से पहले ही हवा खराब होने लगी है। पटाखे अभी फूटने शुरू भी नहीं हुए, और शहर के कुछ बड़े इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 200 के पार निकल गया है। महल, अंबाझरी, जीपीओ और रामनगर जैसे इलाकों में हवा की क्वालिटी बिगड़ने से लोग परेशान हैं। डर यह है कि त्योहार में बड़े पैमाने पर पटाखे फूटे तो प्रदूषण और बढ़ सकता है।

बुधवार तक शहर की हवा ठीक-ठाक थी और AQI 100 के अंदर दर्ज हो रहा था। गुरुवार को अचानक प्रदूषण बढ़ा और AQI 207 पर पहुंच गया। शुक्रवार को भी हालत में खास सुधार नहीं हुआ और AQI 198 दर्ज किया गया। यानी कुछ ही दिनों में हवा की क्वालिटी काफी गिर गई है, जबकि दिवाली की आतिशबाजी का असर अभी दिखा ही नहीं है।

CPCB यानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तय मानकों में AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है। 0 से 50 अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से 500 गंभीर माना जाता है। इस हिसाब से गुरुवार का 207 खराब श्रेणी में आता है। शुक्रवार का 198 मध्यम श्रेणी में रहा, मगर खराब श्रेणी की सीमा से बस थोड़ा ही नीचे है। इस स्तर का प्रदूषण लगातार बने रहना चिंता की बात है।

नागपुर को हरियाली वाला और खुला शहर माना जाता है। फिर भी वाहनों की बढ़ती संख्या, निर्माण कार्यों की धूल, सड़कों पर जमा मिट्टी और खुले में कचरा जलाने से हवा बिगड़ रही है। कई जगह निर्माण के दौरान धूल रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाते। अब पटाखों का धुआं इस समस्या को और गंभीर कर सकता है। दिवाली में शहर के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर पटाखे फोड़े जाते हैं, जिनसे धुआं, जहरीली गैसें और बेहद बारीक कण हवा में फैलते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर हवा की रफ्तार कम रही और प्रदूषकों को फैलने की जगह नहीं मिली, तो धुआं और बारीक कण देर तक हवा में टिके रह सकते हैं। घनी आबादी और ज्यादा ट्रैफिक वाले इलाकों में इसका असर ज्यादा महसूस होने की आशंका है।

हवा में मौजूद PM 10 और PM 2.5 कण सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह माने जाते हैं। PM 10 के कण अपेक्षाकृत बड़े होते हैं, जबकि PM 2.5 के कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के जरिए फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं। इनके लगातार संपर्क में रहने से खांसी, सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश और आंखों में जलन हो सकती है। अस्थमा या सांस की दूसरी बीमारी वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है और दिल के मरीजों के लिए भी प्रदूषित हवा नुकसानदेह हो सकती है। बच्चों और बुजुर्गों को खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं और बुजुर्गों की पहले से मौजूद बीमारियां प्रदूषण का असर बढ़ा सकती हैं।

बचाव के लिए कुछ बातें बताई गई हैं। प्रदूषण ज्यादा हो तो बेवजह बाहर न निकलें। बच्चों और बुजुर्गों को धुएं और धूल से दूर रखें। अस्थमा और सांस के मरीज दवाइयां नियमित लें और डॉक्टर की सलाह मानें। बाहर कसरत या मॉर्निंग वॉक से पहले AQI देख लें। पटाखे फूटने वाली जगहों और धुएं से भरे इलाकों से दूर रहें। जरूरत हो तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क लगाएं। सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न या लगातार खांसी हो तो डॉक्टर को दिखाएं।

पर्यावरण कार्यकर्ता अमित देशमुख का कहना है कि वाहनों का धुआं, धूल और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां शहर की हवा को प्रभावित कर रही हैं। उनके मुताबिक इससे निपटने के लिए लोगों में पर्यावरण को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने, खुले में कचरा न जलाने और निजी वाहनों का गैरजरूरी इस्तेमाल घटाने पर जोर दिया। अमित देशमुख ने कहा कि पर्यावरण बचाना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, इसमें हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है, और नागपुर की हवा साफ रखने में छोटी-छोटी कोशिशें भी काम आ सकती हैं।

उपराजधानी के लोग पटाखे सीमित रखें, ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचें और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से त्योहार मनाएं, तो प्रदूषण का खतरा काफी हद तक घट सकता है।

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