मुंबई की विशेष अदालत ने मानी ED की क्लोजर रिपोर्ट, मंत्री हसन मुश्रीफ को राहत
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संताजी घोरपडे चीनी मिल से जुड़े मामले में हसन मुश्रीफ और उनके बच्चों के खिलाफ चल रही ED की जांच बंद हो गई। मूल केस हाईकोर्ट में रद्द हो चुके थे।
राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के मंत्री हसन मुश्रीफ के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। सरसेनापति संताजी घोरपडे चीनी कारखाने से जुड़े कथित आर्थिक गड़बड़ी के मामले में उनके और उनके बच्चों के खिलाफ चल रही ED की जांच अब आधिकारिक तौर पर बंद हो गई है। मुंबई की विशेष PMLA अदालत ने ED की क्लोजर रिपोर्ट मंजूर कर ली। इसके साथ ही 2022 से चल रहे इस मामले पर पूर्णविराम लग गया।
यह फैसला विशेष PMLA जज एस. व्ही. सहारे ने सुनाया। अदालत ने साफ किया कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत कार्रवाई करने के लिए मूल अपराध का होना जरूरी है। इस केस में मूल शिकायतें और एफआईआर मुंबई हाईकोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। इसलिए PMLA के तहत आगे कार्रवाई जारी नहीं रखी जा सकती। अदालत ने 4 अप्रैल 2022 को दर्ज किया गया ECIR भी रद्द कर दिया और केस के कागजात ED को लौटाने का निर्देश दिया।
अब सवाल यह है कि मामला आखिर था क्या। ED ने सरसेनापति संताजी घोरपडे चीनी कारखाने के आर्थिक लेन-देन को लेकर हसन मुश्रीफ और उनके बच्चों से पूछताछ शुरू की थी। जांच एजेंसी का आरोप था कि वित्त वर्ष 2013-14 में कोलकाता की कथित शेल कंपनियों के जरिए 11.35 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम हासिल की गई। जांच के दौरान जुलाई 2024 में ED ने 2.07 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट और 7.70 लाख रुपये नकद जब्त किए थे।
मामले में मोड़ मुंबई हाईकोर्ट के फैसलों से आया। हसन मुश्रीफ ने ED की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जून 2025 में अदालत ने मुरगूड पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर रद्द कर दी। उसके बाद कंपनी कानून के प्रावधानों के आधार पर दाखिल की गई शिकायत भी 6 नवंबर 2025 को रद्द कर दी गई।
दोनों मूल मामले रद्द होने के बाद ED ने खुद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। अब विशेष अदालत ने भी उसे स्वीकार कर लिया है। इस फैसले से हसन मुश्रीफ और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है।
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