कन्यादान योजना घोटाला: ईडी ने शोभित त्रिपाठी की 5.37 करोड़ की संपत्ति जब्त की, चार्जशीट दाखिल
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ईडी ने मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह सहायता योजना के घोटाले में मुख्य आरोपी शोभित त्रिपाठी की संपत्ति तात्कालिक तौर पर जब्त की है।
मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह सहायता योजना के कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य आरोपी शोभित त्रिपाठी की 5.37 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति जब्त की गई है। त्रिपाठी विदिशा जिले की सिरोज जनपद पंचायत के पूर्व सीईओ हैं और मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के साले हैं।
ईडी के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत यह संपत्ति अस्थायी तौर पर जब्त की है। संपत्ति शोभित त्रिपाठी और उनके कथित साथी हेमंत साहू के नाम पर दर्ज है। ईडी ने 31 अक्टूबर को भोपाल की विशेष पीएमएलए अदालत में त्रिपाठी और दो अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की।
ईडी की जांच के मुताबिक, सिरोज जनपद पंचायत के सीईओ रहते हुए 2019 से नवंबर 2021 के बीच शोभित त्रिपाठी ने दूसरे साथियों के साथ मिलकर कागजों पर 5,923 फर्जी और संदिग्ध शादियां दिखाईं। आरोप है कि इसी के जरिए सरकारी खजाने से 30.8 करोड़ रुपये मंजूर करवाए गए और उनका गबन किया गया।
जांच में सामने आया है कि यह सब उस दौर में चलता रहा, जब कोरोना की वजह से देश में लॉकडाउन था और सार्वजनिक शादियों और सामूहिक आयोजनों पर पूरी तरह रोक थी। आरोप है कि जो लोग योजना के पात्र नहीं थे, उन्हें खबर दिए बिना ही फर्जी पहचान पत्रों के सहारे उनके नाम से चुपचाप बैंक खाते खोले गए। इन खातों में हर लड़की के हिसाब से 51,000 रुपये की सरकारी मदद आते ही आरोपियों ने पैसे का सुराग न मिले, इसलिए कई किस्तों में नकद निकालकर आपस में बांट लिए।
ईडी के मुताबिक शोभित त्रिपाठी और कई दूसरे लोग एक संगठित नेटवर्क के तौर पर काम कर रहे थे, जिसमें खास तौर पर हेमंत साहू और योगेंद्र शर्मा जैसे साथी शामिल थे। सह-आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने अपात्र और काल्पनिक लाभार्थियों के नाम से फर्जी आवेदन और झूठे कागजात बनाए। इन कागजों की जानकारी एक सरकारी पोर्टल पर चढ़ा दी गई, ताकि शादियां कागज पर वैध दिखें।
इन्हीं साथियों की मदद से गरीब या अनजान लोगों के नाम पर चोरी-छिपे बैंक खाते खोले गए, या उनके पुराने खातों का गलत इस्तेमाल किया गया, और उन्हें इसकी भनक तक नहीं थी। योजना का पैसा इन खातों में आते ही सह-आरोपियों ने एटीएम और दूसरे तरीकों से किस्तों में फौरन नकद निकाल लिया। जांच में यह भी पता चला कि काला धन छिपाने के लिए आरोपियों ने रकम अपने रिश्तेदारों के खातों में भेजी और उससे शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और बेनामी संपत्ति में पैसा लगाया।
ईडी ने 2 सितंबर 2026 को शोभित त्रिपाठी को गिरफ्तार किया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले मध्य प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया था, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
ईडी ने अदालत को बताया है कि 5,923 संदिग्ध शादियों, 20 से ज्यादा बैंकों और 93 ग्राम पंचायतों वाले इस बड़े नेटवर्क में पैसों का सुराग लगाने और बाकी संभावित शामिल लोगों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।
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