नागपुर की ऐतिहासिक पुरानी हाईकोर्ट इमारत का पिछला हिस्सा ढहा, ASI की चेतावनी के बावजूद हादसा
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सिविल लाइन्स में सोमवार दोपहर इमारत का एक हिस्सा गिरा। मजदूर खाना खाने गए थे, इसलिए बड़ा हादसा टल गया।
नागपुर के सिविल लाइन्स में स्थित ऐतिहासिक पुरानी हाईकोर्ट इमारत का एक हिस्सा सोमवार दोपहर ढह गया। इमारत के पिछले हिस्से के गिरने से इस धरोहर के संरक्षण में बरती जा रही लापरवाही सामने आ गई है। निरीक्षण और मरम्मत के इंतजाम कितने असरदार हैं, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बड़ा हादसा होते-होते बचा। जब पुरानी इमारत का पिछला हिस्सा गिरा, तब वहां काम करने वाले मजदूर लंच के लिए दूसरी जगह गए हुए थे, इसलिए सब सुरक्षित रहे। अगर चार-पांच मजदूर वहां होते, तो वे मलबे में फंस या दब सकते थे।
इमारत की बिगड़ती हालत का मामला पहले से बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में है। अदालत ने खुद संज्ञान लेकर जनहित याचिका (PIL) शुरू की है। अगली सुनवाई दिवाली के बाद तय है।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि अक्टूबर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने परिसर का कई बार निरीक्षण किया था। 23 अक्टूबर को ASI ने नागपुर के PWD मुख्य अभियंता को चिट्ठी लिखी। उसमें साफ कहा गया था कि संरक्षण का काम मंजूर अनुमानों और राष्ट्रीय संरक्षण नीति 2014 के हिसाब से नहीं हो रहा। इसके बाद 27 अक्टूबर को ASI के एक अधिकारी फिर गए और PWD अधिकारियों से संरक्षण के काम पर बात की।
इन निरीक्षणों और लिखित चेतावनी के बाद भी सोमवार को इमारत का पिछला हिस्सा गिर गया। सवाल यह है कि ASI की बताई कमियों पर ठीक से ध्यान दिया गया या नहीं, सुधार समय पर हुआ या नहीं, और नाजुक हालत वाली इस इमारत की निगरानी उतनी गंभीरता से हुई या नहीं।
इमारत ASI ने 30 सितंबर 2026 को PWD को सौंपी थी। इसके बाद चल रहे संरक्षण कार्य की जिम्मेदारी राज्य की इस एजेंसी के पास आ गई। लेकिन 23 अक्टूबर की ASI की चिट्ठी बताती है कि हैंडओवर के कुछ ही हफ्तों में काम के तरीके पर आपत्तियां उठने लगी थीं। इसलिए ASI और PWD के आपसी तालमेल पर भी नजर जा रही है।
अब निगरानी की व्यवस्था, संरक्षण के तय मानकों के पालन और धरोहर एजेंसी की तकनीकी आपत्तियों पर दिए गए जवाब पर सवाल हैं। अहम मुद्दा यह भी है कि मजदूरों को साइट पर काम करने देने से पहले ढांचे के खतरे को ठीक से परखा गया था या नहीं और जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए गए थे या नहीं।
हाईकोर्ट में इस मामले में एडवोकेट आशुतोष धर्माधिकारी अदालत की मदद के लिए एमिकस क्यूरी हैं। सरकार की तरफ से एडवोकेट दीपक ठाकरे पैरवी कर रहे हैं। मामला अदालत में लंबित रहते हुए यह हादसा हुआ है, इसलिए अगली सुनवाई में संरक्षण कार्य की असली प्रगति, ASI की आपत्तियां और PWD का जवाब ज्यादा गंभीरता से देखे जाने की संभावना है।
PWD ने पहले हाईकोर्ट को बताया था कि संरक्षण का काम पूरा होने के बाद ASI का सब-सर्कल दफ्तर और स्टोररूम इमारत के बचे हुए हिस्से में शिफ्ट किए जाएंगे। अब एक हिस्सा गिरने से बचे हुए हिस्सों की सुरक्षा और उनके इस्तेमाल लायक होने पर नई चिंता खड़ी हो गई है। यह इंतजाम हो भी सकेगा या नहीं, इस पर भी सवाल है।
फिलहाल सबसे जरूरी काम पूरी इमारत की मजबूती की जांच करना है। साथ ही यह देखना है कि इमारत क्यों गिरी और पहले की चेतावनियों पर ठीक से अमल हुआ या नहीं। अदालत की निगरानी में चल रही ऐतिहासिक इमारत का एक और हिस्सा खंडहर बनना सिर्फ निर्माण की चूक नहीं है। यह देर से दखल, नाकाफी संरक्षण और संस्थाओं के बीच तालमेल की संभावित नाकामी का गंभीर संकेत है।
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