बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

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नागपुर हाई कोर्ट परिसर में भरा पानी, मनपा और PWD को सीवर लाइन का संयुक्त निरीक्षण करने का आदेश

नागपुर हाई कोर्ट परिसर में भरा पानी, मनपा और PWD को सीवर लाइन का संयुक्त निरीक्षण करने का आदेश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

जनमंच की जनहित याचिका की सुनवाई में जज उर्मिला जोशी फालके और राज वाकोडे ने सीवर लाइन चोक होने की समस्या पर मनपा और लोक निर्माण विभाग को तुरंत संयुक्त निरीक्षण करने को कहा।

नागपुर हाई कोर्ट परिसर में बारिश का पानी भरने का मामला अदालत के सामने आया है। जनमंच ने नागपुर जिले में सीमेंट की सड़कों और बारिश के दौरान घरों में पानी जमा होने जैसी कई समस्याओं को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। सुनवाई के वक्त न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके और न्यायाधीश राज वाकोडे ने भारी बारिश के दौरान खुद हाई कोर्ट परिसर में हुए जलजमाव का मुद्दा उठाया।

इसी के साथ अदालत ने सीवर लाइन चोक होने की गंभीर समस्या पर मनपा और लोक निर्माण विभाग (PWD) को तत्काल संयुक्त निरीक्षण करने का आदेश दिया।

सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता पी. डब्ल्यू. मिर्जा ने बताया कि 12 अक्टूबर के अदालती आदेश के पालन में मनपा ने एक कार्यकारी अभियंता को नोडल अधिकारी बनाया था। इस नोडल अधिकारी के साथ 23 अक्टूबर को बैठक हुई, लेकिन उन्होंने अधीक्षक अभियंता और दूसरे संबंधित विभागों से संवाद करने में असमर्थता जताई।

इस पर अदालत ने साफ कहा कि सभी संबंधित विभागों को आपस में तालमेल और समन्वय बनाकर याचिका में उठाए गए मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को निर्देश दिया कि वे इस मामले को हलफनामे के जरिए रिकॉर्ड पर लाएं। इसके लिए 30 अक्टूबर तक का समय दिया गया है।

हलफनामे में कई बातें सामने आईं। अतिरिक्त सरकारी वकील उके ने अदालत का ध्यान 21 सितंबर के आदेश और हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार की रिपोर्ट की ओर खींचा। रिपोर्ट के मुताबिक भारी बारिश में हाई कोर्ट के उत्तर भवन में सरकारी वकील के दफ्तर और बीबी 1 चैंबर में पानी का रिसाव हुआ था।

इसके अलावा दक्षिण भवन में महिला शौचालय के रास्ते अंदर के गलियारे में पानी आया। मुख्य भवन में उप-रजिस्ट्रार के कक्ष की फर्श से भी पानी रिसा था।

हलफनामे में यह भी बताया गया कि गेट नंबर 6 और 7 के सामने महानगरपालिका की बनाई हुई पुरानी सीवर लाइन है। अगर यह लाइन चोक हो जाए तो हाई कोर्ट परिसर से निकलने वाला पानी वापस लौटकर हाई कोर्ट भवन के भूतल परिसर में भर जाता है। हलफनामे में मांग की गई है कि मनपा को खास तौर पर मानसून के दौरान इस सीवर लाइन के नियमित रखरखाव का निर्देश दिया जाए।

सुनवाई में अदालत को यह भी बताया गया कि अनुचित रखरखाव की वजह से क्षतिग्रस्त हुई पाइपलाइन की मरम्मत कर दी गई है। वन रक्षक आवासों (फॉरेस्ट गार्ड क्वार्टर्स) के लिए वित्त विभाग ने पूरे राज्य के लिए 128 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अगले 3 सप्ताह के भीतर इस राशि के आवंटन पर उचित फैसला लेंगे।

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