धनत्रयोदशी 2026: शाम 7:08 से 8:16 बजे तक पूजा का मुहूर्त, जानिए विधि और सामग्री
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दिवाली की शुरुआत धनत्रयोदशी से होती है। पूजा की सामग्री, विधि, यमदीपदान, पौराणिक कथा और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी।
दिवाली के पर्व की शुरुआत धनत्रयोदशी से होती है। हिंदू धर्म में इस दिन का खास महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान धन्वंतरी, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। सोना, चांदी, बर्तन और झाड़ू की खरीदारी को इस दिन शुभ माना जाता है। धार्मिक श्रद्धा के मुताबिक विधि से पूजा करने पर घर में सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत बनी रहती है।
पूजा की तैयारी पहले से कर लेना ज़रूरी है। सामग्री में कमल के 21 बीज और 5 तरह के मणि या रत्न, 5 सुपारी और लक्ष्मी-गणेश के सिक्के लगते हैं। इसके अलावा हल्दी, कुमकुम, चंदन और अक्षता, फूल, हार, तुलसी के पत्ते और पान के पत्ते भी रखे जाते हैं। अगरबत्ती, धूप, कपूर और दिये, नारियल, दही, शहद और मिठाई, गंगाजल, घी और काजल, साथ में चूड़ा या चूड़ियां और बाकी पूजा का सामान भी चाहिए। घर की परंपरा और उपलब्धता के हिसाब से इस सामग्री में बदलाव किया जा सकता है।
धनत्रयोदशी के दिन शाम को घर की सफाई करके पूजा की तैयारी करनी चाहिए। घर में किसी साफ जगह पर देवताओं की स्थापना की जाती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार कुबेर, भगवान धन्वंतरी और माता लक्ष्मी की पूजा होती है।
पूजा का क्रम इस तरह बताया गया है। पहले पूजा की जगह पर घी का दिया जलाएं। भगवान कुबेर को सफेद रंग की मिठाई और भगवान धन्वंतरी को पीले रंग की मिठाई चढ़ाएं। फूल, अक्षता, चंदन और धूप अर्पित करके पूजा करें। कुबेर की पूजा के दौरान "ॐ ह्रीं कुबेराय नमः" मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान धन्वंतरी के स्तोत्र का पाठ करें। आखिर में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करके मिठाई का नैवेद्य दिखाएं।
इस दिन यमराज के नाम का दिया जलाने की भी परंपरा है, जिसे यमदीपदान कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर रहता है। इसके लिए मिट्टी का चौमुखी दिया लें। पाटे पर या किसी साफ जगह पर स्वस्तिक बनाएं और दिये पर कुमकुम लगाएं। फिर उस पर अक्षता और फूल चढ़ाएं। दिये में थोड़ी चीनी और 1 रुपये का सिक्का रखने की परंपरा है। इसके बाद दिये को घर के मुख्य दरवाजे के पास रखें। पारंपरिक तरीके के मुताबिक दिये की लौ दक्षिण दिशा की ओर रखी जाती है।
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ पृथ्वी पर आए। उन्होंने लक्ष्मी को एक जगह रुकने को कहा, लेकिन लक्ष्मी ने उनकी बात नहीं मानी। रास्ते में उन्होंने खेत से सरसों के फूल लिए और गन्ना खाया। इस पर विष्णु ने उन्हें 12 साल तक एक किसान के घर रहने का शाप दिया।
कहा जाता है कि इस दौरान लक्ष्मी की कृपा से किसान के घर में धन-धान्य और समृद्धि आ गई। 12 साल बाद जब विष्णु लक्ष्मी को वापस ले जाने आए, तो किसान उन्हें जाने देना नहीं चाहता था। तब लक्ष्मी ने उससे कहा कि वह धनत्रयोदशी के दिन घर साफ करके दिये जलाए और पूजा करे। तभी से इस दिन लक्ष्मीपूजा की परंपरा शुरू हुई, ऐसी धार्मिक कथा सुनाई जाती है।
अब मुहूर्त की बात। दी गई पंचांग की जानकारी के मुताबिक धनत्रयोदशी की पूजा का मुहूर्त शाम 7:08 से 8:16 तक है। पूजा का कुल समय 1 घंटा 8 मिनट का रहेगा। यमदीपदान का समय शाम 6 से 7 बजे तक बताया गया है।
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