नागपुर जिले में भूजल स्तर गिरा, जिला परिषद ने ग्राम पंचायतों के लिए 11 सूत्री प्लान बनाया
नागपुर जिले के कई तालुकों में भूजल स्तर पांच साल की औसत से नीचे आया है। कामठी और पारशिवनी में सबसे ज्यादा गिरावट बताई गई है।
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राज्य के ज्यादातर जिलों में सूखे की मार दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। इसी बीच नागपुर जिला परिषद ने आने वाले दिनों में पानी की किल्लत से निपटने के लिए ग्राम पंचायतों के वास्ते 11 सूत्री एक्शन प्लान तैयार किया है। इस प्लान में पानी सप्लाई की सही प्लानिंग, मौजूदा जलस्रोतों की समीक्षा, पानी की लीकेज रोकने और लोगों में पानी बचाने को लेकर जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया है।
दूसरी तरफ नागपुर जिले में भूजल स्तर में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। कामठी और पारशिवनी में यह गिरावट सबसे ज्यादा देखी जा रही है।
जिले की सभी ग्राम पंचायतों से कहा गया है कि वे अपने इलाके में पानी सप्लाई की मौजूदा हालत की जानकारी जमा करें और गांव में जो जलस्रोत हैं, उनकी प्लानिंग करें। गांव के हिसाब से जलस्रोत, पानी सप्लाई की योजनाएं, पानी का स्टॉक, किल्लत की आशंका और संभावित दिक्कतों की समीक्षा करने को भी कहा गया है। हर ग्राम पंचायत को पानी सप्लाई का सही टाइमटेबल तय करना है और उसी के हिसाब से पानी देना है। सप्लाई की पाइपलाइन, सार्वजनिक नल, वाल्व और पानी की टंकियों में कहीं लीकेज हो तो उसे ढूंढकर फौरन ठीक करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे उपलब्ध पानी की बर्बादी रुकने में मदद मिलेगी।
पानी बचाने का महत्व लोगों तक पहुंचाने के लिए ग्राम सभा, महिला बचत समूह, स्कूल और गांव के लोगों को साथ लेकर जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया है। हर घर के नल में टोंटी लगाना जरूरी किया जाए और नियम तोड़ने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई हो, ऐसे निर्देश भी हैं। आरओ सिस्टम से निकलने वाले पानी को जहां मुमकिन हो, सही और सुरक्षित तरीके से दोबारा इस्तेमाल करने की प्लानिंग करनी है। जिन गांवों में पानी की किल्लत की आशंका है, वहां पहले से जरूरी इंतजाम करके किल्लत दूर करने का एक्शन प्लान बनाने पर जोर दिया गया है।
ग्राम पंचायतों को एसओपी के मुताबिक काम करने के निर्देश दिए गए हैं। पानी सप्लाई के उपायों की नियमित समीक्षा करके अनुपालन रिपोर्ट संबंधित दफ्तर में जमा करनी होगी। इसके लिए खंड विकास अधिकारी, सरपंच, ग्रामसेवक, पानी सप्लाई व स्वच्छता समिति, जलसुरक्षा रक्षक, पुलिस पाटील और ग्राम पंचायत स्तर के संबंधित सरकारी कर्मचारियों की बैठक लेकर तालमेल बिठाने को कहा गया है। इन सभी उपायों को शामिल करते हुए प्रमाणित कार्यप्रणाली यानी एसओपी बनाकर सभी ग्राम पंचायतों को जरूरी सूचनाएं देने के निर्देश भी हैं। किल्लत आने के बाद उपाय करने के बजाय संभावित संकट का पहले से अंदाजा लगाकर प्लानिंग करना और लोगों को नियमित पानी देना, इस प्लान का मुख्य मकसद है।
तालुका के हिसाब से भूजल स्तर के आंकड़ों में कई तालुकों में अच्छी-खासी गिरावट सामने आई है। सितंबर 2026 के भूजल स्तर की तुलना पिछले पांच साल की औसत से करने पर कामठी और पारशिवनी तालुका में सबसे ज्यादा कमी दर्ज हुई। इससे आगे पानी की किल्लत की आशंका को लेकर चिंता जताई जा रही है।
उपलब्ध तालिका के मुताबिक कामठी तालुका में भूजल स्तर 1.49 मीटर और पारशिवनी तालुका में 1.02 मीटर नीचे गया है। हिंगणा तालुका में 1.44 मीटर, नरखेड और सावनेर तालुका में हर एक में 1.16 मीटर और नागपुर तालुका में 1.52 मीटर की गिरावट दिखाई गई है। रामटेक, काटोल, कलमेश्वर, मौदा, उमरेड, कुही और भिवापुर तालुका में भी पिछले पांच साल की औसत के मुकाबले भूजल स्तर कम है, ऐसा सरकारी आंकड़ों से साफ होता है। भूजल स्तर में यह बदलाव खेती, पीने के पानी की उपलब्धता और कुओं के जलस्तर पर असर डाल सकता है।
बारिश की मात्रा, बारिश का भौगोलिक बंटवारा, भूजल रिचार्ज और पानी का बढ़ता दोहन भूजल स्तर पर असर डालने वाले अहम कारण हैं। इसलिए गिरावट रोकने के लिए बारिश का पानी जमीन में उतारना, जल संरक्षण के कामों को रफ्तार देना और भूजल का किफायत से इस्तेमाल करना जरूरी है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तालुका के हिसाब से हालात का आकलन करके संभावित पानी की किल्लत टालने के लिए नागपुर जिला परिषद ने पानी की किल्लत को लेकर मार्गदर्शक सूचनाएं जारी की हैं।