सिंदेवाही में स्वस्तिक पैटर्न पेड़ लगाने की स्कीम शुरू, 825 ग्राम पंचायतों तक ले जाने का प्लान
चंद्रपुर जिले में ग्रामसेवक ट्रेनिंग सेंटर से स्वस्तिक पैटर्न पौधरोपण का डेमो शुरू हुआ, आगे इसे जिले की 825 ग्राम पंचायतों तक बढ़ाने की तैयारी।
चंद्रपुर जिले के सिंदेवाही में ग्रामसेवक प्रशिक्षण केंद्र में 25 सितंबर को स्वस्तिक पैटर्न वृक्षारोपण का डेमो प्रोग्राम शुरू किया गया। यह विकसित भारत रोजगार और आजीविका हमी अभियान यानी वी-बी-जी राम-जी, ग्रामसेवक प्रशिक्षण केंद्र और अलग अलग स्कीमों को साथ मिलाकर चलाया जा रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत जिलाधिकारी वसुमना पंत और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंग ने पेड़ लगाकर की।
जिलाधिकारी वसुमना पंत ने बताया कि इस पैटर्न से कम जगह में ज्यादा पेड़ लगाए जा सकते हैं, पानी की बचत होगी और हरित क्षेत्र बढ़ेगा। इसके साथ केशर आम की फलबागों से आगे चलकर ग्राम पंचायतों को अपनी खुद की कमाई भी मिल सकेगी। पहले फेज में यह प्रयोग 100 ग्राम पंचायतों में किया जाएगा।
यह डेमो साइट खास तौर पर इसलिए चुनी गई क्योंकि सिंदेवाही के इस ट्रेनिंग सेंटर में चंद्रपुर, गडचिरोली, भंडारा और गोंदिया जिलों के ग्राम पंचायत अधिकारी, विस्तार अधिकारी और सरपंचों की रेगुलर ट्रेनिंग होती है। इससे चारों जिलों के ट्रेनी लोगों को स्वस्तिक पैटर्न पौधरोपण की जानकारी सीधे मिल पाएगी और यह तरीका ज्यादा लोगों तक पहुंचेगा।
जिलाधिकारी पंत के मुताबिक इस जिला स्तरीय डेमो के बाद अगले महीने खनिज क्षेत्र से प्रभावित 50 ग्राम पंचायतों में स्वस्तिक पैटर्न से पेड़ लगाने और बाकी 50 ग्राम पंचायतों में केशर आम की खेती प्रायोगिक तौर पर करने का प्लान है। इसका मकसद गांवों में रोजगार के मौके बनाने के साथ साथ पर्यावरण बचाना, हरित क्षेत्र बढ़ाना और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंग ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट के बाद जिले की 825 ग्राम पंचायतों में पेड़ लगाने का प्लान है। ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केशर वैरायटी के आम लगाए जा रहे हैं। फल आने के बाद उनकी बिक्री से ग्राम पंचायतों को अपनी कमाई होगी, जिसे गांव की सड़कों, स्ट्रीट लाइट, पानी सप्लाई, स्कूल और बाकी विकास कामों में लगाया जा सकेगा। इससे ग्राम पंचायतें आत्मनिर्भर बनेंगी।
ऑक्सिजन मैन के नाम से जाने जाने वाले ए.एस. नाथन ने इस मौके पर गाइडेंस दी। उन्होंने कहा कि स्वस्तिक पैटर्न वृक्षारोपण सिर्फ पौधे लगाने का प्रोग्राम नहीं है, बल्कि अलग अलग स्कीमों को जोड़ने, रोजगार बनाने, पर्यावरण बचाने और टिकाऊ विकास का मेल है। उन्होंने इसे पौधरोपण नहीं बल्कि 'वृक्षक्रांति' बताया।
प्रोग्राम के बाद जिलाधिकारी वसुमना पंत और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंग ने ग्रामसेवक प्रशिक्षण केंद्र का दौरा किया। इसके बाद उन्होंने अंतरगाव और गडमौशी के जिला परिषद प्राइमरी स्कूलों में जाकर वहां का इंतजाम भी देखा।
कार्यक्रम की शुरुआत ग्रामसेवक प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य और उप जिला कार्यक्रम समन्वयक गिरीश धायगुडे ने की। इस मौके पर उप जिलाधिकारी (रोहयो) शुभम दांडेकर, विभागीय वन अधिकारी बापू येडे, कृषि विज्ञान केंद्र सिंदेवाही की सीनियर साइंटिस्ट डॉ. सोनाली दुपटे, प्रभारी गटविकास अधिकारी विभावरी तितरे, लक्ष्मी कुमरे, कृषि अधिकारी महेश वट्टी, चंद्रकांत दलाल, बंडू गुंतीवार, थामदेव अगडे, प्यारेलाल देवगडे और ओम चनफने के साथ ट्रेनिंग सेंटर के कई स्टाफ मेंबर मौजूद रहे। आभार लक्ष्मीनारायण दोडके ने माना।