जलगांव जिला परिषद के 71 कर्मचारियों का दिव्यांगत्व बोगस निकला, जबरन रिटायरमेंट होगा
जांच रिपोर्ट में 71 कर्मचारियों का दिव्यांगत्व बोगस निकला। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इन्हें जबरन रिटायर किया जाएगा और 139 कर्मचारियों के लाभ बंद हो रहे हैं।
जलगांव जिला परिषद के दिव्यांग कर्मचारियों की जांच में बड़ा मामला सामने आया है। परिषद में कुल 689 दिव्यांग कर्मचारी हैं और उनकी पड़ताल के अहवाल सरकारी मेडिकल कॉलेज से थोड़े-थोड़े करके आ रहे हैं। अब तक 471 रिपोर्ट आ चुकी हैं और इनमें 71 कर्मचारियों का दिव्यांगत्व बोगस पाया गया है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक इन 71 कर्मचारियों को जबरन रिटायर किया जाएगा। यह कार्रवाई प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद होगी। इसके अलावा 139 कर्मचारी ऐसे हैं जिनका दिव्यांगत्व 11 से 39 प्रतिशत निकला है, इसलिए उनके सारे लाभ बंद किए जाएंगे। सबसे ज्यादा मामले शिक्षकों और ग्रामसेवकों के हैं। 40 शिक्षकों और 13 ग्रामसेवकों का दिव्यांगत्व बोगस साबित हुआ है।
यह दोबारा पड़ताल कोर्ट के आदेश से हो रही है। आदेश में कहा गया है कि जिन कर्मचारियों का दिव्यांगत्व 11 से 39 प्रतिशत के बीच निकले, यानी 40 प्रतिशत की न्यूनतम सीमा से कम, उनके दिव्यांगों वाले सारे सेवा लाभ तुरंत बंद कर दिए जाएं। इसी आदेश के तहत जिला परिषद ने 139 कर्मचारियों के लाभ हटाना शुरू कर दिया है।
शिक्षा विभाग में 426 कर्मचारियों में से अब तक 297 की दोबारा पड़ताल हो चुकी है। इनमें 40 कर्मचारियों का दिव्यांगत्व 10 प्रतिशत से कम निकला है। 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगत्व वाले 86 शिक्षकों के लाभ हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। ग्रामसेवकों में बोगस दिव्यांग सर्टिफिकेट लेने वाले 13 हैं, जबकि 29 ग्रामसेवकों के लाभ हटाए जाने हैं।
जिन कर्मचारियों ने पड़ताल करवाई ही नहीं, उनकी जानकारी मंगवाई गई है। इसके बाद उन्हें आखिरी नोटिस दिया जाएगा। सीईओ करिश्मा नायर ने साफ किया है कि जिसने पड़ताल नहीं करवाई, उसे 10 प्रतिशत से कम दिव्यांगत्व वाला मानकर नोटिस भेजा जाएगा।
दूसरी तरफ यह सवाल उठ रहा है कि 71 कर्मचारियों को जबरन रिटायर करने की बात तो हो रही है, पर 11 से 39 प्रतिशत वाले 139 कर्मचारी दिव्यांगत्व न होते हुए भी लाभ लेते रहे, तो सिर्फ लाभ बंद करने से क्या होगा। उनसे वसूली कब होगी। यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि जिन्होंने इन लाभों के जरिए तबादलों में अपनी सुविधा करवा ली, उन्हें सीईओ हटाएं।
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