चिमूर और सिंदेवाही में बाघ ने दो किसानों की जान ली, छह दिन में चार मौतें
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
ब्रह्मपुरी वन विभाग के चिमूर और सिंदेवाही वन परिक्षेत्र में बाघ के हमलों में दो और किसानों की मौत हो गई। वन विभाग के प्राथमिक अनुमान के मुताबिक पीछे एक ही बाघ हो सकता है, पर आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी वन विभाग में आने वाले चिमूर और सिंदेवाही वन परिक्षेत्र में बाघ के हमले थम नहीं रहे। खेत में काम करने गए दो किसानों को बाघ ने मार डाला। दोनों घटनाएं अलग-अलग जगह हुईं। गांवों में डर और दहशत का माहौल है। पिछले छह दिनों में इस इलाके में बाघ के हमले से चार लोगों की जान जा चुकी है।
पहली घटना चिमूर तहसील के उरकुडपार गांव की है। गांव के रहने वाले 55 साल के सदाशिव खडसंग अपने खेत से लगे जंगल में झाड़ियां काटने गए थे। उसी वक्त घात लगाकर बैठे बाघ ने अचानक उन पर हमला कर दिया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
खबर मिलते ही वन परिक्षेत्र अधिकारी किशोर देऊळकर, पुलिस निरीक्षक दिनेश लबडे और सहायक पुलिस निरीक्षक खोब्रागडे मौके पर पहुंचे। पंचनामा करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए उपजिला अस्पताल, चिमूर भेजा गया।
दूसरी घटना सिंदेवाही तहसील के नवरगांव क्षेत्र में आने वाले धूमनखेडा गांव में हुई। यहां के 58 साल के पत्रु रामजी मेश्राम खेत में काम करने गए थे। दोपहर करीब 4:30 बजे बाघ ने उन पर हमला किया और उनकी जान चली गई।
शाम तक जब वे घर नहीं लौटे तो परिवार और गांव वालों ने उन्हें ढूंढना शुरू किया। तलाश के दौरान ही हादसे का पता चला। सूचना मिलने पर क्षेत्र सहायक सिडाम और वन विभाग के वनरक्षक मौके पर पहुंचे। पंचनामा के बाद शव को ग्रामीण अस्पताल, सिंदेवाही भेजा गया।
इससे पहले 24 अक्टूबर को सिंदेवाही वन परिक्षेत्र के पळसगांव में नानाजी कांबळी और 25 अक्टूबर को भेंडाळा (खातगांव) में प्रेमिला महाडोरे की बाघ के हमले में मौत हुई थी। अब उरकुडपार और धूमनखेडा की घटनाओं को जोड़ लें तो छह दिनों में चार लोग मारे जा चुके हैं।
वन विभाग के प्राथमिक अनुमान के अनुसार इन सभी घटनाओं के पीछे एक ही बाघ हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। बाघ की हरकत पर नजर रखने और उसकी लोकेशन पता करने के लिए वन विभाग के करीब 50 से 60 कर्मचारी कैमरा ट्रैप लगाकर तलाश अभियान चला रहे हैं।
गांव वाले डरे हुए हैं, लेकिन खेती का मौसम होने की वजह से किसानों को खेतों में जाना भी पड़ता है। ऐसे में लोगों की सुरक्षा वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी अंजली बोरावार ने बताया कि बाघ लगातार अपनी जगह बदल रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि जब तक बाघ को ट्रेंक्विलाइज यानी बेहोश करके पकड़ा नहीं जाता, तब तक खेतों और जंगल से सटे इलाकों में जाते समय खास सावधानी रखें।
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