कर्जत में टोरंट के बांध के डूब क्षेत्र में पेड़ों की कटाई, पर्यावरण बचाव समिति ने उठाए सवाल
कर्जत तालुका में टोरंट पॉवर के प्रस्तावित बांध प्रोजेक्ट के डूब क्षेत्र में पेड़ काटे जा रहे हैं। कर्जत पर्यावरण बचाव समिति ने पूछा है कि वन अधिकारी कहां हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
रायगढ़ जिले के कर्जत तालुका में पाली तर्फे कोतवाल खलाटी ग्रामपंचायत इलाके में टोरंट पॉवर कंपनी बिजली प्रोजेक्ट खड़ा कर रही है। अब इस प्रोजेक्ट के डूब क्षेत्र में पेड़ काटे जाने लगे हैं, जिससे कर्जत पर्यावरण बचाव समिति आक्रामक हो गई है। सवाल उठ रहा है कि पेड़ काटने के लिए जमीनें किसने दीं।
गुजरात की कंपनी टोरंट पॉवर कर्जत तालुका के पाली तर्फे कोतवाल खलाटी में सायडोंगर इलाके में हाइड्रॉलिक प्रोजेक्ट बना रही है। प्रस्तावित बांध के आसपास के किसान और गांव वाले इसका विरोध कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए 640 हेक्टेयर जमीन वन विभाग की है, जबकि 230 हेक्टेयर निजी जमीन पर प्रोजेक्ट बनना है। वन जमीन पर लाखों पेड़ हैं, और ये पेड़ स्थानीय लोगों ने श्रमदान करके लगाए और बड़े किए हैं।
अब वही पेड़ काटे जाने लगे हैं और बांध के डूब क्षेत्र के पेड़ खत्म हो रहे हैं। डूब क्षेत्र की कुछ जमीन निजी है और उस जमीन के पेड़ भी काटे जाने लगे हैं। 15000 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट का भूमिपूजन 3 नवंबर को होने की संभावना है। चर्चा है कि उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आएंगे। इसलिए माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री प्रोजेक्ट इलाके का हवाई दौरा कर सकते हैं, और इसी वजह से टोरंट कंपनी प्रशासन ने डूब क्षेत्र के पेड़ काटने का काम हाथ में लिया है।
बताया गया है कि सायडोंगर इलाके में आदिवासी वाडी से आगे जंगल में टोरंट की तरफ से इलेक्ट्रिक कटर से पेड़ काटे जा रहे हैं। कटे हुए पेड़ वहां से उठाने के लिए मजदूर भी लगाए गए हैं। सौ साल और उससे भी पुराने पेड़ काटे जा रहे हैं। पूरा इलाका बिना किसी पेड़ की रुकावट के दिखाया जा सके, इसके लिए सारे पेड़ काटे जा रहे हैं। वहीं 640 हेक्टेयर जमीन पर पेड़ लगाने की कोई योजना नहीं है। वन विभाग ने जमीन प्रोजेक्ट को दिए जाने का कोई पत्र स्थानीय लोगों को नहीं दिया है।
ऐसा कोई पत्र अब तक सोशल मीडिया पर भी नहीं दिखा है, फिर भी पेड़ काटे जा रहे हैं। इसी वजह से कर्जत पर्यावरण बचाव समिति आक्रामक है। कर्जत तालुका के किसानों ने इस प्रोजेक्ट को जमीन नहीं दी है। ऐसे में भी अगर पेड़ काटे जा रहे हैं तो हम किस दुनिया में हैं, यह सवाल कर्जत तालुका के पर्यावरण प्रेमी उठा रहे हैं। डूब क्षेत्र के पेड़ काटे जाने से लोगों में भारी गुस्सा है।
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