महाबळेश्वर में ऊंचे पत्रों की आड़ में क्या हो रहा है, कार्यकर्ता ने जांच मांगी
पर्यावरण बचाव कार्यकर्ता सूर्यकांत (बालासो) पांचाल ने महाबलेश्वर नगरपरिषद सीमा की कुछ निजी और व्यावसायिक संपत्तियों के चारों ओर 10 से 15 फुट ऊंची टीन की चादरों और वॉल कंपाउंड पर सवाल उठाए हैं।
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महाबलेश्वर को पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील इलाका माना जाता है। इसी वजह से यहां की प्राकृतिक संपदा, जैवविविधता और पर्यावरण को बचाने के लिए बने नियमों पर सख्ती से अमल होना जरूरी है। लेकिन अब एक सामाजिक और पर्यावरण बचाव कार्यकर्ता ने इस पर सवाल खड़े किए हैं।
कार्यकर्ता सूर्यकांत (बालासो) पांचाल का आरोप है कि महाबलेश्वर नगरपरिषद की सीमा में कुछ निजी और व्यावसायिक संपत्तियों के चारों ओर 10 से 15 फुट तक ऊंची टीन की चादरें और ऊंचे वॉल कंपाउंड खड़े कर दिए गए हैं। ये चादरें और दीवारें अपारदर्शक हैं। पांचाल ने जिलाधिकारी और महाबलेश्वर नगरपरिषद प्रशासन से मांग की है कि इनके पीछे असल में कौन से काम चल रहे हैं, इसकी फौरन जांच की जाए।
पांचाल ने अपने निवेदन में कहा है कि महाबलेश्वर इलाके की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए संपत्तियों के चारों तरफ बनने वाली बाड़ के नियमों की भी जांच होनी चाहिए। उनके मुताबिक कुछ जगहों पर ऊंची टीन की चादरों और दीवारों से अंदर का हिस्सा पूरी तरह ढक जाता है। इस वजह से वहां चल रहे निर्माण या विकास कार्यों की जानकारी आसानी से नहीं मिल पाती।
पांचाल का दावा है कि इन टीन की चादरों और कंपाउंड की आड़ में रात के वक्त पेड़ों की कटाई, पुराने पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुंचाना, पहाड़ की ढलान काटना, मिट्टी का उत्खनन करना, प्राकृतिक जलस्रोतों में बदलाव करना या मंजूरी से ज्यादा निर्माण करना जैसी बातें होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए उन्होंने मांग की है कि ऐसी सभी संपत्तियों का मौके पर जाकर मुआयना किया जाए। साथ ही उनकी निर्माण अनुमतियां, मंजूर नक्शे, निर्माण का दायरा और असल में हुआ निर्माण, इन सबकी कागजों पर भी जांच हो।
निवेदन में यह भी मांग है कि महाबलेश्वर नगरपरिषद का निर्माण विभाग ऊंची टीन की चादरों या जरूरत से ज्यादा ऊंचे कंपाउंड वाली सभी संपत्तियों का सर्वे करे। इन संपत्तियों में चल रहे विकास कार्यों की कानूनी वैधता परखी जाए। अगर नियमों का उल्लंघन मिले तो जिम्मेदारों पर फौरन कानूनी कार्रवाई की जाए, ऐसी मांग पांचाल ने की है।
निवेदन में यह भी लिखा गया है कि नियम के खिलाफ बनी अपारदर्शक टीन की चादरों की बाड़ हटाई जाए और जरूरत के हिसाब से उनकी जगह पारदर्शक जाली की बाड़ लगाने पर प्रशासन कार्यवाही करे।
पांचाल ने यह भी कहा है कि महाबलेश्वर नगरपरिषद प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और संबंधित संपत्ति धारकों को नोटिस भेजे। अगर पर्यावरण या निर्माण से जुड़े नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो पर्यावरण संरक्षण कानून और महाराष्ट्र प्रादेशिक और नगररचना कानून (MRTP) के तहत कार्रवाई की जाए, यह मांग भी उन्होंने की है।