गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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17:57 IST

मुनगंटीवार ने उठाईं धान खरीद की दिक्कतें, बकाया भुगतान की फाइलें दो दिन में वित्त विभाग को

मुंबई की बैठक में मुनगंटीवार ने उठाव, बारदाना, गोदाम भाड़ा और भुगतान के लिए अलग फंड की मांग रखी। मंत्री भुजबल ने फाइलें दो दिन में वित्त विभाग को भेजने को कहा।

मुनगंटीवार ने उठाईं धान खरीद की दिक्कतें, बकाया भुगतान की फाइलें दो दिन में वित्त विभाग को तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई में धान खरीद की दिक्कतों को लेकर एक बैठक हुई। इसमें विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने किसानों और खरीद केंद्र चलाने वालों के सवाल रखे। बैठक की अध्यक्षता अन्न, नागरी आपूर्ति और ग्राहक संरक्षण मंत्री छगन भुजबल ने की।

मुनगंटीवार ने बैठक में कई मांगें रखीं। इनमें धान का समय पर उठाव, बारदाने का स्टॉक, गोदाम का भाड़ा और भुगतान के लिए अलग फंड शामिल हैं। इन पर मंत्री भुजबल ने निर्देश दिया कि बकाया देयकों की फाइलें दो दिन के अंदर वित्त विभाग के पास भेजी जाएं।

बैठक में सांसद प्रफुल्ल पटेल, विधायक नाना पटोले, परिणय फुके, विनोद अग्रवाल, अविनाश ब्राम्हणकर, कृष्णा गजबे, रामदास मसराम, स्नेहा दुबे पंडित, विजय रहांगडाले और राजकुमार बडोले मौजूद थे। इनके अलावा दूसरे जनप्रतिनिधि, विभाग के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी हाजिर थे।

मुनगंटीवार ने खास तौर पर इस बात की तरफ ध्यान दिलाया कि धान खरीदने के बाद उसका उठाव समय पर नहीं होता। इससे किसानों और खरीद केंद्रों को परेशानी होती है। उन्होंने देरी की वजह से होने वाली घट में छूट पर सही फैसला लेने की मांग की। साथ ही खरीदे गए धान के कम से कम समय में उठाव और ढुलाई के लिए असरदार व्यवस्था बनाने को कहा। उनका कहना था कि किसान के पसीने से उगाया धान खरीद केंद्र पर पड़ा रहे, यह सिर्फ प्रशासनिक मामला नहीं है। इसके पीछे किसान की आर्थिक मुश्किलें जुड़ी हैं और कार्रवाई इसी समझ के साथ होनी चाहिए।

बारदाने का पर्याप्त स्टॉक न होने से भी खरीद में अड़चन आती है। मुनगंटीवार ने यह मुद्दा भी रखा और मांग की कि खरीद का सीजन शुरू होने से पहले ही जरूरी मात्रा में बारदाना उपलब्ध करा दिया जाए। उन्होंने कहा कि धान रखने के लिए जिन गोदामों का इस्तेमाल होता है, उनके भाड़े की मौजूदा दर बढ़ते खर्च के सामने कम पड़ती है। इसलिए उस पर दोबारा विचार करके हकीकत के हिसाब से बढ़ोतरी की जाए।

मुनगंटीवार ने एक अलग पोर्टल बनाने का अहम सुझाव भी दिया, ताकि धान खरीद में पारदर्शिता, तालमेल और असरदार निगरानी रहे। इस पोर्टल पर धान की खरीद, उपलब्ध स्टॉक, उठाव, ढुलाई, गोदाम का इंतजाम और किसानों को दिए जाने वाले भुगतान की जानकारी एक ही सिस्टम में मिल सकती है। इससे देरी की वजहें फौरन सामने आएंगी और वक्त रहते उपाय किए जा सकेंगे।

किसान को धान बेचने के बाद अपना हक का पैसा पाने के लिए बेवजह इंतजार न करना पड़े, इसके लिए मुनगंटीवार ने धान खरीद के भुगतान के लिए अलग फंड का प्रावधान करने या अलग फंड बनाने की मांग की। उनका कहना था कि धान बेचकर मिलने वाला पैसा किसान के अगले सीजन, परिवार की जरूरतों और आर्थिक नियोजन की बुनियाद होता है। इसलिए भुगतान में देरी किसी भी हालत में ठीक नहीं है। उन्होंने मिलिंग का खर्च बढ़ने का हवाला देते हुए मिलिंग की दर पर हकीकत के हिसाब से दोबारा विचार करने और उसे बढ़ाने की भी मांग की। इसके अलावा खरीद केंद्रों की कार्यक्षमता बढ़ाने, धान का फौरन उठाव और ढुलाई करने, रखने की मजबूत व्यवस्था बनाने और खरीद में आने वाली प्रशासनिक और आर्थिक अड़चनें दूर करने के लिए भी उन्होंने कई सुझाव दिए।

मंत्री भुजबल ने मुनगंटीवार के मुद्दों के साथ जनप्रतिनिधियों की बाकी मांगों पर भी सकारात्मक रुख दिखाया। जिन मामलों में वित्त विभाग की मंजूरी चाहिए, उन सभी देयकों और मांगों की फाइलें दो दिन के भीतर वित्त विभाग को भेजने का निर्देश संबंधित विभाग को दिया गया। केंद्र सरकार से राज्य सरकार को जो रकम मिलनी बाकी है, उसके लिए केंद्र के पास फौरन पीछा करने के निर्देश भी दिए गए।

इसके साथ ही दूसरे राज्यों में धान खरीद और मिलिंग के लिए चल रही योजनाओं, नीतियों, दरों और कामकाज के तरीकों का तुलनात्मक अध्ययन करने को कहा गया। इसके आधार पर महाराष्ट्र के लिए व्यावहारिक और असरदार नीति तय करने की दिशा में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए। धान की खरीद के बाद उठाव, ढुलाई और रखने में बेवजह देरी न हो, इसके लिए संबंधित विभागों को आपसी तालमेल से काम करने को कहा गया। साथ ही यह ध्यान रखने की हिदायत भी दी गई कि किसानों को धान बेचने के पैसे के लिए बेवजह इंतजार न करना पड़े।

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