सुधीर मुनगंटीवार ने 2017 की कर्जमाफी से छूटे किसानों के लिए CM फडणवीस से मांगा न्याय
चंद्रपुर जिले के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने 28 सितंबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से 'वर्षा' निवास पर मुलाकात कर 2017 की कर्जमाफी से वंचित पात्र किसानों को फिर मौका देने की मांग की।
मुंबई: चंद्रपुर जिले के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने 28 सितंबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके सरकारी निवास 'वर्षा' पर मुलाकात की। उन्होंने मांग की कि 2017 की कर्जमाफी से वंचित रहे किसानों को न्याय मिले। बताया गया है कि पात्र होने के बावजूद तकनीकी कारणों से जिन किसानों को फायदा नहीं मिला, उन्हें दोबारा मौका देने की बात मुनगंटीवार ने रखी।
बताया गया है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस मांग पर ध्यान देते हुए सहकार विभाग के प्रधान सचिव को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकरी सन्मान योजना 28 जून 2017 को लागू की गई थी। उस वक्त फडणवीस मुख्यमंत्री थे। इस योजना से राज्य के कर्जदार किसानों को बड़ी आर्थिक राहत दी गई। लेकिन पात्र होने के बावजूद कुछ किसान तकनीकी, प्रशासकीय, बैंकिंग और प्रक्रिया से जुड़ी वजहों से इसका फायदा नहीं ले पाए। मुनगंटीवार ने मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर दिलाया कि 2026 में राज्य सरकार ने पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना घोषित की है। उनके मुताबिक 2017 में छूटे पात्र किसानों को इस नई योजना के जरिए न्याय देने का यह सही मौका है।
मुनगंटीवार ने यह भी सवाल उठाया कि अगर पात्र किसान की कोई गलती नहीं है और सिर्फ प्रशासकीय या तकनीकी वजहों से उसे कर्जमाफी नहीं मिली, तो उसकी कीमत वह किसान क्यों चुकाए। उनका कहना है कि समय पर फायदा न मिलने से संबंधित कर्ज खातों पर ब्याज, दंडात्मक ब्याज, विलंब शुल्क और दूसरे चार्ज बढ़ते गए। योजना से राहत मिलनी थी, पर उलटे कर्ज का बोझ बढ़ गया। मुनगंटीवार ने साफ कहा कि सरकारी प्रक्रिया में हुई देरी की कीमत पात्र किसान चुकाए, यह सिर्फ आर्थिक नहीं, न्याय का मामला है।
इसलिए उन्होंने कई मांगें रखीं। पहली मांग यह कि 28 जून 2017 को कर्ज खाते की जो स्थिति थी, उसे आधार मानकर संबंधित पात्र किसानों का 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जाए। दूसरी मांग यह कि फायदा समय पर न मिलने की वजह से खाते पर जमा हुआ दंडात्मक ब्याज, विलंब शुल्क और बाकी अतिरिक्त बोझ पूरी तरह माफ किया जाए। तीसरी मांग यह कि 2017 की योजना में पात्र होकर भी वंचित रहे सभी किसानों की विशेष जांच हो और जो पात्र निकलें, उन्हें पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ती योजना-2026 में विशेष मामले के तौर पर शामिल किया जाए।
मुनगंटीवार ने यह मांग भी की कि तकनीकी या प्रशासकीय कारणों से वंचित रहे किसानों को विशेष ऑफलाइन जांच का मौका दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित जिलाधिकारी, जिला उपनिबंधक, जिला मध्यवर्ती बैंकों और दूसरे संबंधित बैंकों को ऐसे पात्र वंचित किसानों के मामले फौरन निपटाने के निर्देश दिए जाएं।
मुनगंटीवार के मुताबिक इस मांग के पीछे सोच यही है कि 2017 में किसानों के हित में शुरू हुए कर्जमाफी के फैसले को 2026 में न्यायपूर्ण तरीके से पूरा किया जाए। पात्र होकर भी वंचित रहे किसानों को उनके हक की राहत मिले और सरकारी फैसले के अमल में हुई देरी का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उन पर न पड़े। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस मसले पर सकारात्मक फैसले की प्रक्रिया को गति मिलेगी।