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18:02 IST

कलिना ग्रंथालय भ्रष्टाचार मामला: छगन भुजबळ विशेष कोर्ट से बरी, अन्य आरोपी भी दोषमुक्त

मुंबई यूनिवर्सिटी के कलिना ग्रंथालय कॉन्ट्रैक्ट और जमीन डील से जुड़े कथित भ्रष्टाचार केस में विशेष कोर्ट ने राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता छगन भुजबळ को बरी कर दिया है।

कलिना ग्रंथालय भ्रष्टाचार मामला: छगन भुजबळ विशेष कोर्ट से बरी, अन्य आरोपी भी दोषमुक्त
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

राज्य के मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता छगन भुजबळ को मुंबई के चर्चित कलिना ग्रंथालय मामले में बड़ी राहत मिली है। गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को विशेष कोर्ट ने मुंबई यूनिवर्सिटी के सेंट्रल लाइब्रेरी के कॉन्ट्रैक्ट और जमीन डील से जुड़े इस कथित भ्रष्टाचार केस में भुजबळ को दोषमुक्त कर दिया। इस मामले में जो बाकी आरोपी थे, उन्हें भी कोर्ट ने बरी कर दिया है।

यह पूरा मामला तब का है जब छगन भुजबळ पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट यानी सार्वजनिक बांधकाम मंत्री थे। उस दौरान कलिना इलाके में मुंबई यूनिवर्सिटी के भूखंड की डील में गड़बड़ी होने का आरोप एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB ने लगाया था। ACB का कहना था कि यह भूखंड एक प्राइवेट डेवलपर को बहुत ही कम रेट पर लंबी अवधि के लीज पर दे दिया गया, और इस पूरी प्रोसेस में आर्थिक गड़बड़ी हुई। इस केस में ACB ने भुजबळ के साथ-साथ उस समय पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट में तैनात अधिकारियों पर भी केस दर्ज किया था।

मामले की जड़ में क्या था, यह भी समझना जरूरी है। मुंबई यूनिवर्सिटी के कलिना कैंपस के भूखंड पर सेंट्रल लाइब्रेरी बनाने की योजना थी। इस प्रोजेक्ट के लिए पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट ने कॉन्ट्रैक्ट की प्रोसेस शुरू की थी। लेकिन ACB का आरोप था कि भूखंड के एक हिस्से पर लाइब्रेरी बनाने के बाद बची हुई जमीन एक प्राइवेट डेवलपर को 99 साल के लिए बहुत ही कम रेट पर दे दी गई। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक जांच एजेंसी ने कहा था कि यह रेट एक रुपये प्रति स्क्वायर मीटर जितना था।

इस मामले में यह आरोप भी लगाया गया था कि भुजबळ से जुड़े एक ट्रस्ट को प्राइवेट कंपनी से पैसे मिले थे। जांच एजेंसी का दावा था कि इन ट्रांजैक्शन का कथित कॉन्ट्रैक्ट प्रोसेस से कनेक्शन है। हालांकि भुजबळ और बाकी आरोपियों ने शुरू से ही इन आरोपों को नकारा था।

इस केस की सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष कोर्ट ने छगन भुजबळ और बाकी सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट का पूरा और विस्तृत आदेश अभी सामने नहीं आया है, इसलिए दोषमुक्ति के पीछे की ठीक-ठीक वजहें फिलहाल साफ नहीं हो पाई हैं।

इस फैसले से भुजबळ को एक और बड़ी कानूनी राहत मिली है। उनके सार्वजनिक बांधकाम मंत्री रहते हुए के कार्यकाल से जुड़े जो और भ्रष्टाचार केस ACB के पास पेंडिंग हैं, उनमें भी अब भुजबळ को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

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