बुधवार, 4 नवंबर 2026

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मूल में कपास चुनते वक्त किसान पर बाघ का हमला, सुनील कोडापे की हालत गंभीर

मूल में कपास चुनते वक्त किसान पर बाघ का हमला, सुनील कोडापे की हालत गंभीर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

चंद्रपुर जिले के मूल तालुका के दाबगाव मक्ता इलाके में कपास चुन रहे 50 साल के किसान सुनील कोडापे पर बाघ ने हमला किया। वे गंभीर रूप से जख्मी हैं और चंद्रपुर जिला सामान्य अस्पताल में भर्ती हैं।

मूल (चंद्रपुर): मूल तालुका में बाघ के हमले की खबर से लोगों में डर फैल गया है। दाबगाव मक्ता इलाके के कक्ष क्रमांक 30 में कपास चुन रहे 50 साल के एक किसान पर बाघ ने हमला कर दिया। किसान की हालत गंभीर बताई गई है।

जख्मी किसान का नाम सुनील मोतीराम कोडापे है। उनकी उम्र 50 साल है और वे दाबगाव मक्ता के रहने वाले हैं। मिली जानकारी के मुताबिक सुनील कोडापे मौजा चक कन्हळगाव में अपने खेत में कपास चुनने गए थे। उनके साथ आठ से दस मजदूर भी काम कर रहे थे।

सब लोग काम में लगे थे, तभी घात लगाकर बैठे बाघ ने अचानक सुनील कोडापे पर झपट्टा मारा। हमला इतना अचानक था कि उन्हें बचने का कोई मौका नहीं मिला और वे गंभीर रूप से जख्मी हो गए। पास में काम कर रहे दूसरे मजदूरों ने शोर मचाया, जिससे बाघ वहां से भाग गया। बताया गया है कि इसी वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।

घटना की खबर मिलते ही वन विभाग के वनपाल मनीष निमकर, वनरक्षक कवळे और उनकी टीम फौरन मौके पर पहुंची। साथियों की मदद से जख्मी सुनील कोडापे को तुरंत मूल के उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां शुरुआती इलाज के बाद हालत गंभीर होने की वजह से उन्हें आगे के इलाज के लिए चंद्रपुर के जिला सामान्य अस्पताल भेज दिया गया।

वन विभाग की तरफ से मदद भी दी गई है। चिचपल्ली वन परिक्षेत्र के वनक्षेत्राधिकारी महेशकर ने मूल के उपजिला अस्पताल जाकर जख्मी किसान से मुलाकात की और उनकी तबीयत के बारे में पूछा। विभाग की ओर से उन्हें फौरी आपात मदद के तौर पर 10 हजार रुपये का चेक भी सौंपा गया।

इस बार बारिश ने साथ नहीं दिया और तालुका में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। अनियमित बारिश और सूखे की वजह से मूल तालुका के किसान पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। अब जंगली जानवरों के खौफ ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। दिवाली को बस कुछ ही दिन बचे हैं और ऐसे वक्त में हुई इस घटना से किसान परिवारों में दुख और चिंता का माहौल है।

हाथ में आई फसल को किसी तरह बचाने और मजदूरी का काम करने के लिए किसानों को जान जोखिम में डालकर खेतों में जाना पड़ रहा है। जंगली जानवरों की आवाजाही रोज बढ़ रही है और सीधे हमले भी हो रहे हैं, जिससे किसान परेशान हैं। खेती के मौसम में किसानों और मजदूरों को डर के साए में काम करना पड़ रहा है।

इसी वजह से दाबगाव मक्ता, चक कन्हळगाव और आसपास के इलाके के लोग गुस्से और दर्द के साथ मांग कर रहे हैं कि वन विभाग तुरंत गश्त बढ़ाए, बाघ की हरकतों पर नजर रखे और खेतों में जाने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए फौरन ठोस इंतजाम करे। किसानों की जान का सवाल अब सामने आ गया है और लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर जल्द ध्यान देगा।

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