पांच हजार की मदद से किसानों को क्या मिलेगा, आदित्य ठाकरे ने सरकार से पूछा
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छत्रपती संभाजीनगर में शिवसेना (ठाकरे गुट) नेता आदित्य ठाकरे ने किसानों की मदद, फसल बीमा और कर्जमाफी पर राज्य सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कई और मुद्दों पर भी बात की।
छत्रपती संभाजीनगर : शिवसेना (ठाकरे गुट) के नेता आदित्य ठाकरे ने राज्य के किसानों की बदहाली, अटकी हुई आर्थिक मदद, फसल बीमा और कर्जमाफी को लेकर राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सवाल किया कि किसानों को पांच हजार रुपये की मदद देने से आखिर क्या फायदा होगा। उनका आरोप है कि सरकार सरकारी कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन मुसीबत में फंसे किसानों तक मदद नहीं पहुंच रही।
ठाकरे के मुताबिक किसानों के खाते में अब तक मदद की रकम जमा नहीं हुई है। कई इलाकों में पीने के पानी की किल्लत भी हो गई है। उन्होंने मांग की कि सरकार बीच का रास्ता निकाले और किसानों को पर्याप्त आर्थिक मदद दे। मुख्यमंत्री का नाम लेकर निशाना साधते हुए ठाकरे ने कहा, "आप हवाई जहाज से घूमिए, गाड़ी से घूमिए, पर किसानों का हाल तो देखिए। क्या उनकी हालत आपको दिखती नहीं?"
फसल बीमा और कर्जमाफी पर भी उन्होंने सरकार को घेरा। उनका कहना था कि किसानों का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है और पिछले साल का फसल बीमा भी अब तक नहीं मिला। उन्होंने मांग की कि सरकार बताए कि खेत की उपज को सही दाम कौन देगा और जिस कर्जमाफी का एलान हुआ था, उसका क्या हुआ।
एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे ने दिवाली दीपोत्सव रद्द करने का फैसला किया है। इस पर आदित्य ठाकरे ने कहा कि बड़े कार्यक्रम कम किए जा रहे हैं और जनता में संवेदनशीलता दिखती है, मगर सरकार में वह नजर नहीं आती।
दिया मिर्झा के पटाखों वाले वीडियो पर चल रहे विवाद में ठाकरे ने भाजपा पर आरोप लगाया। उनका दावा है कि पटाखे न फोड़ने की अपील वाला वीडियो बनाने के लिए मुंबई महापालिका ने कलाकारों को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने कहा कि प्रदूषण से सभी धर्मों के लोग परेशान होते हैं, फिर भी दिया मिर्झा को उनके सरनेम की वजह से निशाना बनाया जा रहा है, ऐसा उनका आरोप है। उन्होंने पूछा कि अगर पर्यावरण के लिए आवाज उठाने वालों को अर्बन नक्सल या देशविरोधी कहा जाएगा, तो क्या जंगल बचाने के लिए लड़ने वालों को भी यही कहा जाएगा।
कांग्रेस के सांसद श्यामकुमार बर्वे से जुड़े मामले पर ठाकरे ने साफ किया कि उन्होंने इसका वीडियो अभी नहीं देखा है और देखने के बाद ही प्रतिक्रिया देंगे। मुंबई में शिक्षकों से मारपीट के कथित वीडियो का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों मामलों का संज्ञान लिया जाना चाहिए।
गोकुल दूध संघ के मुद्दे पर भी उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि पिछले कुछ सालों में भाजपा ने अलग-अलग विपक्षी पार्टियों में फूट डालने की राजनीति की है और अब सहकारी क्षेत्र में भी दखल देने की कोशिश हो रही है। शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में हुई फूट का हवाला देकर उन्होंने भाजपा की राजनीति की आलोचना की।
मुंबई बस डिपो के मामले में ठाकरे ने सावधानी बरती। उन्होंने कहा कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह निजी डेवलपर और मुंबई महापालिका के बीच का विवाद है, और पूरी जानकारी लेने के बाद ही वे प्रतिक्रिया देंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बारे में बोलते हुए उन्होंने उन्हें पद से हटाने की मांग की। उनका कहना था कि वोट चोरी और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, और ऐसी गड़बड़ियों में मदद करने वालों को भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। आंदोलन के दौरान युवाओं और महिलाओं पर कथित अत्याचार की जांच की मांग भी उन्होंने की।
गन्ने के दाम को लेकर किसान संगठनों को आंदोलन करना पड़ रहा है, इस पर भी उन्होंने सरकार से सवाल पूछे। ठाकरे ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव नजदीक आते ही गन्ने का दाम बढ़ाने की हलचल शुरू हो जाती है, तो महाराष्ट्र के किसानों के सवालों पर सरकार कब ध्यान देगी।
हिंगोली में ठाकरे गुट के पदाधिकारियों के शिंदे गुट में शामिल होने पर ठाकरे ने कहा कि जिन्हें महाराष्ट्र से द्वेष और भ्रष्टाचार मंजूर है, वही लोग उस गुट में जा रहे हैं। उन्होंने चुनाव बैलेट पेपर पर कराने की मांग की और दावा किया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन होगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "हमारा ट्रम्प कार्ड तो जनता है।"
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