मेयो अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस चालकों के दो गुटों में टकराव, करीब 10 एम्बुलेंस के शीशे तोड़े
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नागपुर के मेयो अस्पताल परिसर में देर रात बेसबॉल बैट, हॉकी स्टिक और लोहे की रॉड से हमला हुआ। तहसील पुलिस ने तीन आरोपियों पर केस दर्ज किया है, एक को हिरासत में लिया गया है।
नागपुर के मेयो अस्पताल परिसर में निजी एम्बुलेंस चलाने वालों के दो गुट आपस में भिड़ गए। आरोप है कि अस्पताल के अंदर एम्बुलेंस चलाने देने और पैसों के कंट्रोल को लेकर यह झगड़ा हुआ। देर रात बेसबॉल बैट, हॉकी स्टिक और लोहे की रॉड लेकर आए हमलावरों ने करीब 10 एम्बुलेंस के शीशे तोड़ दिए और पूरे परिसर में दहशत फैल गई।
बताया गया है कि झगड़े की शुरुआत एक एम्बुलेंस ड्राइवर से कथित तौर पर 3,000 रुपये मांगे जाने से हुई। उसे अस्पताल परिसर में अपनी गाड़ी चलाने देने के बदले यह रकम मांगी गई थी। पैसों का यह विवाद जल्दी ही एम्बुलेंस चलाने वालों के दो गुटों की आपसी भिड़ंत में बदल गया। रात का हमला दिन में हुई मारपीट का बदला लेने के इरादे से किया गया लगता है।
तहसील पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने सोहेब फिरोज खान को हिरासत में लिया है, जबकि परवेज फिरोज खान और सोनू उर्फ बाबा फरार हैं।
शिकायत के मुताबिक शिकायतकर्ता शेख रेहान शेख नूर (20) यशोधरा नगर के नूरी मस्जिद इलाके में रहते हैं और एम्बुलेंस ड्राइवर हैं। उनका आरोप है कि मेयो अस्पताल में एम्बुलेंस चलाने को लेकर परवेज फिरोज खान, सोनू उर्फ बाबा और सोहेब फिरोज खान से उनका विवाद हुआ था।
आरोप है कि इन तीनों ने अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस चलाने देने के बदले उनसे 3,000 रुपये मांगे। वहां मौजूद दूसरे एम्बुलेंस ड्राइवरों ने इस मांग का विरोध किया, जिससे बहस हुई और दोनों गुटों के बीच तनाव बढ़ गया।
बताया जाता है कि उसी रात बात हिंसा तक पहुंच गई। दिन में हुई हाथापाई का बदला लेने के लिए आरोपी कथित तौर पर बेसबॉल बैट, हॉकी स्टिक और लोहे की रॉड लेकर लौटे। आरोप है कि उन्होंने परिसर में खड़ी करीब 10 एम्बुलेंस को निशाना बनाया, उनके शीशे तोड़े और काफी नुकसान किया। तोड़फोड़ के बाद हमलावर भाग गए और पीछे टूटी हुई गाड़ियां और डर का माहौल रह गया।
पुलिस को कथित तौर पर पता चला है कि तीनों आरोपियों का पहले का आपराधिक रिकॉर्ड है। सोहेब हिरासत में है, जबकि फरार परवेज और सोनू को ढूंढने की कोशिश चल रही है। जांच करने वाले पूरे घटनाक्रम, कथित वसूली की मांग और एम्बुलेंस चलाने वालों की आपसी रंजिश के हालात की पड़ताल कर रहे हैं। इसमें किसी और की भूमिका थी या नहीं, यह भी देखा जा रहा है।
इस घटना से मरीजों, उनके साथ आए लोगों और अस्पताल के कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं, खासकर तब जब एक बड़े सरकारी अस्पताल के अंदर निजी ऑपरेटरों के बीच हिंसा हो। मेयो में नागपुर और विदर्भ के दूसरे हिस्सों के साथ पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। कई मरीज मुश्किल हालात में होते हैं और रास्ता बताने के लिए अस्पताल स्टाफ और उपलब्ध गाड़ियों पर निर्भर रहते हैं।
पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि कुछ निजी एम्बुलेंस वाले और बिचौलिए मरीजों और उनके रिश्तेदारों के पास जाकर उन्हें निजी अस्पताल ले जाने के लिए राजी करते हैं। मरीज हासिल करने की होड़ और एम्बुलेंस के कारोबार पर कंट्रोल भी गुटों की रंजिश की वजह हो सकता है, ऐसा शक जताया जा रहा है। ये आरोप साबित होते हैं तो मामला सिर्फ दो ड्राइवरों के निजी झगड़े का नहीं रहेगा।
अब अस्पताल प्रशासन और पुलिस के सामने सवाल हैं कि हथियारबंद लोग परिसर में कैसे घुसे, निजी एम्बुलेंस पर नजर रखने की कोई असरदार व्यवस्था है या नहीं, और अस्पताल के आसपास बिना इजाजत घूमने वाले बिचौलियों पर कौन निगरानी रखता है।
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