बीड: डीज़ल के पैसे न दे पाने पर बेहोश बच्ची को एंबुलेंस से उतारा, पिता 10 किमी पैदल चला
माजलगाव तालुका के दिंदूड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का मामला, वीडियो वायरल होने के बाद जिले में नाराज़गी और कार्रवाई की मांग।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बीड जिले के माजलगाव तालुका में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे जिले में नाराज़गी पैदा कर दी है। दिंदूड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक बेहोश बच्ची और उसके लाचार पिता को एंबुलेंस से नीचे उतार दिया गया, क्योंकि वे डीज़ल के पैसे नहीं दे सके। इस पूरे वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल गया, जिसके बाद मामला लोगों के सामने आया।
बताया गया है कि बच्ची 11 साल की है और दिंदूड गांव की ज़िला परिषद स्कूल में पांचवीं कक्षा में पढ़ती है। 29 सितंबर की सुबह वह स्कूल में थी, तभी उसे अचानक फिट आई और वह बेहोश हो गई। स्कूल के प्रधानाध्यापक मनोहर कटारे और दूसरे शिक्षक उसे फौरन दिंदूड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां के चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीलेश ढाकणे ने बच्ची की हालत गंभीर बताते हुए उसे आगे के इलाज के लिए रेफर करने की सलाह दी।
बच्ची के सिर से मां का साया पहले ही उठ चुका है। उसके पिता बोझ ढोने की मज़दूरी करके दो बेटों और दो बेटियों को पालते हैं, और बुज़ुर्ग दादी बच्चों की देखभाल करती हैं। परिवार बेहद तंगी में रहता है। आरोप है कि एंबुलेंस के लिए परिवार गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन मदद को कोई आगे नहीं आया। पिता के पास एंबुलेंस को देने के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए केंद्र के डॉक्टर और कर्मचारियों ने डीज़ल के पैसे मांगे। रोज़ की मज़दूरी से पेट पालने वाले इस परिवार के पास पैसे नहीं थे, तो उन्हें सीधे एंबुलेंस से उतार दिया गया। एंबुलेंस के चालक ने भी बच्ची को आगे ले जाने से मना कर दिया।
इसके बाद लाचार पिता ने बेहोश बेटी को कंधे पर डाला और पैदल निकल पड़ा, पीछे-पीछे दादी भी चलती गईं। बताया गया है कि दादी ने भावुक होकर डॉक्टरों से कहा, "हमारे पास खाने को पैसे नहीं हैं, डीज़ल के लिए कहां से लाएं? चार बच्चों को जैसे-तैसे पाल रहे हैं।" आरोप है कि इस पर सामने खड़े डॉक्टर ने बदतमीज़ी से कहा, "पाल नहीं सकते तो बच्चे पैदा क्यों करते हो।"
पिता ने दिंदूड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से आगे का सफ़र पैदल ही शुरू किया और 10 किलोमीटर से ज़्यादा रास्ता चलता रहा। वीडियो सामने आने के बाद पूरे बीड जिले में गुस्सा है और लोग संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई, निलंबन और कानूनी कदम की मांग कर रहे हैं। लोगों का सवाल है कि जब सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ही ऐसा हो, तो गरीब कहां जाएं।
डॉ. नीलेश ढाकणे ने इस बारे में कहा है कि एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं के लिए होती है, लेकिन फिर भी उन्हें ऐसा नहीं बोलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि उनसे गलती हुई है और इसके लिए खेद जताया।
ज़िला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. उल्हास गंडाळ ने कहा कि अगर किसी ने डीज़ल के लिए पैसे मांगे हैं और मरीज़ के रिश्तेदारों से बदतमीज़ी से बात की है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे पूरी जानकारी ले रहे हैं।