सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 319 | Very Poor 08:35 IST

अकोला में बारिश कम, खरीप की फसल चौपट और रब्बी पर भी खतरा

अकोला जिले में औसत से काफी कम बारिश हुई। खरीप की फसलों को नुकसान हुआ है और किसान अब रब्बी की बुवाई के लिए पानी और पैसे को लेकर परेशान हैं।

अकोला में बारिश कम, खरीप की फसल चौपट और रब्बी पर भी खतरा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

अकोला जिले में इस साल बारिश ने लंबा ब्रेक ले लिया। इससे खरीप सीजन की फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है और अब रब्बी सीजन पर भी संकट खड़ा हो गया है। जिले में औसतन 693 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन असल में सिर्फ 422.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

बारिश में लंबा गैप आने से सोयाबीन, कपास और दूसरी खरीप फसलों की बढ़त पर असर पड़ा। इसकी वजह से किसानों का आर्थिक हिसाब बिगड़ गया है। रब्बी की बुवाई के लिए पानी और पूंजी की चिंता भी बढ़ गई है।

जिले में 4 लाख 26 हजार 995 हेक्टेयर क्षेत्र की फसलों को बारिश की कमी का झटका लगा है। कई खेतों में उम्मीद के मुताबिक पैदावार मिलने की संभावना कम हो गई है। जमीन की नमी घटने से रब्बी की बुवाई में भी दिक्कतें आ रही हैं। खरीप से कमाई की आस टूट गई, इसलिए अगले सीजन के लिए पैसे जुटाना किसानों के सामने बड़ी चुनौती है।

सूखे के हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने पात्र किसानों को पांच-पांच हजार रुपये की अग्रिम मदद का ऐलान किया है। किसान दिवाली से पहले आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद में सरकार की तरफ देख रहे थे। लेकिन किसानों का कहना है कि हजारों रुपये की लागत और इतने बड़े नुकसान के सामने यह मदद कम है।

बीज, खाद, कीटनाशक और जुताई-गुड़ाई पर किया गया खर्च निकलने की संभावना भी कम है। ऊपर से रब्बी की बुवाई के लिए नए सिरे से खर्च करना पड़ेगा। इसलिए नुकसान झेलने वाले किसान यह देख रहे हैं कि उन्हें कितनी भरपाई मिलती है।

सबसे ज्यादा मार सूखी खेती यानी असिंचित खेती पर पड़ी है। जिले के कुल 4 लाख 32 हजार 10 हेक्टेयर क्षेत्र में से 4 लाख 22 हजार 439 हेक्टेयर पर बुवाई हुई थी। इसमें से असिंचित क्षेत्र के 4 लाख 6 हजार 720 हेक्टेयर की फसलें प्रभावित हुई हैं। कुल 1 हजार 37 गांवों के 2 लाख 88 हजार 76 किसान प्रभावित दर्ज किए गए हैं। सिंचित क्षेत्र के 611 गांवों के 6 हजार 631 किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ा है।

खरीप का नुकसान झेलने के बाद किसान अब रब्बी सीजन के लिए पानी और आर्थिक मदद की उम्मीद कर रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर बारिश न होने से हुए नुकसान की भरपाई और अगले सीजन की जरूरी मदद वक्त पर नहीं मिली, तो उनका आर्थिक संकट और गहरा हो जाएगा।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे