महिलाओं और बच्चों के यौन अपराध मामलों के लिए 850 फास्ट ट्रैक कोर्ट को केंद्र की मंजूरी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश भर की 850 फास्ट ट्रैक कोर्ट के विस्तार और मजबूती को हरी झंडी मिली।
केंद्र सरकार ने महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों के मामलों में इंसाफ की रफ्तार बढ़ाने के लिए एक अहम फैसला लिया है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इसी बैठक में देश भर की 850 फास्ट ट्रैक कोर्ट का विस्तार करने और उन्हें मजबूत बनाने को मंजूरी दे दी गई।
बैठक खत्म होने के बाद केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी दी। इस तरह महिला सुरक्षा के मोर्चे पर केंद्र ने एक बड़ा कदम उठाया है।
इस फैसले का मुख्य मकसद बलात्कार और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों का जल्दी निपटारा करना है। इन विशेष कोर्ट में पॉक्सो कानून के तहत आने वाले मामलों की सुनवाई भी होती है। सरकार को भरोसा है कि विशेष कोर्ट का विस्तार होने से अटके हुए मुकदमे तेजी से निपटेंगे और पीड़ितों को वक्त पर न्याय मिलने में मदद मिलेगी।
कानून और न्याय मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 30 अप्रैल 2026 तक देश के 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 775 फास्ट ट्रैक विशेष कोर्ट काम कर रहे थे। अब इन कोर्ट के विस्तार और मजबूती को मंजूरी मिल गई है। इससे न्याय व्यवस्था की क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है।
उम्मीद जताई जा रही है कि नई अदालतों की वजह से बलात्कार और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े लंबित मामलों का निपटारा जल्दी हो सकेगा। इन कोर्ट में बलात्कार, महिलाओं पर अत्याचार और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी। खास तौर पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का यह फैसला उन पीड़ित महिलाओं और बच्चों के लिए है जिन्हें इंसाफ के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। सरकार का कहना है कि विशेष कोर्ट मजबूत होंगे तो ऐसे मामलों में फैसले वक्त पर आ सकेंगे और पीड़ितों को राहत मिलेगी।
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