महावितरण की EV कार किराया डील पर सवाल, टेंडर से वर्क ऑर्डर तक 178 करोड़ बढ़े
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महावितरण के अधिकारियों के लिए इलेक्ट्रिक कारें किराये पर लेने के करार में टेंडर के 636 करोड़ रुपये वर्क ऑर्डर में 815 करोड़ हो गए।
महावितरण (Mahavitaran) के अधिकारियों के लिए किराये पर ली जाने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों (ईव्ही) के करार में टेंडर से वर्क ऑर्डर तक करीब 178 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की बात सामने आई है। इससे पूरे राज्य में इस करार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक महावितरण के राज्य भर के लगभग बारह सौ अधिकारियों के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल किराये पर लेने का टेंडर 636 करोड़ रुपये का तय हुआ था। लेकिन उसी टेंडर का असली वर्क ऑर्डर 815 करोड़ रुपये का दिया गया। टेंडर की अंदाजित कीमत 636 करोड़ रुपये रखी गई थी। एमएस क्रिएटिव्ह मोबिलिटी प्रा. लि. और उसकी एक सहयोगी कंपनी को दिए गए वर्क ऑर्डर की कुल कीमत 815 करोड़ रुपये बताई गई है। यानी मूल कीमत में करीब 178 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।
इतना ही नहीं, पहले पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों के लिए महावितरण के अलग-अलग पदों के हिसाब से जो महीने का किराया तय था, उसके मुकाबले इलेक्ट्रिक कार के लिए डेढ़ से दो गुना ज्यादा किराया मंजूर किया गया है। ऐसे में ईव्ही गाड़ियों से ईंधन खर्च में बचत होने के बजाय महावितरण पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने के आसार दिख रहे हैं।
किराये के आंकड़े देखें तो पेट्रोल-डीजल कार लेते समय मुख्य अभियंता पद के लिए महीने का किराया 35,700 रुपये तय था। ईव्ही कार के लिए यह 69,400 रुपये कर दिया गया है। अधीक्षक अभियंता पद के लिए पेट्रोल-डीजल कार का किराया हर महीने 31,500 रुपये था, जबकि उसी पद के लिए ईव्ही कार का किराया 58,500 रुपये तक बढ़ाया गया है।
डिवीजनल और सब डिवीजनल अधिकारियों के लिए पेट्रोल-डीजल गाड़ी का महीने का किराया 29,900 रुपये था। ईव्ही कार के लिए यह 47,600 रुपये किया गया है। फ्लाइंग स्क्वॉड की गाड़ी का पेट्रोल-डीजल कार का किराया 41,500 रुपये था, जो ईव्ही कार के लिए 57,200 रुपये कर दिया गया है।
इस पर वे सप्लायर सवाल उठा रहे हैं, जो सालों से महावितरण को पेट्रोल और डीजल की कारें किराये पर देते आए हैं। उनका सवाल है कि क्या यह सब एक प्राइवेट कंपनी को बेवजह फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है?
महावितरण की इस नई ईव्ही पॉलिसी की वजह से कई सालों से पेट्रोल-डीजल की गाड़ियां किराये पर देने वाले सैकड़ों सप्लायर और ड्राइवर अब बेरोजगारी की कगार पर हैं। उन्होंने इस महंगे फैसले और प्राइवेट कंपनी को बेवजह लाभ देने पर कड़ा ऐतराज जताया है और आंदोलन की चेतावनी दी है। सप्लायरों ने उम्मीद भी जताई है कि मुख्यमंत्री इस मामले में दखल देंगे।
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