महाराष्ट्र में सेहत सेवाओं की क्वालिटी सुधारने फडणवीस की सोच पर शुरू हुई 'लिविंग लैब'
राज्य स्तर की इस लिविंग लैब में सरकार, निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थाएं और नवोन्मेषक एक मंच पर आएंगे। मकसद अस्पताल जैसी सुविधाओं की गुणवत्ता सुधारना और रोजगार के मौके बनाना है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
महाराष्ट्र में 'सबके लिए स्वास्थ्य' के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए आरोग्य नवोन्मेष और गुणवत्ता सुधार की राज्य स्तरीय 'लिविंग लैब' शुरू की गई है। यह पहल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संकल्पना से सामने आई है।
इस लैब के जरिए स्वास्थ्य सुविधाओं का दर्जा और गुणवत्ता मानकों का पालन बेहतर करने पर जोर रहेगा। इसके साथ राज्य के नागरिकों के लिए कौशल विकास और रोजगार के मौके बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इस मंच का उद्देश्य है कि स्थानीय स्वास्थ्य प्राथमिकताएं तय की जाएं, समुदायों के साथ मिलकर जरूरत के हिसाब से उपाय बनाए जाएं और असली स्वास्थ्य व्यवस्था में नए तरीकों को आजमाकर देखा जाए। सरकार, स्वास्थ्य सेवा देने वाले, निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थाएं, नवोन्मेषक और विकास भागीदार, सबके अनुभव और क्षमता एक साझा मंच पर लाए जाएंगे। मुख्यमंत्री फडणवीस की कोशिश है कि मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था और इलाज के रास्ते और मजबूत हों। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल हेल्थ, डेटा और 'प्रिसिजन हेल्थ' जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
निजी स्वास्थ्य क्षेत्र की पहुंच और क्षमता को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकताओं से जोड़ना इस पहल का एक अहम मौका बताया गया है। अलग-अलग हितधारकों की भागीदारी से स्थानीय जरूरतों के मुताबिक ऐसे उपाय तैयार किए जा सकेंगे जो व्यावहारिक, किफायती और आसानी से मिलने वाले हों। जो उपाय कामयाब होंगे, उन्हें महाराष्ट्र के साथ दूसरी जगहों पर भी फैलाने की गुंजाइश परखी जाएगी। पहल के आगे के चरणों में समुदाय की स्वास्थ्य जरूरतों से जुड़े स्थानीय कौशल विकास, रोजगार और उद्योग निर्माण के मौके भी तलाशे जाएंगे।
इस संकल्पना में सिर्फ नई तकनीक इस्तेमाल करने की बजाय नवोन्मेष को हर नागरिक तक पहुंचाने पर जोर है, जिनमें दुर्गम इलाकों के लोग और स्वास्थ्य सेवा से वंचित तबके भी शामिल हैं। सरकार, समुदाय, नवोन्मेषक और भागीदारों के साथ मिलकर असरदार उपायों को आजमाया जाएगा, उनसे मिले अनुभवों का तेजी से विश्लेषण होगा और स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता और समानता बढ़ाने वाले उपायों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जाएगा।
लिविंग लैब को सबूत तैयार करने और आपसी सहयोग के मंच के तौर पर विकसित किया जाएगा। समुदाय की जरूरतें और स्थानीय मालिकाना हक इस प्रक्रिया के केंद्र में रहेंगे, और नवोन्मेष, स्वास्थ्य व्यवस्था और सीधे सेवा देने वाले घटकों के बीच तालमेल और मजबूत किया जाएगा।
'द फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स अँड गायनॅकॉलॉजिकल सोसायटीज ऑफ इंडिया' का 'मान्यता' नाम का प्रमुख उपक्रम इस नजरिए की शुरुआती मिसाल है। मातृ स्वास्थ्य सेवा मजबूत करने की सरकार की कोशिशों को यह उपक्रम सहारा देता है और दिखाता है कि निजी क्षेत्र का गुणवत्ता सुधार मॉडल सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ कैसे काम कर सकता है। 'एमएसडी फॉर मदर्स' इस उपक्रम का समन्वय कर रहा है और इस साझा मॉडल को विकसित करने के लिए अलग-अलग भागीदारों का समूह जोड़ रहा है। नवोन्मेष को व्यावहारिक और टिकाऊ उपायों में बदलकर व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भागीदारी का इस्तेमाल किया जाएगा।