मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

२०१७ की कर्जमाफी से छूटे किसानों के लिए मुनगंटीवार ने मुख्यमंत्री से की मांग

मुख्यमंत्री फडणवीस ने सहकार विभाग के प्रधान सचिव को तुरंत जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

२०१७ की कर्जमाफी से छूटे किसानों के लिए मुनगंटीवार ने मुख्यमंत्री से की मांग
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने 28 सितंबर को मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी निवास 'वर्षा' पर उनसे मुलाकात की। उन्होंने मांग रखी कि 2017 की कर्जमाफी से वंचित रह गए पात्र किसानों को भी अब इसका फायदा मिले। मुनगंटीवार की इस मांग के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने सहकार विभाग के प्रधान सचिव को तुरंत जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

सन 2017 में देवेंद्र फडणवीस तत्कालीन मुख्यमंत्री थे। उनकी अगुवाई में 28 जून 2017 को छत्रपति शिवाजी महाराज किसान सम्मान योजना लागू की गई थी। इस योजना से राज्य के कर्जदार किसानों को बड़ी आर्थिक राहत दी गई। लेकिन पात्र होने के बावजूद कुछ किसान तकनीकी, प्रशासकीय, बैंकिंग और प्रक्रिया से जुड़े कारणों से इसका फायदा नहीं ले पाए।

राज्य सरकार ने 2026 में पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान कर्जमुक्ति योजना का ऐलान किया है। मुनगंटीवार ने मुख्यमंत्री के ध्यान में यह बात लाई कि 2017 में पात्र होकर भी छूट गए किसानों को इस नई योजना के जरिए न्याय देने का यह सही मौका है।

मुनगंटीवार का कहना है कि जिस पात्र किसान की कोई गलती नहीं थी और जिसे सिर्फ प्रशासकीय या तकनीकी वजहों से कर्जमाफी नहीं मिली, वह इसकी कीमत क्यों चुकाए, यह बुनियादी सवाल है। उनके मुताबिक कर्जमाफी समय पर न मिलने से उन कर्ज खातों पर आगे ब्याज, दंडात्मक ब्याज, देरी का शुल्क और दूसरे चार्ज बढ़ते गए। यानी योजना का फायदा मिलना था, पर उलटे कर्ज का बोझ बढ़ गया। मुनगंटीवार ने साफ रुख रखा कि सरकारी प्रक्रिया में हुई देरी की कीमत पात्र किसान चुकाए, यह सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि न्याय का मामला है।

इसी आधार पर उन्होंने कई मांगें रखीं। पहली, 28 जून 2017 को कर्ज खाते की जो स्थिति थी, उसे आधार मानकर संबंधित पात्र किसानों का 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जाए। दूसरी, योजना का फायदा समय पर न मिलने से खाते पर जमा हुआ दंडात्मक ब्याज, देरी का शुल्क और बाकी अतिरिक्त बोझ पूरी तरह माफ हो।

तीसरी मांग यह रही कि 2017 की योजना में पात्र होकर भी वंचित रहे सभी किसानों की विशेष जांच कराई जाए, और जो किसान पात्र निकलें, उन्हें पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान कर्जमुक्ति योजना-2026 में विशेष मामले के तौर पर शामिल किया जाए। चौथी, तकनीकी या प्रशासकीय कारणों से छूटे किसानों को विशेष ऑफलाइन जांच का मौका दिया जाए।

मुनगंटीवार ने यह भी कहा कि संबंधित जिलाधिकारियों, जिला उपनिबंधकों, जिला मध्यवर्ती बैंकों और दूसरे संबंधित बैंकों को निर्देश दिए जाएं कि ऐसे पात्र किसानों के मामले तुरंत निपटाएं। उनके मुताबिक इस मांग के पीछे सोच यही है कि 2017 में किसानों की भलाई के लिए शुरू हुए कर्जमाफी के फैसले को 2026 में सही तरीके से पूरा किया जाए, और अमल में हुई देरी का अतिरिक्त बोझ किसानों पर न पड़े।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने मांग पर ध्यान देते हुए सहकार विभाग के प्रधान सचिव को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इससे 2017 की कर्जमाफी से छूटे पात्र किसानों के मामले में सकारात्मक फैसले की प्रक्रिया को अब रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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