चंद्रपुर में कपास किसानों पर सूखे की मार, पैदावार 35-50 फीसदी घटने का अंदेशा
चंद्रपुर जिले के 12 तालुकाओं में सूखे के हालात को देखते हुए 'ट्रिगर-1' लागू हो गया है और पंचनामे शुरू हो गए हैं।
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चंद्रपुर जिले के कपास किसान इस साल सूखे के साये में हैं। बारिश कम और असमान हुई, बीच में लंबा खंड भी पड़ा। इससे पानी का तनाव बना और उसका सीधा असर कपास की फसल पर पड़ा है। जिले के 12 तालुके सूखे की स्थिति को देखते हुए 'ट्रिगर-1' में शामिल किए गए हैं। कपास की पैदावार में बड़ी गिरावट का अंदेशा जताया जा रहा है। विश्व कपास दिवस हर साल 7 अक्टूबर को मनाया जाता है और इस बार की आधिकारिक थीम 'कॉटन फॉर गुड' है, लेकिन जिले के कपास किसानों के लिए यह साल चिंता वाला है।
खरीफ 2026 में चंद्रपुर जिले में कुल 4 लाख 70 हजार 277 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बुवाई हुई। इसमें कपास सबसे प्रमुख फसल है और 1 लाख 93 हजार 944 हेक्टेयर क्षेत्र कपास के नीचे है। धान का क्षेत्र 1 लाख 86 हजार 42 हेक्टेयर है, जबकि सोयाबीन का क्षेत्र 53 हजार 976 हेक्टेयर है। इसलिए जिले की खरीफ अर्थव्यवस्था में कपास की अहमियत बहुत बड़ी है।
इस बार कपास की बढ़वार के दौरान ही बारिश का भारी तनाव बन गया। कई इलाकों में कपास की पातियां और फूल झड़ रहे हैं, टिंडों की संख्या कम रह रही है और पौधों की बढ़वार रुक गई है। हाल ही में हुई क्षेत्रीय पाहणी में कपास की उत्पादकता में करीब 35 से 50 फीसदी तक गिरावट की आशंका जताई गई है। बुवाई का खर्च बड़ा होने के बावजूद उम्मीद के मुताबिक उपज न मिलने की फिक्र किसानों को सता रही है।
जिले के 12 तालुकाओं में 'ट्रिगर-1' लागू होने के बाद फसल नुकसान के पंचनामे और फसल की हालत का सर्वे शुरू कर दिया गया है। फसल की मौजूदा स्थिति, नुकसान का स्तर, फोटो और दूसरी नोंदें जमा करके रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सूखाग्रस्त इलाकों के लिए कई उपाय घोषित हुए हैं। इनमें फसल कर्ज का पुनर्गठन, कर्ज वसूली पर रोक और खेती के पंपों के बिजली बिल में छूट शामिल हैं। कपास खरीद के लिहाज से भी चंद्रपुर अहम केंद्र है। 2025-26 के सीजन में भारतीय कपास निगम ने जिले के 59 हजार 740 किसानों से 2 लाख 82 हजार 786 गांठ कपास खरीदी थी। इससे जिले की कपास अर्थव्यवस्था का बड़ा दायरा साफ दिखता है।
जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी शंकर तोटावार ने कहा कि इस साल के प्रतिकूल मौसम से कपास की फसल पर तनाव आया है। उन्होंने किसानों से अपील की कि फसल नुकसान की जानकारी संबंधित कृषि अधिकारियों को दें और पंचनामे की प्रक्रिया में सहयोग करें। कपास पर कीड़ों या बीमारी का प्रकोप दिखे तो विशेषज्ञों की सलाह से ही इलाज करें। उपलब्ध पानी का किफायत से इस्तेमाल करें और अगले सीजन के लिए मौसम और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखकर फसल की योजना बनाएं।