गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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12:39 IST

लाखांदूर में हल्के धान की कटाई तेज, सरकारी खरीद केंद्र अब तक शुरू नहीं

बारिश थमने से खेतों में कटाई-मड़ाई जोरों पर है, लेकिन आधारभूत खरीद केंद्र न खुलने से किसान बिक्री को लेकर परेशान हैं।

लाखांदूर में हल्के धान की कटाई तेज, सरकारी खरीद केंद्र अब तक शुरू नहीं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

लाखांदूर तालुका में हल्की किस्म के धान की कटाई शुरू हो गई है। पिछले कुछ दिनों से बारिश रुकी हुई है, इसलिए खेतों में कटाई का काम तेजी से चल रहा है। किसान मेहनत से उगाया हुआ धान घर लाने में जुटे हैं, मगर सरकारी आधारभूत धान खरीद केंद्र अभी तक शुरू नहीं हुए हैं। इस वजह से धान बेचें तो कहां, यह सवाल उनके सामने खड़ा हो गया है।

दिघोरी (मोठी) इलाके के खेतों में सुबह से शाम तक कटाई और मड़ाई का काम दिख रहा है। सभी जगह एक साथ कटाई शुरू होने से गांवों में मजदूरों की भारी कमी महसूस हो रही है। मजदूरी के बढ़े हुए दाम और वक्त की बचत को देखते हुए कई किसान कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई करा रहे हैं। इस साल कीड़ों और बीमारियों का असर अपेक्षाकृत कम रहा है, इसलिए किसानों को उम्मीद है कि हल्के धान की पैदावार संतोषजनक रहेगी।

कटाई का सीजन शुरू हो चुका है, फिर भी सरकारी आधारभूत खरीद केंद्र नहीं खुले। नतीजा यह कि कटकर मड़ाई के लिए तैयार धान को कहां बेचा जाए, किसान इसी उलझन में हैं। त्योहारों का वक्त है और आगे रब्बी सीजन का खर्च भी सिर पर है। ऐसे में किसानों को हाथ में आया धान समय पर बेचकर पैसे का इंतजाम करना जरूरी है।

दिघोरी (मोठी) के किसान महेंद्र चिमणकर ने कहा कि हल्का धान कट चुका है और मड़ाई के लिए तैयार है, लेकिन सरकारी गोदाम और खरीद केंद्र अभी बंद हैं। उनके मुताबिक अगर केंद्र शुरू होने में देर हुई, तो मजबूरी में निजी व्यापारियों को कम भाव पर धान बेचना पड़ेगा।

धान उगाने वाले किसानों की नजर अब सरकार के हमीभाव और संभावित बोनस पर टिकी है। कटाई का सीजन तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगर सरकारी केंद्र शुरू होने में देर हुई, तो किसानों को निजी बाजार का सहारा लेना पड़ सकता है। इसलिए मांग उठ रही है कि प्रशासन खरीद केंद्रों की प्रक्रिया जल्दी पूरी करके किसानों को राहत दे।

सरकारी खरीद में देरी का सीधा असर किसानों की आर्थिक योजना पर पड़ने की आशंका है। बाजार में व्यापारियों से मिलने वाला दाम और सरकार का आधारभूत दर, इन दोनों के बीच का फर्क किसानों के लिए अहम होगा। इसीलिए उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी केंद्र वक्त पर खुलें और धान को सही दाम मिले।

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