कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका
सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने दोनों नेताओं की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखल कर आज रात ही सुनवाई की मांग की है।
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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत अर्जी विशेष कार्यकारी दंडाधिकारी (एसईएम) की अदालत ने खारिज कर दी है। अदालत ने दोनों की कस्टडी दो दिन और बढ़ा दी। इसके बाद सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने आशुतोष और सौरव की तरफ से सीधे दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखल की और जल्द सुनवाई की मांग की।
रत्ना सिंह ने अपील की है कि इस मामले की सुनवाई आज रात ही हो। उन्होंने यह भी कहा है कि सौरव दास और आशुतोष रांका को एक मिनट भी जेल में नहीं रहना चाहिए।
सोशल मीडिया पर बोलते हुए रत्ना सिंह ने बताया कि उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखल कर दी है और रात में ही तुरंत सुनवाई की मांग की है। उनका कहना है कि राजनीतिक दांव-पेंच की वजह से दोनों नेताओं की आजादी छीनी नहीं जानी चाहिए और उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाए। उन्होंने यह मांग भी रखी कि मामले की सुनवाई तेजी से हो, ताकि अदालत दोनों नेताओं की रिहाई से जुड़े सवालों पर विचार कर सके।
खबरों के मुताबिक सीजेपी कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक कस्टडी को चुनौती देने के लिए अब दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों के वकीलों ने भी इस मामले में तुरंत सुनवाई की मांग की है। कल एक विशेष कार्यकारी दंडाधिकारी ने दास और रांका की कस्टडी 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी। इससे पहले दोनों को पांच दिन की न्यायिक कस्टडी में भेजा गया था। उस मामले की सुनवाई के बाद उनकी न्यायिक कस्टडी दो दिन और बढ़ाई गई।
सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को बिना इजाजत जंतर मंतर इलाके में दाखिल होने के आरोप में एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद दोनों को पांच दिन की न्यायिक कस्टडी में भेज दिया गया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर मंतर को प्रदर्शन के तय स्थानों की सूची से हटा दिया गया था। इसके बावजूद 13 अक्टूबर की सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और सीजेपी के 11 और सदस्य एक निजी जगह से जंतर मंतर पहुंचे। शांति और अच्छे आचरण की शर्त पर अजिंक्य शिंदे को जमानत पर छोड़ दिया गया। सौरव दास और आशुतोष रांका अब भी कस्टडी में हैं।
रविवार सुबह आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत अर्जी पर सुनवाई करने वाले विशेष कार्यकारी दंडाधिकारी ने दावा किया कि उन्हें अज्ञात लोगों से धमकियां मिल रही हैं। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में गैर-जमानती अपराध दर्ज किया। उधर सीजेपी के संस्थापक अभिजित दीपके ने आरोप लगाया है कि सरकार आशुतोष रांका और सौरव दास की गैरकानूनी गिरफ्तारी को जानबूझकर लंबा खींच रही है।