सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
09:56 IST

सीने के इन्फेक्शन से आडवाणी अपोलो में भर्ती, डॉक्टरों की निगरानी में, हालत स्थिर

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण अडवाणी को छाती में इन्फेक्शन के कारण दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत स्थिर बताई गई है।

सीने के इन्फेक्शन से आडवाणी अपोलो में भर्ती, डॉक्टरों की निगरानी में, हालत स्थिर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें सीने में इन्फेक्शन हो गया था और उम्र के साथ चल रही सेहत की परेशानियां भी थीं, इसलिए डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में रखने का फैसला किया। आडवाणी 98 साल के हैं।

बताया गया है कि उन्हें शुक्रवार, 16 अक्टूबर की शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया। वे दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के पल्मोनरी विभाग में हैं, यानी वह विभाग जो फेफड़ों और सांस की बीमारियां देखता है। डॉक्टरों की एक टीम उन पर बारीकी से नजर रखे हुए है, इलाज चल रहा है और जरूरी जांचें भी कराई जा रही हैं। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। उम्र को देखते हुए डॉक्टर उन पर खास ध्यान दे रहे हैं। इलाज के बारे में इससे ज्यादा मेडिकल जानकारी अभी बाहर नहीं आई है। उनकी सेहत पर आगे की आधिकारिक जानकारी अस्पताल की तरफ से दी जानी है और सबकी नजर उसी पर है।

आडवाणी दिल्ली में 30, पृथ्वीराज रोड वाले अपने घर में रहते हैं। अस्पताल जाना उनके लिए पहली बार नहीं है। इसी साल मई 2026 में उम्र से जुड़ी दिक्कतों के चलते वे अपोलो में भर्ती हुए थे और कुछ दिन इलाज और निगरानी के बाद घर लौट गए थे। उससे पहले दिसंबर 2024 में उन्हें अपोलो के आईसीयू में दाखिल किया गया था, जहां बताया गया कि मेडिकल जांच के लिए उन्हें रखा गया था। 2024 में सेहत की शिकायतों पर वे अस्पताल गए थे। अब फिर भर्ती होने की खबर आने से उनके समर्थकों और सियासी गलियारों में फिक्र है।

भर्ती होने से कुछ दिन पहले, 7 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में उनके घर गए थे। एक जानकारी के मुताबिक यह मुलाकात आडवाणी के सार्वजनिक सेवा में 25 साल पूरे होने के मौके पर हुई। मोदी ने उनका हालचाल पूछा, उनका आशीर्वाद लिया और बाद में सार्वजनिक जीवन में आडवाणी के योगदान की तारीफ की।

आडवाणी ने 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर बीजेपी की नींव रखी थी। वे पार्टी के सबसे लंबे वक्त तक अध्यक्ष रहे। उनकी अगुवाई में पार्टी 1984 में सिर्फ दो सीटों पर थी और 1998 में 182 सीटों तक पहुंच गई। वे 1989 से लोकसभा में पहुंचे और 2019 में रिटायर होने तक सात बार सांसद रहे, जिसमें ज्यादातर वक्त गांधीनगर सीट उनके पास रही।

वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार में आडवाणी 1998 से 2004 तक गृहमंत्री रहे और 2002 से 2004 तक उपप्रधानमंत्री भी। 2024 में उन्हें देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भारत रत्न मिला।

2019 के बाद उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा और गांधीनगर से अमित शाह मैदान में उतरे। आडवाणी पार्टी के मार्गदर्शक मंडल में हैं, लेकिन सेहत की वजह से अब सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम ही नजर आते हैं। उन्होंने किताबें भी लिखी हैं, जिनमें 2008 में आई उनकी आत्मकथा My Country My Life, A Prisoner's Scrap-Book और दस्तावेज़ शामिल हैं।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे