करंजी MIDC पर गोंडपिपरी में बैठक, किसान बोले जमीन नहीं देंगे; दिवाली बाद आगे की कार्रवाई
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गोंडपिपरी तहसील कार्यालय में शुक्रवार (30 तारीख) को जिला प्रशासन, विधायक और किसानों की बैठक हुई। किसानों ने जमीन देने से साफ मना किया, प्रशासन ने कहा कि कोर्ट के फैसले के अधीन रहकर दिवाली के बाद कार्रवाई होगी।
गोंडपिपरी तालुका में प्रस्तावित करंजी MIDC के लिए 12 गांवों की खेती की जमीन की नपाई होने वाली है। इस चर्चा से किसान बेचैन हो गए हैं। उधर सरकार ने 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर का भाव जाहिर करके एक कदम आगे बढ़ा दिया है। इसी पृष्ठभूमि में शुक्रवार (30 तारीख) को गोंडपिपरी तहसील कार्यालय में जिला प्रशासन, विधायक और किसानों की सामूहिक बैठक हुई।
बैठक में किसानों ने गुस्सा खुलकर जाहिर किया। उनका कहना था कि हमें खेती की जमीन देनी ही नहीं है, इसलिए भाव का सवाल पैदा ही नहीं होता। किसानों ने साफ रुख लिया कि प्रस्तावित MIDC के लिए वे अपनी खेती नहीं देंगे।
किसानों ने यह भी कहा कि जो लोग नपाई के लिए आएंगे, उन्हें वे अपने खेत में पैर नहीं रखने देंगे। उनकी मांग थी कि किसानों की अलग-अलग निजी सुनवाई रोकी जाए और उसकी जगह सामूहिक जनसुनवाई रखी जाए। इस बात पर वे अड़े रहे।
जिला प्रशासन ने उपस्थित किसानों को बताया कि कोर्ट के फैसले के अधीन रहकर आगे की प्रक्रिया दिवाली के बाद चलाई जाएगी।
गोंडपिपरी तालुका प्रशासन ने करंजी MIDC के तहत 12 गांवों में भूमि अधिग्रहण के लिए संयुक्त नपाई के मकसद से यह बैठक बुलाई थी। इसमें प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और किसान तीनों शामिल थे। बैठक में जिला प्रशासन, विधायक और किसानों के बीच सामूहिक चर्चा हुई।
बैठक में विधायक देवराव भोंगले, जिलाधिकारी वसुमना पंत, जिला पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी, उपविभागीय अधिकारी आकाश वर्मा, तहसीलदार शुभम बहाकर, उपविभागीय पुलिस अधिकारी सत्यजित आमले और गोंडपिपरी के थानेदार हेमंत पवार मौजूद थे। इनके साथ सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी भी आए थे।
विधायक देवराव भोंगले ने कहा कि वे तालुका के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और उद्योग खड़े होने के बाद ही तालुका का विकास मुमकिन है।
किसानों की तरफ से समिति के एड. सचिन फुलझेले, मारोती भोयर, कमलेश निमगडे, राजेश कवठे, संजय वडस्कर, सुरज माडूरवार, राजू झाडे, माधव लडके और कल्पेश खरबनकर बैठक में थे। किसान एकता कृति समिति और औद्योगिक कृति संघर्ष समिति के पदाधिकारी भी आए थे। बारह गांवों के नागरिक और किसान बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
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