वडाला-कासारवडवली मेट्रो 4 की पहली ट्रेन दिसंबर के पहले हफ्ते में मुंबई पहुंचेगी
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अल्स्टॉम ने आंध्र प्रदेश के श्री सिटी कारखाने में मेट्रो 4 की पहली ट्रेन तैयार कर ली है। ट्रेन दिसंबर के पहले हफ्ते में मुंबई आएगी।
ठाणे और मुंबई के बीच सफर तेज और आसान बनाने वाली वडाला-कासारवडवली मेट्रो 4 लाइन के लिए बड़ी खबर आई है। इस लाइन की पहली मेट्रो ट्रेन दिसंबर के पहले हफ्ते में मुंबई पहुंचने वाली है। ट्रेन की पहली झलक भी सामने आ गई है।
आंध्र प्रदेश के श्री सिटी में अल्स्टॉम कंपनी के कारखाने में यह ट्रेन बनकर तैयार हो चुकी है। फिलहाल वहीं उसकी कड़ी टेस्टिंग और तकनीकी जांच चल रही है।
मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने इस मेट्रो लाइन के सिस्टम और ट्रेनों का कॉन्ट्रैक्ट एल एंड टी (L&T) कंपनी को दिया है। एल एंड टी के जरिए ही अल्स्टॉम से ये ट्रेनें खरीदी जा रही हैं। कॉन्ट्रैक्ट मिलने के सिर्फ चौदह महीने के रिकॉर्ड वक्त में पहली गाड़ी तैयार हुई है। ट्रैक पर टेस्ट और आरडीएसओ की मंजूरी मिलने के बाद ही यह ट्रेन असल में सेवा में उतरेगी।
अल्स्टॉम के कारखाने की क्षमता हर महीने तीन ट्रेन बनाने की है। इसी हिसाब से जनवरी 2028 तक कुल 39 ट्रेनें (234 कोच) किस्तों में दी जाएंगी। पहली 20 ट्रेनें अगस्त 2027 तक देने की योजना है, जबकि बाकी ट्रेनों का निर्माण 2028 की शुरुआत में पूरा करने का प्लान है।
इस बीच मेट्रो 4 के गायमुख से कैडबरी जंक्शन वाले हिस्से पर दिसंबर में ही सेवा शुरू करने की योजना है। लेकिन शुरू में इस रूट पर मेट्रो 7 (गुंदवली से दहिसर) की ट्रेनें चलाई जाएंगी। अल्स्टॉम की नई ट्रेनें सारे टेस्ट और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही यात्रियों के लिए चलेंगी। यानी ठाणे वालों को बिल्कुल नई ट्रेनों में सफर के लिए कुछ महीने इंतजार करना पड़ेगा।
हर ट्रेन में 310 सीटें होंगी और एक बार में 2238 यात्री सफर कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर भविष्य में ट्रेन को छह डिब्बों से बढ़ाकर आठ डिब्बों तक किया जा सकता है। ये ट्रेनें आगे चलकर ड्राइवरलेस तकनीक पर चलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ट्रेन चलाने की तकनीकी क्षमता 90 सेकंड के अंतराल की है।
सुरक्षा के लिहाज से ट्रेनों में खास 'एंटी ड्रैग' सिस्टम लगाया गया है। दरवाजे में कोई चीज या रुकावट फंसी तो यह सिस्टम उसे पकड़ लेगा और ट्रेन को चलने नहीं देगा, जिससे हादसों का खतरा कम होगा। हर ट्रेन में 36 सीसीटीवी कैमरे और 24 पैसेंजर इमरजेंसी अलार्म होंगे।
यात्रियों की सुविधा के लिए हर डिब्बे में 8 से 10 चार्जिंग पॉइंट, साइकिल रखने का अलग स्टैंड और जानकारी के लिए बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन है। हर ट्रेन में छह साइकिल स्टैंड होंगे। मुंबई की नमी भरी आबोहवा और तेज बारिश को ध्यान में रखकर ट्रेन का डिजाइन बना है। बारिश में लीकेज रोकने के लिए खास एहतियात बरता गया है और नमी के हिसाब से काम करने वाला एचवीएसी (HVAC) सिस्टम लगाया गया है। इन ट्रेनों की उम्र करीब 35 साल आंकी गई है।
स्टेशनों पर लिफ्ट, एस्कलेटर, ऑटोमैटिक टिकट सिस्टम और प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर होंगे। सौर ऊर्जा, एलईडी लाइटिंग और ऊर्जा बचाने वाली तकनीक का भी इस्तेमाल होगा।
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