मूल के कृषि कॉलेज में इसी महीने भरे जाएंगे खाली पद, कृषिमंत्री भरणे ने दिए निर्देश
आ. सुधीर मुनगंटीवार की पहल पर मंत्रालय में हुई बैठक के बाद कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे ने विभाग को तुरंत कार्रवाई करने को कहा।
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मुंबई : चंद्रपुर जिले के मूल में स्थित कृषि कॉलेज के खाली पदों को इसी महीने भरने के निर्देश कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे ने संबंधित विभाग को दिए हैं। कॉलेज के विकास के लिए आ. सुधीर मुनगंटीवार लगातार पीछा करते रहे हैं और अब उसे प्रशासन की ओर से ठोस जवाब मिला है।
कॉलेज में स्टाफ की कमी है, विकास के कई काम अटके पड़े हैं और पढ़ाई व रिसर्च से जुड़े सवाल भी बाकी हैं। इन पर जल्दी कार्रवाई हो, इसके लिए आ. मुनगंटीवार की पहल पर मंत्रालय में कृषिमंत्री की मौजूदगी में एक अहम बैठक हुई। बैठक में पदों की भर्ती समेत कॉलेज के पूरे विकास से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से और सकारात्मक चर्चा हुई।
बैठक में कृषि विभाग के सचिव परिमल सिंह, कृषि मूल्य आयोग के सदस्य बंडू गौरकर और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
आ. मुनगंटीवार ने बैठक में जोर देकर कहा कि मूल के कृषि कॉलेज में जरूरी पद लंबे समय से खाली हैं। इसकी वजह से पढ़ाई, दफ्तर के कामकाज और रिसर्च में दिक्कतें आ रही हैं। उनका कहना था कि विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा मिले और कॉलेज की रिसर्च की ताकत बढ़े, इसके लिए स्टाफ का होना जरूरी है। उन्होंने साफ मांग की कि भर्ती इसी महीने की जाए। इसे ध्यान में रखकर कृषिमंत्री भरणे ने विभाग को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।
इसी दौरान आ. मुनगंटीवार ने कई और मुद्दे उठाए। इनमें लंबे समय से सेवा दे रहे कांट्रैक्ट पर काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित सेवा में लेने का सवाल, कॉलेज से जुड़ी वनजमीन का अटका मामला और कृषि विद्यापीठ का आकृतिबंध लागू करने की बात शामिल थी। इन पर भी सकारात्मक हल निकालने के लिए जरूरी प्रशासनिक कार्रवाई पर बैठक में चर्चा हुई। यानी मामला सिर्फ भर्ती तक सीमित नहीं रहा, कॉलेज को संस्था के तौर पर मजबूत करने वाले मुद्दे भी सामने आए। इन सभी मुद्दों पर कृषिमंत्री भरणे ने संबंधितों को निर्देश दिए।
एकार्जुना के सब्जी रिसर्च सेंटर के लिए अटका हुआ फंड देने का मुद्दा भी आ. मुनगंटीवार ने प्राथमिकता से उठाया। उन्होंने कहा कि सब्जी उत्पादन में रिसर्च हो, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो और उसका सीधा फायदा किसानों तक पहुंचे, इसके लिए इस सेंटर को और सक्षम बनाना जरूरी है।
उन्होंने कृषि प्रदर्शनियों में जैविक खेती और आधुनिक कृषि तकनीक पर आधारित असरदार SOP (Standard Operating Procedure) बनाने की मांग भी की। किसानों की उपज को बाजार मिलना खेती के विकास का उतना ही अहम पहलू है, यह बताते हुए उन्होंने "जो बिकता है वह उगाना चाहिए" की सोच रखी। उनकी भूमिका यह थी कि किसानों को सिर्फ पैदावार के स्तर पर नहीं, बल्कि पैदावार से बाजार तक सक्षम बनाया जाए। कृषि शिक्षा, रिसर्च, आधुनिक तकनीक और बाजार को जोड़कर किसानों की आमदनी बढ़ाने वाली असरदार व्यवस्था खड़ी करने पर उन्होंने जोर दिया।
आ. मुनगंटीवार की कोशिशों का केंद्र यह है कि मूल का कृषि कॉलेज सिर्फ डिग्री देने वाली संस्था बनकर न रह जाए, बल्कि अच्छी कृषि शिक्षा, अत्याधुनिक रिसर्च, नई तकनीक और किसानों के सीधे काम आने वाले ज्ञान का असरदार केंद्र बने। उन्होंने कहा कि इमारत और बुनियादी सुविधाओं के साथ कॉलेज को जरूरी स्टाफ, रिसर्च के साधन और संस्थागत क्षमता भी मिलनी चाहिए। कॉलेज को अपेक्षित ऊंचाई मिलने तक यह पीछा जारी रहेगा, यह बात भी उन्होंने इस मौके पर साफ की।