मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

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00:22 IST

जिवती के आसापूर में पानी का संकट, जर्जर कुएं और तालाब को लेकर चक्काजाम की चेतावनी

आकांक्षित तालुका जिवती के आसापूर गांव में पुराना कुआं जर्जर है। ग्रामसभा ने जिलाधिकारी को निवेदन दिया और पेराबोक्की महासंघ ने चक्काजाम की चेतावनी दी है।

जिवती के आसापूर में पानी का संकट, जर्जर कुएं और तालाब को लेकर चक्काजाम की चेतावनी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

आकांक्षित तालुका के नाम से जाने जाने वाले जिवती तालुका के आसापूर गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं का सवाल गंभीर बना हुआ है। गांव का पुराना कुआं जर्जर हो चुका है। पानी होने के बावजूद उसका सुरक्षित इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है। पेराबोक्की महासंघ ने चेतावनी दी है कि इन समस्याओं पर फौरन कदम नहीं उठाए गए तो जिवती तालुका में चक्काजाम आंदोलन किया जाएगा।

आसापूर ग्रामसभा की तरफ से 14 अक्टूबर 2026 को जिलाधिकारी को निवेदन सौंपा गया। इसमें गांव की पानी की समस्या हमेशा के लिए सुलझाने की मांग की गई है। निवेदन में कहा गया है कि कुएं की मरम्मत का काम तुरंत शुरू किया जाए। साथ ही नया तालाब बनाया जाए या पुराने तालाब को गहरा किया जाए, ताकि गांव में पानी का भंडार बढ़े।

गांव का यह पुराना कुआं कई सालों से ग्रामीणों के लिए पानी का अहम जरिया रहा है। बारिश के मौसम से लेकर फरवरी महीने तक इसमें भरपूर पानी रहता है। लेकिन कुआं धंस चुका है और जर्जर हालत में है, इसलिए हादसे का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों के सामने सवाल है कि पानी का स्रोत मौजूद होने पर भी उसे सुरक्षित तरीके से कैसे इस्तेमाल करें।

ग्राम पंचायत प्रशासन की ओर से बताया जाता है कि कुएं की मरम्मत को मंजूरी मिल गई है। फिर भी असल काम कब शुरू होगा, इस बारे में कोई साफ जानकारी नहीं है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि हर साल मंजूरी मिलने की बात कही जाती है, पर कुएं की बदहाली जस की तस है। इसलिए अब वादों की जगह असल काम शुरू करने की मांग जोर पकड़ रही है।

'मंजूरी मिल गई तो काम शुरू होने में देरी क्यों?' यह सवाल उठाते हुए मांग की गई है कि प्रशासन मरम्मत के काम की मौजूदा स्थिति, उपलब्ध निधि और काम शुरू करने की पक्की समय सीमा जाहिर करे।

जिवती तालुका में आकांक्षित तालुका विकास उपक्रम के साथ केंद्र सरकार का आदि कर्मयोगी अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके बावजूद आसापूर में बुनियादी सुविधाओं का सवाल बना हुआ है, इस पर पेराबोक्की महासंघ ने नाराजगी जताई है।

ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों के लोगों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना विकास योजनाओं का मुख्य मकसद है। लेकिन गांव का पुराना कुआं सुरक्षित न होना और पानी का भंडार बढ़ाने के लिए तालाब बनाने या उसे गहरा करने की मांग करनी पड़ना, यह दिखाता है कि स्थानीय विकास कामों पर और गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। महासंघ की मांग है कि सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों में न रहें, उनका फायदा सीधे ग्रामीणों तक पहुंचे। संबंधित विभाग आपस में तालमेल बिठाकर आसापूर की पानी की समस्या पर ठोस फैसला लें।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नया तालाब बनाना या पुराने तालाब को गहरा करना जरूरी है। इसके लिए जिलाधिकारी को निवेदन देकर प्रशासन का ध्यान खींचा गया है। निवेदन देते वक्त सरपंच मंगेश सोयाम, पेराबोक्की महासंघ के संतोष सलाम, शितरू गेडाम, लच्चू वल्का के साथ गांव के प्रतिष्ठित नागरिक, महिलाएं और पुरुष मौजूद थे। इस मामले में जिला सत्र न्यायाधीश अभय लाहोटे, जिला विधि सेवा प्राधिकरण के मिलिंद इंगले और एड. महेंद्र असिरात ने ग्रामीणों का सहयोग किया।

इस बीच पेराबोक्की महासंघ की प्रेरणा से ग्रामीणों ने जल संरक्षण के लिए जल भंडार और वनराई बांध बनाने का काम भी हाथ में लिया है। ग्रामीण खुद पानी बचाने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार भी कुएं की मरम्मत और तालाब के कामों को प्राथमिकता देगी।

कुएं की बदहाली को देखते हुए ग्रामीणों ने कहा है कि किसी हादसे से पहले ही मरम्मत और सुरक्षित निर्माण पूरा होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि 'मौत के बाद पानी पिलाने से बेहतर है कि जिंदा लोगों को सुरक्षित पानी दीजिए!'

महासंघ ने प्रशासन के सामने मुख्य मांगें रखी हैं: कुएं की फौरन मरम्मत हो, नया तालाब बने या पुराना तालाब गहरा किया जाए, मरम्मत की मंजूरी का आधिकारिक ब्योरा और निधि की स्थिति साफ की जाए, और गांव को सुरक्षित व पर्याप्त पानी देने के लिए स्थायी उपाय किए जाएं।

महासंघ ने फिर कहा है कि आसापूर की पानी की समस्या पर प्रशासन ने फौरन कार्रवाई नहीं की तो जिवती तालुका में चक्काजाम आंदोलन छेड़ा जाएगा। ग्रामीणों की जोरदार मांग है कि बात सिर्फ मंजूरी और वादों तक न रहे, कुएं की मरम्मत का काम सच में शुरू हो और तालाब बनाने या गहरा करने की मांग पर ठोस फैसला लिया जाए।

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