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21:51 IST

ग्वाल्हेर हादसे के बाद फिर सवाल: गलत रास्ते के लिए Google Maps कितना जिम्मेदार?

मध्य प्रदेश के ग्वाल्हेर में हुए भीषण हादसे में अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है। इसके बाद नेविगेशन ऐप पर भरोसे को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ग्वाल्हेर हादसे के बाद फिर सवाल: गलत रास्ते के लिए Google Maps कितना जिम्मेदार? तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

जिस जगह का पता हमें नहीं मालूम होता, वहां पहुंचने के लिए हम ज्यादातर Google Maps खोल लेते हैं। कई बार शॉर्टकट के चक्कर में लोग 'गूगल बाबा' पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं और 100 से 150 की रफ्तार से गाड़ी दौड़ाते हैं। लेकिन यही भरोसा कई बार जानलेवा साबित हुआ है।

मध्य प्रदेश के ग्वाल्हेर में हुए ताजा भीषण हादसे के बाद Google Maps की भरोसेमंदी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चिंता जताई जा रही है कि गलत रास्तों, अधूरे पुलों और पाबंदी वाली सड़कों से गाड़ियां गुजरने की वजह से हादसों का खतरा बढ़ रहा है।

ग्वाल्हेर की इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया। यहां अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है। फिर भी अभी यह पक्का नहीं हुआ है कि इस हादसे के लिए अकेले Google Maps जिम्मेदार है। जानकारों की राय है कि हादसे की असल वजह, गाड़ी में आई तकनीकी खराबी और गलत रास्ते की भूमिका, इन सबकी जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

ग्वाल्हेर के सीएसपी रवि भदौरिया की दी हुई शुरुआती जानकारी के मुताबिक खेती का माल लेकर जा रहे ट्रक डबरा मंडी से आ रहे थे। ड्राइवर इलाके का नहीं था, इसलिए अंदाजा लगाया गया है कि उसने Google Maps से रास्ता ढूंढा होगा और कम दूरी वाला रास्ता चुना होगा। मंदिर के पास घाट वाले हिस्से में पहुंचते ही ट्रक के प्रेशर रिलीज सिस्टम में खराबी आ गई। इससे उसके ब्रेक फेल हो गए और ट्रक भीड़ वाली जगह में घुस गया, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ।

देश में हाईवे, एक्सप्रेस वे और पुलों का जाल तेजी से फैल रहा है। साथ ही कई जगह सड़कों का काम चल रहा है, कुछ पुल अधूरे हैं और कुछ रास्तों पर गाड़ियों की आवाजाही पर रोक है। ऐसे में डिजिटल नक्शे की जानकारी और सड़क की असली हालत के बीच फर्क कई बार देखने को मिला है।

इस हालात में गाड़ी चलाने वालों के फंसने का अंदेशा रहता है। खासकर भारी गाड़ियों को तंग सड़कों या तेज ढलान वाले रास्तों से गुजरना पड़े तो खतरा बढ़ सकता है। इसलिए नेविगेशन ऐप की जानकारी अपडेट रखने के साथ-साथ सड़क पर लगे बोर्ड और स्थानीय प्रशासन के निर्देश मानना भी जरूरी है।

Google Maps इस्तेमाल करते वक्त ड्राइवरों को सिर्फ स्क्रीन पर दिख रहे रास्ते के भरोसे नहीं रहना चाहिए। सड़क के दिशा बोर्ड, बैरिकेडिंग और स्थानीय प्रशासन की हिदायतों को पहले रखना चाहिए। भारी गाड़ियों के ड्राइवर ऐसा रास्ता चुनें जो गाड़ी के साइज, वजन और सड़क की क्षमता के हिसाब से ठीक हो।

इसके अलावा नेविगेशन कंपनियों, सड़क निर्माण विभाग और प्रशासन के बीच तालमेल बढ़ाकर बंद या खतरनाक रास्तों की जानकारी वक्त पर अपडेट करना जरूरी है। ग्वाल्हेर के हादसे से साफ दिखता है कि तकनीक पर आंख मूंदकर निर्भर रहना भारी पड़ सकता है। शॉर्टकट की जगह सुरक्षित सफर चुना गया होता, तो आज कई लोगों की जान बच सकती थी।

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