सातारा के माण, खटाव और फलटण में 35 टैंकर से पानी, 39 गांवों की प्यास बुझाने की कोशिश
जिला प्रशासन तीन तालुकों के 39 गांवों और 236 बस्तियों में टैंकर चला रहा है। कराड के मसूर पूर्व इलाके में भी सूखे जैसे हालात हैं।
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सातारा जिले के सूखाग्रस्त इलाकों में लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। माण, खटाव और फलटण, इन तीन तालुकों के 39 गांवों और 236 बस्तियों में जिला प्रशासन कुल 35 टैंकर से पानी पहुंचा रहा है। इन टैंकरों में 1 सरकारी है और 34 प्राइवेट हैं।
प्रशासन के मुताबिक इन गांवों और बस्तियों में रहने वाले 54,257 लोगों और 41,107 मवेशियों की प्यास बुझाने के लिए यह इंतज़ाम किया गया है। पानी की किल्लत कम करने के लिए प्रशासन ने 16 कुएं और 9 बोरवेल भी अधिग्रहित किए हैं।
सबसे ज़्यादा असर माण तालुका पर है। यहां 31 गांव और 200 बस्तियां प्रभावित हैं और इनकी आबादी 45,702 है। तालुका में 38,972 मवेशी भी इस संकट की चपेट में हैं। माण में कुल 30 टैंकर चल रहे हैं, जिनमें 1 सरकारी और 29 प्राइवेट हैं। साथ ही 10 कुएं और 6 बोरवेल अधिग्रहित किए गए हैं। दहिवडी, शिंगणापूर, म्हसवड, मार्डी, वरकुटे मलवडी, मलवडी, आंधळी और कुकुडवाड सर्कल के गांवों में टैंकर से पानी दिया जा रहा है।
खटाव तालुका के 7 गांवों और 36 बस्तियों में 7,833 लोगों को 4 प्राइवेट टैंकर से पानी मिल रहा है। यहां 6 कुएं और 3 बोरवेल अधिग्रहित किए गए हैं। मायणी, का. खटाव, बुध और कलेढोण इलाके के गांवों में पानी बांटा जा रहा है।
फलटण तालुका में दुधेबावी मंडल के एक गांव के 722 लोगों के लिए 1 प्राइवेट टैंकर शुरू किया गया है। अभी प्रशासन टैंकर के फेरों और कुओं के अधिग्रहण के ज़रिए किल्लत वाले इलाकों के लोगों को राहत देने की कोशिश कर रहा है।
सातारा जिले के कुछ तालुकों में सूखा घोषित हो चुका है। इसके बावजूद कराड तालुका के मसूर पूर्व इलाके के कई गांवों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। बारिश न होने से खरीफ की फसलों का बड़ा नुकसान हुआ है। खेती के पानी के साथ पीने के पानी का सवाल भी दिन ब दिन गंभीर होता जा रहा है।
मसूर इलाके के रिसवड, अंतवडी, गायकवाडवाडी, घोलपवाडी, हनबरवाडी, निगडी, खोडजाईवाडी, चिखली, किवळ, बानुगडेवाडी, गोसावेवाडी और हेळगांव का पूर्वी हिस्सा हमेशा पानी की किल्लत झेलता है। पुणे-बंगलूर हाईवे के किनारे और नदी किनारे का इलाका हरा-भरा दिखता है, इसलिए मान लिया जाता है कि पूरे इलाके की हालत एक जैसी है। नतीजा यह है कि पहाड़ी और असिंचित इलाके के गांवों को सूखे की राहत योजनाओं का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।
इस इलाके के कुछ गांवों में गर्मी के दिनों में पीने के पानी के लिए वैसे भी टैंकर का इंतज़ाम करना पड़ता है। इस साल बारिश का हाल ठीक नहीं रहा, इसलिए पानी का संकट और गहरा गया है। खेती के लिए काफी पानी न होने से किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।