होर्मुझ के पास अमेरिकी युद्धपोत आए तो जवाब मिलेगा, ईरान की अमेरिका को चेतावनी
ईरान के IRGC नौसेना कमांडर ने अमेरिकी नौसेना की बढ़ती मौजूदगी पर चेतावनी दी है।
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मध्य पूर्व के बेहद संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुझ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज होने की आशंका खड़ी हो गई है। अमेरिकी नौसेना ने अरब सागर और फारस की खाड़ी में अपनी मौजूदगी बड़े पैमाने पर बढ़ाई है। इसके बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने कड़ी नाराजगी जताई है।
IRGC नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल अली अजमाई ने अमेरिकी सेना को साफ शब्दों में चेताया है। उनका कहना है कि इस पूरे समुद्री इलाके पर ईरानी सेना की मजबूत पकड़ है। अमेरिका ने कोई भी भड़काऊ या आक्रामक कदम उठाया तो ईरानी सेना उतनी ही तीव्रता से जवाब देगी।
अली अजमाई ने अमेरिका पर गंभीर आरोप भी लगाया है। उनके मुताबिक अमेरिका मध्य पूर्व के प्राकृतिक संसाधनों और समुद्री रास्तों पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी, ओमान सागर और होर्मुझ जलडमरूमध्य में विदेशी युद्धपोतों की हर हरकत पर ईरान की बारीक नजर है। अमेरिका के अरबों डॉलर के युद्धपोत ईरान की सैन्य क्षमता के सामने बेअसर साबित होंगे, यह तंज कसते हुए उन्होंने ऐलान किया कि ईरानी सेना अमेरिकी जहाजों को रोकने के लिए तैयार है।
दूसरी तरफ अमेरिका के रक्षा विभाग ने समुद्री व्यापार मार्गों की हिफाजत और क्षेत्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इस इलाके में नौसेना की मजबूत घेराबंदी खड़ी की है। दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने यहां दो प्रमुख विमानवाहक जहाज, यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन और यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश, तैनात किए हैं। इन जहाजों से सीधे समुद्र से लड़ाकू विमान उड़ाने और हवाई हमले करने की क्षमता अमेरिका को मिलती है।
इन विमानवाहक जहाजों की सुरक्षा और हवाई बचाव के लिए गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, क्रूजर और आधुनिक युद्धपोतों का बेड़ा भी लगाया गया है। इसमें यूएसएस शूप (DDG-86) समेत करीब 10 से 15 विध्वंसक और यूएसएस बॉक्सर (LHD-4) जैसे उभयचर हमलावर जहाज शामिल हैं। इन सभी जहाजों पर अमेरिकी मरीन कमांडो की टुकड़ियां और उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली तैनात हैं, जो दूर से सटीक हमले करने में सक्षम हैं।
अमेरिका की इस ताकत का सामना करने के लिए ईरान ने भी अपने तट पर 5 प्रमुख हथियारों की तैयारी की है। पहला, तेज हमला करने वाली नावें: IRGC के पास छोटी, बहुत तेज और मिसाइलों से लैस नावों का बड़ा बेड़ा है, जो दुश्मन के बड़े जहाजों को घेरने के काम आता है। दूसरा, जहाज-रोधी मिसाइलें: ईरान के पास 'अबू महदी' जैसी उन्नत क्रूज मिसाइलें और तट से दागी जाने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें मौजूद हैं।
तीसरा, ड्रोन और आत्मघाती ड्रोन: हवा में चक्कर काटकर सीधे निशाने पर टकराने वाले ये ड्रोन ईरान की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा हैं। चौथा, समुद्री सुरंग (Naval Mines): होर्मुझ के संकरे जलडमरूमध्य में सुरंगें बिछाकर अमेरिकी जहाजों और तेल टैंकरों को फंसाने की क्षमता ईरान के पास है। पांचवां, मोबाइल मिसाइल लॉन्चर और रडार नेटवर्क: तट पर छिपाकर रखे जा सकने वाले लॉन्चर और अत्याधुनिक रडार सिस्टम से ईरान के लिए अचानक हमले करना आसान हो जाता है।
होर्मुझ जलडमरूमध्य को पूरी दुनिया का सबसे अहम 'ऑइल चोकपॉइंट' माना जाता है। दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल और तरल प्राकृतिक गैस (LNG) का करीब 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी एक संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। ईरान और अमेरिका के टकराव में यह रास्ता बंद हुआ या यहां जंग भड़की, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी हड़कंप मच सकता है।
इस टकराव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ेगा। भारत, चीन और जापान जैसे एशियाई देशों के लिए यह रास्ता बेहद अहम है, क्योंकि इन देशों का ज्यादातर कच्चा तेल मध्य पूर्व से इसी रास्ते आता है। तेल के दाम बढ़े तो महंगाई बढ़ेगी और भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर भारी आर्थिक दबाव आ सकता है।